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मेट्रो को तकनीकी मदद देने पर विश्व बैंक राजी

Thu, 19 Dec 2013 01:12 PM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Thu, 19 Dec 2013 01:12 PM IST
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world bank ready for technical assistent

मेट्रो प्रोजेक्ट में एक-एक कदम आगे बढ़ रहा है विश्व बैंक। आर्थिक मदद के लिए थोड़ा और इंतजार करने को कह कर बैंक ने तकनीकी मदद के लिए हामी भर दी है।

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बैंक के अधिकारियों ने लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक राजीव अग्रवाल के साथ बैठक की और महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

बैंक ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि परियोजना अधिकांश लोगों की मदद करने क लक्ष्य लेकर जमीन पर उतारी जाए।

एलएमआरसी पदाधिकारियों के साथ बैठक में बैंक की ओर से सभी मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा विकसित करने का सुझाव दिया गया है। कहा गया कि सभी स्टेशनों पर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव नहीं है।
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ये पार्किंग होगी तभी टू व्हीलर चालक मेट्रो में सवार होंगे। यह भी सुझाव दिया गया कि निर्माण के बाद संचालन (ऑपरेशन) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का कंसलटेंट नियुक्त किया जाए।
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इससे संचालन में बहुत अधिक सुविधा होगी। दूसरी ओर, मेट्रो परियोजना को ऋण देने के संबंध में विश्व बैंक के अधिकारियों ने फाइनल रिपोर्ट बनाने के बाद यह बैठक की गई।

एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल ने बताया कि, विश्व बैंक के कर्ज देने के मानक बहुत ही पारदर्शी और सख्त हैं, इसलिए हमारे लिए भी यह परीक्षा की घड़ी है।

इससे पहले तीन दिन तक विश्व बैंक की टीम ने राजधानी में मेट्रो रूट का सर्वे किया।

...तो हर मेट्रो स्टेशन पर होगी पार्किंग

विश्व बैंक के अधिकारियों ने राजधानी में दोपहिया वाहनों की पार्किंग भी देखीं। उन्होंने बसों में सफर किया और राजधानी में भीड़ का अंदाजा लिया।

कई जाम वाली सड़कों से भी टीम के सदस्य गुजरे। मजे की बात यह है कि दोपहिया वाहनों की सड़क पर लगने वाली पार्किंग ने विश्व बैंक के सदस्यों को खासा आकर्षित किया।

इस बारे में एलएमआरसी के अधिकारियों के समक्ष आश्चर्य व्यक्त किया कि लखनऊ में बहुत कम जगह में बहुत करीने से बाइक खड़ी की जाती हैं।

इसलिए अगर सभी मेट्रो स्टेशन के पास पार्किंग दे दी जाए तो बहुत अधिक खर्च नहीं होगा। इससे बाद में अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ेंगे।

जनता की सहूलियत ज्यादा से ज्यादा हो
जनता को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत दी जाए, ये कोशिश मेट्रो रेल चलाने में होनी चाहिए। मेट्रो स्टेशन पर यात्री कैसे जाएंगे।

वहां से किस तरह से बाहर आएंगे। उनको अंदर क्या-क्या सुविधाएं दी जाएंगी। हर जगह पार्किंग बनाई जाए, जनसुविधाएं अधिक हों। तकनीकी विकास से जुड़े संसाधन मेट्रो स्टेशन पर हों। इसकी भी कोशिश की जानी चाहिए।


विश्व बैंक ने जो आंकड़े जुटाए उसके मुताबिक, राजधानी की सड़क पर रोज 12 लाख वाहन दौड़ते हैं। सबसे बड़ा उपयोग इसी वर्ग को मेट्रो रेल का करना पड़ेगा।

रखें इंटरनेशनल कंसल्टेंट
विश्व बैंक ने सलाह दी है कि, इस परियोजना के लिए कंसल्टेंट इंटरनेशनल होना चाहिए। यह निर्माण एजेंसी से अलग होगा।

फिलहाल देश में मेट्रो संचालन से जुड़ी एक ही एजेंसी है डीएमआरसी मगर विश्व बैंक की ओर से सलाह दी गई है कि, अगर किसी अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंट को ऑपरेशन के लिए चुना जाएगा तो और बेहतर होगा।

मेट्रो परियोजना के लिए विश्व बैंक बहुत गंभीर है। उनके अधिकारी जाम में फंस कर और बसों में चढ़ कर राजधानी के यातायात को समझ रहे हैं। उनका कहना है कि, हर स्टेशन पर दोपहिया पार्किंग हो।

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