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विश्व रंगमंच दिवस पर किस्सागोई
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 28 Mar 2014 01:50 PM IST
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विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर हौसला फाउण्डेशन की ओर से किस्सागोई पेश की
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गई।
नादिरा जहीर बब्बर का लिखा हुआ नाटक ‘दयाशंकर की डायरी’ को किस्सागोई नाट्य विधा के तहत मंचित किया गया। जिसमें रंगकर्मी धरमश्री सिंह की भूमिका अहम रही।
अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल मिश्र गुरुजी ने किया। नाटक के जरिए जिज्ञासा और कौतुहल भरे प्रश्न दर्शकों केसमक्ष उठाए गए।
साथ ही इंसानी दिमाग की फितरतों को बड़ी ही सरलता से मंच पर पेश किया गया।
अभय गुप्त, विष्णु पाण्डेय, मोहम्मद शान, अमित सिंह, ज्योति पाण्डेय, अंशुमान दीक्षित, मोहम्मद हैदर, अतुल श्रीवास्तव, श्रुति सिंह, मोहित मोदनवाल, पूनम सिंह, सुधाकर दीक्षित ने भी किस्सागोई की परम्परा पर विचार व्यक्त किए। संचालन अजय कुमार नायक ने किया।
दूसरी ओर मदर सेवा संस्थान द्वारा चलाए जा रहे चबूतरा थियेटर पाठशाला में बच्चों को रंगमंच की तकनीकियों व बारीकियों से रूबरू कराया गया।
अध्यक्ष महेश चंद्र देवा ने बच्चों को बताया कि रंगमंच जीवन के फलसफे को पेश करने का एक जरिया मात्र है।
नादिरा जहीर बब्बर का लिखा हुआ नाटक ‘दयाशंकर की डायरी’ को किस्सागोई नाट्य विधा के तहत मंचित किया गया। जिसमें रंगकर्मी धरमश्री सिंह की भूमिका अहम रही।
अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल मिश्र गुरुजी ने किया। नाटक के जरिए जिज्ञासा और कौतुहल भरे प्रश्न दर्शकों केसमक्ष उठाए गए।
साथ ही इंसानी दिमाग की फितरतों को बड़ी ही सरलता से मंच पर पेश किया गया।
अभय गुप्त, विष्णु पाण्डेय, मोहम्मद शान, अमित सिंह, ज्योति पाण्डेय, अंशुमान दीक्षित, मोहम्मद हैदर, अतुल श्रीवास्तव, श्रुति सिंह, मोहित मोदनवाल, पूनम सिंह, सुधाकर दीक्षित ने भी किस्सागोई की परम्परा पर विचार व्यक्त किए। संचालन अजय कुमार नायक ने किया।
दूसरी ओर मदर सेवा संस्थान द्वारा चलाए जा रहे चबूतरा थियेटर पाठशाला में बच्चों को रंगमंच की तकनीकियों व बारीकियों से रूबरू कराया गया।
अध्यक्ष महेश चंद्र देवा ने बच्चों को बताया कि रंगमंच जीवन के फलसफे को पेश करने का एक जरिया मात्र है।