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Lucknow News: नम आंखों से अजादारों ने कर्बला के शहीदों को दिया पुरसा

Mon, 18 Aug 2025 02:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Mon, 18 Aug 2025 02:09 AM IST
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With moist eyes, the mourners paid tribute to the martyrs of Karbala
नम आंखों से अजादारों ने कर्बला के शहीदों को दिया पुरसा
लखनऊ। रोते हैं सब खास-ओ- आम चेहल्लुम हुआ तमाम, चले आओ ए जव्वारो चले आओ, मेरी आवाज पे लब्बैक पुकारे जाओ...। उठ गए सब ताजिये वीरान अजाखाने हुए, हो गया चेहल्लुम तेरा ए शाहे बेसर अलविदा...। हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों के चालीसवें पर शुक्रवार को चेहल्लुम का जुलूस निकला तो अजादारों ने नम आंखों से शहीदों को पुरसा दिया। दर्द भरे नौहों और या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के साथ अजादार नंगे पांव जुलूस में साथ हो लिए। जुलूस में मातमी अंजुमने अपने अलम के साथ मातम करती हुई शामिल थीं।
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कर्बला के शहीदों के चेहल्लुम के जुलूस में शामिल होने के लिए अंजुमनें व अजादार बड़ी तादात में सुबह से ही विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर में इमामबाड़े में इमाम ए जुमा मौलाना कल्बे जवाद नकवी के बेटे मौलाना कल्बे अहमद ने मजलिस को खिताब किया। मजलिस के बाद इमामबाड़े से मातमी अंजुमन के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। जुलूस में सबसे आगे हजरत अब्बास का परचम था। इसके साए में अंजुमन मजलूमिया, गुंचा ए मजलूमिया, अब्बासिया, काजमिया आब्दिया, शहीदाने कर्बला, रौनक ए दीने इस्लाम सहित शहर की तमाम अंजुमनें नौहाख्वानी करती हुई जुलूस में बढ़ चलीं।
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अंजुमनों के मातमदार जंजीर, कमा व सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को अपने खून से पुरसा दे रहे थे। इसके पीछे कर्बला के शहीदों के शबीह ए ताबूत और ऊंटों पर अमारियां शामिल थीं। इसके अलावा जुलूस में हजरत अब्बास की निशानी अलम, हजरत इमाम हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर का गहवारा और हजरत इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह भी साथ-साथ था।
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जुलूस में इस बार भी करीब एक क्विंटल ड्राई फ्रूट से बना अलम शामिल था। अजादारों ने इन तबर्रुकात की जियारत कर दुआएं मांगी। जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से नक्खास चौराहा, टूरियागंज, हैदरगंज, बुलाकी अडडा, एवरेडी चौराहा होते हुए देर शाम तालकटोरा कर्बला पहुंच कर संपन्न हुआ।

कर्बला के शहीदों का गम में निकली अरबाइन वाक

कर्बला के शहीदों के चालीसवें पर शुक्रवार को इराक की तर्ज पर राजधानी में भी अजादारों ने अरबाइन वाक में शामिल होकर शहीदों का गम मनाया। राजधानी के बीकेटी स्थित कर्बला ए अब्बासिया व हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ से अरबाइन वाक निकाली गई। कर्बला तालकटोरा के लिए निकले अरबाइन वाक में सैकड़ों की संख्या में काले लिबास में अजादार शामिल हुए। दरअसल ईराक के कर्बला में हर साल चेहल्लुम के दिन अरबाइन वाक का आयोजन होता है। इसमें दुनियां भर से लाखों अकीदतमंद शामिल होते हैं। अकीदतमंद नजफ से कर्बला तक करीब 80 किमी का रास्ता पैदल तय कर कर्बला पहुंचते हैं।

जुलूस के रास्ते में लगीं सबीलें

कर्बला के प्यासों की याद में जुलूस के रास्ते में अंजुमनों ने अजादारों के लिए सबीलें लगाईं। विक्टोरिया स्ट्रीट से कर्बला तालकटोरा तक लगी सबीलों पर फल, चाय और पानी के साथ अन्य खाने पीने की चीजें वितरित की जाती रहीं। अरबाइन वाक के रास्ते शहीद स्मारक के पास भी सबील लगाई गई।

कर्बला के शहीदों की दिलाई नज्र

चेहल्लुम के मौके पर अजादारों ने अपने घरों में हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों की नज्र दिलाकर उन्हें पुरसा दिया गया। शहर के तमाम अजाखानों में शहीदों के चेहल्लुम की मजलिस व नज्र दिलाकर खिराजे अकीदत पेश की गई।


सुन्नी समुदाय ने दिया कर्बला के शहीदों को पुरसा

सुन्नी समुदाय ने भी कर्बला के शहीदों के चालीसवें पर शहीदों को पुरसा दिया। गम ए हुसैन में डूबे सुन्नी समुदाय के अजादरों ने शहर के तमाम इलाकों की कर्बला में ताजियों को दफन किया और घरों में नज्र का आयोजन कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
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