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'कानून के भय से अपराधों में आएगी कमी', सीएम ने कहा- अपराधियों को दंड दिलाने में यूपी पहले नंबर पर

Sat, 14 Dec 2019 12:35 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क,अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 14 Dec 2019 12:35 PM IST
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Workshop in Police head quarter in Lucknow.
कार्यशाला में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का भय ही अपराधियों में डर और अपराधों में कमी ला सकता है। कानून का राज ही सुशासन का आधार है। हम सभी को इस पर फोकस करना होगा। यूपी में पिछले दो वर्ष में अपराध रोकने पर काफी काम हुआ है।

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महिलाओं व बालिकाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए बेहतर काम किया गया है। अपराधियों को दंड दिलाने में भी यूपी पहले नंबर पर है। वे शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में ‘साइबर क्राइम और महिला-बाल अपराध विवेचना’ विषयक कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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अपराधियों को सजा दिलाने के लिए विवेचकों व अभियोजन अधिकारियों में बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए योगी ने कहा कि साइबर क्राइम को लेकर आम लोगों में नई आशंकाएं जन्म ले रही हैं। इस मुद्दे पर देश के सबसे बड़े राज्य में हो रही दो दिवसीय कार्यशाला लाभप्रद साबित होगी।
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पिछले दो साल में इस दिशा में बेहतर काम हुआ है। दो साल पहले यह पता लगाने के लिए समिति बनाई गई थी कि क्या महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों की समयबद्ध जांच हो रही है। जांच में पता चला कि जिला स्तर पर समन्वय की कमी है।

हर माह निरस्त कराई जा रही 11 हजार जमानतें

अपराधी गिरफ्तार हो रहे हैं और समय से चार्जशीट भी दाखिल हो रही है, लेकिन वर्षों से मामले लंबित हैं। अगर अभियोजन समय से हो तो आरोपी को जल्द सजा मिल सकती है। दोषी अपराधियों को सजा दिलाने में विवेचना-अभियोजन के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए।

एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय ने कहा कि प्रदेश में पहले हर माह औसतन पांच हजार जमानतें निरस्त होती थीं, लेकिन अब हर माह 11 हजार जमानतें निरस्त कराई जा रही हैं। पॉक्सो एक्ट में दोष सिद्धि का प्रतिशत प्रतिमाह 51 से बढ़कर 81 फीसदी हो गया है।

वर्तमान में करीब 60 हजार मामलों में प्रतिमाह सजा हो रही है। इस वर्ष दोषमुक्त हुए सभी मामलों में गवाहों व वादियों से बुलाकर कारणों की समीक्षा की गई, जिसका डाटा राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को देकर उस पर शोधपत्र तैयार कराया जा रहा है। 

लखनऊ व मुरादाबाद देश के तीन शीर्ष जिलों में
एडीजी ने बताया कि ई-प्रॉसीक्यूशन पोर्टल पर काम करने में यूपी देश के सभी राज्यों में अव्वल है। इसमें देश के तीन शीर्ष जिलों में लखनऊ पहले, जयपुर दूसरे व मुरादाबाद तीसरे नंबर पर है।
 

जिला जज और डीएम तय करें पॉस्को के मामलों की वरीयता

योगी ने कहा कि समय से मिला न्याय ही न्याय है। अंतर विभागीय समन्वय से दोषियों के खिलाफ  बेहतर कार्रवाई हो सकती है। जिला जज के साथ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बैठकर पॉस्को के मामले की वरीयता तय करें। इससे अपराधी को समय से दंड दिलवा सकते हैं। मुकदमों में देरी होने पर गवाह के मुकरने की आशंका रहती है और पीड़ित भी निराश हो जाता है। तत्काल सजा होने पर सकारात्मक संदेश जाता है।

प्रदेश में फोरेंसिक विवि की होगी स्थापना
सीएम ने कहा कि कोई बेगुनाह न फंसे, लेकिन कोई अपराधी भी न बच पाए। इसका ध्यान रखना होगा। सरकार महिलाओं और बच्चों के प्रति हो रहे अपराधों से निपटने के लिए 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर रही है। साइबर अपराध से निपटने के लिए हर रेंज में एक-एक साइबर थाना और फॉरेंसिक सेंटर खोला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपना फॉरेंसिक विश्वविद्यालय भी खोलेगी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि अभियोजन को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पॉस्को के मामलों की लगातार सुनवाई की जा रही है। ई-प्रणाली लागू करने के लिए टैब व लैपटॉप दिए जा रहे हैं। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा पॉस्को मामले में 13 जिलों में गुणवत्तापूर्ण मामलों का निस्तारण किया गया।

विशेषज्ञों ने साइबर अपराधों की समझाईं बारीकियां

लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल बंद, खाते से उड़ी रकम
फिशिंग लिंक भेजा और उस पर क्लिक करते ही मोबाइल बंद हो गया। खाते से भी रुपये गायब हो गए। ऐसे मामलों की रोकथाम कैसे की जाए और क्या सावधानियां बरती जाएं? कार्यशाला में इसकी जानकारी भी विशेषज्ञों ने दी।

आगरा साइबर सेल के इंस्पेक्टर शैलेश कुमार सिंह व उपनिरीक्षक विशाल शर्मा ने विभिन्न विवेचना तथा अपराधों के अनावरण की केस स्टडी का प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने फिशिंग लिंक से धोखाधड़ी के प्रकरण पर बिंदुवार केस स्टडी और साक्ष्य संकलन का प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों ने बताया कि विवेचना से पता चला कि पीड़ित के अकाउंट नंबर से आईडी बना कर एक पेमेंट गेटवे से हस्तांतरण किया गया था। विवेचक ने आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर पता कर हस्तांतरण से वॉलेट की जानकारी की और जालसाज की पहचान कर ली।

 

लॉटरी के झांसे से किया आगाह

कार्यशाला में लॉटरी का झांसा देकर ठगी करने वाले प्रकरणों की भी केस स्टडी का प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें एक विज्ञापन नंबर से प्राप्त एसएमएस में अंकित ई-मेल से लोगों से संपर्क किया और विभिन्न बैंक अकाउंट में लोगों के पैसे जमा करके धोखाधड़ी की गई।

इसमें ई-मेल के साथ संलग्न मोबाइल नंबर की खोज तथा प्राप्त लिंक में भी ई-मेल वाला नंबर मिलने पर उस नंबर के आधार पर अपराधी को पकड़ा गया। जयपुर के साइबर विशेषज्ञ मुकेश चौधरी ने लिंक व आईपी के आधार पर और विभिन्न स्क्रीन शॉट से साक्ष्य संकलन की बारीकियों की जानकारी दी।

उन्होंने कंपनियों से सूचनाएं संकलित करने के लिए लेटर ऑफ  रिक्वेस्ट के बारे में भी बताया गया।

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