{"_id":"58fd8ea64f1c1b9e65c0bdb9","slug":"will-yogi-government-stand-for-sugarcane-farmers","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गन्ना किसानों या शुगर लॉबी में किसका साथ देगी योगी सरकार, अब असल परीक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ना किसानों या शुगर लॉबी में किसका साथ देगी योगी सरकार, अब असल परीक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, राजेंद्र सिंह
Updated Mon, 24 Apr 2017 11:20 AM IST
विज्ञापन
सीएम योगी आदित्यनाथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
योगी सरकार की असल परीक्षा अब होनी है। वह गन्ना किसानों का ब्याज दिलवाएगी या फिर पिछली सरकार की तरह शुगर लॉबी के साथ खड़ी नजर आएगी। बीती अखिलेश सरकार ने तो चीनी मिलों पर मेहरबानी दिखाते हुए 2016 करोड़ रुपये का ब्याज माफ कर दिया था।
विज्ञापन
हालांकि हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से इस पर पुनर्विचार करने को कहा था। डेढ़ महीने बाद भी योगी सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।
विज्ञापन
शुगर केन परचेज एक्ट के अनुसार आपूर्ति के 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान न करने पर चीनी मिलों पर ब्याज देय होता है। विलंब से भुगतान पर यह ब्याज किसानों को मिलना चाहिए।
विज्ञापन
आश्चर्यजनक तथ्य है कि 20 फीसदी से 200 फीसदी तक मुनाफा कमाने वाली चीनी मिलों पर 2000 करोड़ से ज्यादा की मेहरबानी करने वाली पिछली सरकार के फैसलों को किसानों के खिलाफ बताने वाली योगी सरकार डेढ़ महीने बाद भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे है।
पंजीरी मामले की तरह इस मामले में भी चुप्पी उस सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है, जो पारदर्शिता का दावा कर रही है। आश्चर्य तो यह भी कि शुगर लॉबी के हितों की रक्षा करने वाले वे अफसर जिन्होंने ब्याज माफी में अहम भूमिका निभाई थी, वे योगी सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं।
हालाकि यह सरकार समय से पहले ही किसानों के बकाये के भुगतान का दावा तो कर रही है, लेकिन चीनी मिलों पर 2000 करोड़ की मेहरबानी के मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं।
सपा सरकार ने चीनी मिलों पर दिखाई थी मेहरबानी
सीएम योगी आदित्यनाथ
सपा सरकार ने तीन पेराई सत्र में चीनी मिलों का 2016 करोड़ का ब्याज माफ किया था।
मई 2015 में अखिलेश सरकार ने कैबिनेट की मीटिंग में पेराई सत्र 2012-13 व 2013-14 का 1306 करोड़ रुपये ब्याज माफ किया। फिर अक्तूबर 2016 में हुई कैबिनेट की बैठक में पेराई सत्र 2014-15 का 710 करोड़ रुपये ब्याज माफ कर दिया।
किसान नेता वीएम सिंह की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर 9 मार्च को रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने ब्याज माफी के फैसले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रदेश सरकार से चार माह में इस पर पुनर्विचार के लिए कहा है।
मई 2015 में अखिलेश सरकार ने कैबिनेट की मीटिंग में पेराई सत्र 2012-13 व 2013-14 का 1306 करोड़ रुपये ब्याज माफ किया। फिर अक्तूबर 2016 में हुई कैबिनेट की बैठक में पेराई सत्र 2014-15 का 710 करोड़ रुपये ब्याज माफ कर दिया।
किसान नेता वीएम सिंह की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर 9 मार्च को रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने ब्याज माफी के फैसले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रदेश सरकार से चार माह में इस पर पुनर्विचार के लिए कहा है।