शनिवार को खरना के साथ शुरू हुए निर्जल व्रत के बाद रविवार शाम को व्रती महिलाओं ने गोमती नदी के घाटों पर पहुंचकर छठ पूजन किया। इस दौरान किसी ने मन्नत मांगी तो किसी ने मन्नत पूरी होने पर माता का धन्यवाद देकर जल में उतर कर अर्घ्य दिया।
लखनऊ के 26 घाटों पर छठ पूजा की जा रही है। इसके लिए प्रदेश प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। शहर की मेयर संयुक्ता भाटिया, कैबिनेट मंत्री एके सिंह, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई बड़े अधिकारियों ने बीते कई दिनों में घाटों का दौरा किया और व्यवस्थाओं को परखा। रविवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा भी घाट पर पहुंचे और पूजन किया।
मुख्यमंत्री खुद भी गोमती के तट पर पहुंचे और सभी को छठ पूजा की बधाई दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि छठ का पर्व अंत: और बाह्य शुद्घि का प्रतीक है। छठ पर्व पर एकजुट होकर प्रकृति पूजा की जाती है। आज के दिन जहां कहीं भी भोजपुरी समाज है वहां ये आयोजन किया जा रहा है। यह पर्व पहले खुद की शुद्घि और फिर वातावरण की शुद्घि का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ये पर्व बताता है कि आस्था व्यक्तिगत विषय नहीं है बल्कि सबको साथ लेकर चलने का नाम है। उन्होंने कहा कि अगर भगवान सूर्य न होते थे प्रकृति में कुछ भी न होता। छठी माई सामाजिक समरसता की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति हैं।
शादी के आठ साल बाद बेटी हुई तो तेलीबाग की रहने वाली पूजा ने बिटिया के नाम की वेदी बनवाई (बायें)। घाट पर बड़ी संख्या में पहुंचकर महिलाओं ने पूजन किया।
मन्नत पूरी होने पर महिलाओं ने जल में उतरकर अर्घ्य दिया।
अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय के अनुसार, इस बार करीब 12 लाख व्रती महिलाएं शहर के 26 घाटों पर छठी मइया का पूजन करेंगी।
प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा गोमती घाट पर पहुंचे और पूजन किया। वह पूजा की तैयारियों को परखने के लिए भी घाटों पर आए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।