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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   World Human Rights Day: Do not sit silent if human rights are being violated

मानवाधिकार का हनन हो रहा तो मौन न रहें, उठाएं आवाज, जानिए ये भी हैं आपके अधिकार

Tue, 10 Dec 2019 06:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 10 Dec 2019 06:19 PM IST
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World Human Rights Day: Do not sit silent if human rights are being violated
प्रतीकात्मक तस्वीर

आपके मानवाधिकार का हनन हो रहा तो मौन न रहें। मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा तो मौन न रहें। मानवाधिकार विशेष प्रकोष्ठ में शिकायत करें। जिला प्रशासन के स्तर पर मानवाधिकार हनन से जुड़े मसलों की सुनवाई के लिए अलग से विशेष प्रकोष्ठ है। यहां शिकायतों के निस्तारण के लिए एडीएम स्तर के अधिकारी की अगुवाई में  विशेष प्रकोष्ठ गठित है।

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जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि जेल में किसी कैदी की अचानक मृत्यु हो जाने, संवासिनी केंद्रों पर किसी संवासिनी अथवा बाल शिशु गृह में रहने वाले बच्चे की असामयिक मौत पर प्रशासन पीड़ित के जीने के अधिकार के हनन का मामला मानते हुए स्वत: संज्ञान लेता है। ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेटी जांच कराकर जिम्मेदारों को कार्रवाई के घेरे में लाया जाता है।
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इसके साथ ही बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ देने वाले पुत्र-पुत्रियों व रिश्तेदारों के खिलाफ भी मानवाधिकार हनन के तहत ही प्रशासन स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।

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कलेक्ट्रेट में महिलाओं की सहायता के लिए अलग से होगी हेल्पलाइन

महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन जल्द ही कलेक्ट्रेट परिसर में अलग से हेल्प लाइन शुरू करेगा। इसके टोल फ्री नंबर पर कोई भी पीड़ित महिला अपने साथ होने वाले अधिकारों के हनन अथवा उत्पीड़न के संबंध में जानकारी देकर मदद पा सकेंगी। इस हेल्पलाइन पर दर्ज होने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए एक अपर जिलाधिकारी स्तरीय अधिकारी को नोडल नामित किया जाएगा।

जानिए अपने कुछ खास अधिकार
स्वास्थ्य: सेकंड ओपीनियन लेना मरीज का अधिकार
मरीजों के अधिकार को लेकर अभी तक अलग से कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। लेकिन मानवाधिकार से जुड़े पहलुओं में ही चिकित्सा संबंधी अधिकार भी शामिल हैं। आईएमए के सचिव डॉ. जेडी रावत बताते हैं कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2018 में एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मरीजों के अधिकार से जुड़े कई अहम प्रावधान किए थे।

इसमें अस्पतालों में आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र बनाने की बात क ही गई है। यह अलग बात है कि अभी तक इसे कानूनी रूप नहीं दिया गया है। इसी तरह मरीज को  अपनी बीमारी के बारे में दूसरे चिकित्सक से परामर्श लेने (सेकंड ओपीनियन), अपनी जांच रिपोर्ट लेने, एक पैथी की दवा चल रही हो तो दूसरी पैथी का चयन करने का अधिकार दिया गया है।

इसी तरह  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र के अनुच्छेद 25 में हर व्यक्ति को मेडिकल केयर का अधिकार दिया गया है। इसमें भारत भी शामिल है। हालांकि अभी तक इसे अमलीजामा पहनाया नहीं जा सका है।

रेलवे

रेलयात्री जानें ये भी हैं आपके अधिकार
-चलती ट्रेन में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं  इसकेलिए टीटीई के पास रजिस्टर होता है। रजिस्टर नहीं देने पर 139 पर टीटीई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
-टिकट कन्फर्म नहीं होने की स्थिति में आप जनरल बोगी में यात्रा कर सकते हैं। हालांकि यह सुविधा काउंटर से जारी टिकट पर ही मिलती है।
-प्लेटफॉर्म टिकट लेकर भी आप ट्रेन में सफर कर सकते हैं, बशर्ते ट्रेन में चढ़ने के बाद आपको टीटीई से अपने गंतव्य तक का टिकट बनवाना होगा।

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