LMRC: शिलान्यास हो गया पर कंपनी कोई तय ही नहीं
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मेट्रो रेल परियोजना का शिलान्यास हुए आठ दिन बीत गए हैं। मेट्रो से जुड़े
प्रमुख सलाहकार के तौर पर ई. श्रीधरन एक दौरा भी करके चले गए मगर कौन सी कंपनी टर्न-की के आधार पर काम करेगी, यह अब तक तय नहीं हो सका है।
यहां तक कि मदर डिपो के काम में भी कोई प्रगति नहीं आई है। टर्न-की (एक ही कंपनी के जरिए सारा काम और टेंडर प्रक्रिया) के आधार पर मेट्रो रेल परियोजना का काम कराने के फैसले की वजह से यह काम लटकता जा रहा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 3 मार्च
को मेट्रो परियोजना और मदर डिपो का शिलान्यास किया था। उस वक्त तक कंपनी का
चयन नहीं किया गया था।
उस समय एलएमआरसी के अधिकारियों ने कहा था कि, चुनाव
आयोग की इजाजत लेकर बहुत जल्दी ही कंपनी का चयन कर लिया जाएगा। काम भी
शुरू करा देंगे।
मगर आठ दिन बीतने के बावजूद अभी तक चुनाव आयोग से इजाजत
लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार टर्न-की के आधार
पर मेट्रो परियोजना का काम कराने की जिद के चलते ही यह देरी हो गई।
वास्तव
में अभी तक शिलान्यास कराने जैसे हालात नहीं बने थे लेकिन जनता के सामने इस
परियोजना को प्रस्तुत करने के लिए सरकार ने आनन-फानन में इसका शिलान्यास
करवा दिया था।
मेट्रो की हाईपावर कमेटी ने
जनवरी में एक सब कमेटी बनाई थी। उसको एक सप्ताह के भीतर टर्न-की के आधार पर
कंपनी चुनने के लिए ऑफर डॉक्यूमेंट बनाना था।
लेकिन उसने भी कोई काम नहीं
किया। शर्त यह थी कि सार्वजनिक क्षेत्र की किसी एक कंपनी से टर्न-की के
आधार पर निर्माण करवाया जाएगा।
ये दो कंपनियां डीएमआरसी और रेल विकास निगम
लिमिटेड (आरवीएनएल) थी। लंबे समय तक जद्दोजहद जारी रही। लेकिन कुछ समय बाद
आरवीएनएल ने इस परियोजना से अपने हाथ खींच लिए।
एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल ने बताया कि टर्न-की
की वजह से विलंब हुआ है। अगर ऐसा न होता तो चार महीने पहले ही काम शुरू हो
जाता। हम खुद टेंडर कर सकते थे।
इसके लिए डीएमआरसी को बतौर अंतरिम
कंसल्टेंट अधिकृत भी कर दिया गया था। पहला टेंडर वायाडक्ट डिजाइन का शुरू
भी किया गया था। मगर वह काम नहीं हो सका। हम कोशिश कर रहे हैं कि, जल्द ही
काम का आगाज करवाया जाए।