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पत्नी ने कहा, 'विधायक तो नपुंसक है रेप नहीं कर सकता'

Sat, 06 Jun 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 06 Jun 2015 12:26 AM IST
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 Whole story related to sheelu rape case.

मप्र के पन्ना जिले के हरनामपुर में रहने वाले दलित अच्छेलाल की 17 वर्ष की बेटी के साथ जो हुआ, वह सियासतदारों और पुलिस के घिनौने गठजोड़ की कहानी है। पहले तो उसे पुलिस व ग्राम प्रधान की मिली भगत से अपहरण कर बेचा दिया गया। पिता किसी तरह उसे वापस बरामद कर लाए तो रक्षा करने का आश्वासन देने वाला विधायक ही भक्षक बन गया।

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अच्छेलाल अपनी नाबालिग बेटी को बांदा के नरैनी से बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के यहां ले गया था। वहां उसे घर का काम-काज करने के लिए छोड़ दिया था। कुछ दिनों तक तो किशोरी काम करती रही, पर दिसंबर 2010 को उसने एक रात अपने पिता को रोते हुए फोन किया कि वे उसे विधायक के यहां से वापस ले जाए।
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अचानक 15 दिसंबर को किशोरी के खिलाफ बांदा पुलिस ने विधायक का मोबाइल फोन व नकद रुपये चोरी करने का केस दर्ज कर जेल भेज दिया। अच्छेलाल को चुप रहने की धमकी दी गई। डरा-सहमा अच्छेलाल पहले तो भूमिगत हो गया पर बाद में उसने बांदा के गुलाबी गैंग से संपर्क किया। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
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बचाने के लिए विधायक को नपुंसक तक बताया

जब मामला तूल पकड़ने लगा तब पुलिस ने पहले तो उसे वयस्क बताया और शारीरिक संबंधों का अभ्यस्त बताने की कोशिश की। फिर यह दावा किया गया कि विधायक का इसमें कोई लेना-देना नहीं है। यहां तक कि विधायक का परिवार उन्हें बचाने के लिए नपुंसक तक बताने से नहीं चूका।

मामले के तूल पकड़ते ही किया निलंबित

 Whole story related to sheelu rape case.

बातें ऊपर तक पहुंचने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने तीन जनवरी 2011 को विधायक पुरुषोत्तम को पार्टी से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही जिले के अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी और जेलर को निलंबित कर दिया गया।

मामले की जांच सीबीसीआईडी को दे दी गई थी, जिसने दुराचार होने की पुष्टि की थी। साथ ही पड़ित युवती पर लगाए गए चोरी के आरोप को भी निराधार पाया। सर्वोच्च न्यायालय के दखल के बाद मामले को सीबीआई को सौंपा गया।

एसपी जेल में जाकर शीलू को देते थे धमकी
शीलू जब जेल में थी तो उसे लगातार धमकियां मिलती रहीं। धमकी देने में सिर्फ जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तेजी नहीं दिखाई बल्कि जिले के कप्तान अनिल कुमार दास तक जेल में बगैर लिखापढ़ी के जाते थे और पीड़िता को मुंह न बंद रखने पर उसके परिवार के सदस्यों की जान को खतरा बताने तक से नहीं चूके।

हनक इतनी कि विधायक के अनुसार काम करती रही पुलिस

 Whole story related to sheelu rape case.

विधायक पुरुषोत्तम नरेश का अफसरों व राजनेताओं में कितना रसूख था, इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि विधायक के कहने पर पुलिस व प्रशासन के अधिकारी हर नाजायज बात को जायज कहते थे।

विधायक के आवास पर एक किशोरी के साथ सामूहिक दुराचार किया गया और जिले के सभी अधिकारी इसे नकारने में जुट गए। हद तो तब हुई जब पुलिस के पास पहुंची सामूहिक दुराचार की पीड़िता का मेडिकल तक नहीं कराया गया, लेकिन विधायक के कहने पर उसके ही खिलाफ चोरी की न सिर्फ रिपोर्ट दर्ज कर ली बल्कि उसे गिरफ्तार कर आनन-फानन में जेल में ठूंस दिया गया।

यह विधायक की हनक ही थी कि पीड़ित किशोरी का जेल में भी कोई चिकित्सीय परीक्षण नहीं किया गया और न ही उसे कोई चिकित्सीय सहायता दी गई।

सीबीसीआईडी पर भी बनाया दबाव
जिले के पुलिस अफसरों ने जांच करने जिले में पहुंची सीबीसीआईडी की टीम पर भी दबाव बनाने की कोशिश की और जिला पुलिस की थ्योरी को सही ठहराने की कोशिश की। हालांकि अफसरों की दाल न गल सकी। मामला तब तक खासा तूल पकड़ चुका था और सीबीसीआईडी भी पुलिस के साथ आरोपों के कठघरे में खड़ा नहीं होना चाहती थी।

मात्र छह माह के बाद ही हुई जमानत

 Whole story related to sheelu rape case.

जिस एसपी को हटाया उसे सीबीसीआईडी में तैनात कर दिया
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भी विपक्षी दलों व मीडिया में आ रही खबरों के दबाव में विधायक को निलंबित जरूर कर दिया था पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

सरकार इसी तरह जिले के तत्कालीन कप्तान अनिल कुमार दास पर भी मेहरबान रही। सरकार ने मजबूरी में दास को कई महीने बाद जिले से हटाया तो लेकिन उन्हें सीबीसीआईडी में ही तैनात कर दिया गया, जहां से इस मामले की जांच चल रही थी।

सरकार की विधायक पर मेहरबानियां बरकरार रही, पर बाद में आरोपों की पुष्टि होने पर विधायक को मजबूरी में जेल जाना पड़ा।

यहां भी उनका रसूख काम आया और इलाज के नाम पर उन्हें छह माह के लिए जमानत दे दी गई थी, पर बाद में अदालत का रुख देखने पर उन्हें फिर जेल जाना पड़ा।

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