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Lucknow News: वतन वापसी के लिए जहाज में बैठा तो आई जान में जान
Tue, 02 May 2023 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 02 May 2023 11:36 PM IST
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रायबरेली। सूडान में चल रहे खूनी संघर्ष से जान बचाकर सुरक्षित वतन लौटे इंद्रजीत इंद्र कुमार अभी भी दहशत में गुजारी रातों को याद कर सिहर उठते हैं। बताया कि वतन वापसी के लिए ऑपरेशन कावेरी के तहत जहाज में बैठने के बाद एहसास हुआ कि अब वह सभी सुरक्षित हैं और जल्द ही अपने देश व घर पहुंच सकेंगे। इसके बाद ही सभी की जान में जान आई। बताया कि जान बचाने के लिए एक सप्ताह तक वह 15 अन्य कर्मचारियों के साथ गोलाबारी के बीच फैक्ट्री परिसर में बनी खंडहरनुमा टपरी में छिप कर रहे। इस दौरान गोलाबारी बंद होने पर ही खाने पीने की सामग्री जुटाने की दौड़भाग करना पड़ती थी।
इंद्रजीत सूडान के खारतून में भारतीय मूल के एक कारोबारी की स्टील फैक्ट्री में फिटर के पद पर तैनात था। इससे पहले वह दो साल तक सूडान रहकर वापस घर लौटा था। पिछले साल अगस्त माह में वह दोबारा फैक्ट्री में कार्य करने के लिए सूडान गया था। बताया कि वर्तमान में वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। इसे लेकर परिजनों को भी चिंता हो रही थी। बताया कि एक दिन अचानक उसकी फैक्ट्री के आसपास गोलाबारी शुरू हो गई। जब साथियों के साथ बाहर आकर देखा तो मंजर बड़ा ही भयानक था। लोग चीखपुकार करते हुए अपनी जान बचाकर इधर उधर भाग रहे थे। ऐसे में लगा कि शायद अब जान न बच पाए। जब गोलाबारी बंद हुई इंडियन दूतावास से भेजे गए वाहन से वह अपने साथियों के साथ एक हजार किलोमीटर बस से यात्रा कर साउथ सूडान पहुंचा। यहां से इंडियन नेवी के जहाज से वह लोग समुद्री रास्ते से पहले दुबई पहुंचे। वहां से सभी को हवाई जहाज से नई दिल्ली भेजा गया।
इंद्रजीत ने बताया कि दिल्ली पहुंचने पर प्रदेश सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई बस से वह अपने 15 साथियों के साथ पहुंचा। यात्रा में शामिल कई लोग वाराणसी, प्रयागराज और गाजीपुर के भी थे। ऑपरेशन कावेरी के तहत जब उन्हें खारतून से रेक्यू किया गया तो उनके जत्थे में 162 भारतीय शामिल थे। इंद्रजीत यह बताते हुए भावुक हो गया कहा कि अब वह दोबारा कभी भी बाहरी देशों में काम करने नहीं जाएगा। उसने सुरक्षित घर वापसी के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार भी जताया।
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इंद्रजीत सूडान के खारतून में भारतीय मूल के एक कारोबारी की स्टील फैक्ट्री में फिटर के पद पर तैनात था। इससे पहले वह दो साल तक सूडान रहकर वापस घर लौटा था। पिछले साल अगस्त माह में वह दोबारा फैक्ट्री में कार्य करने के लिए सूडान गया था। बताया कि वर्तमान में वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। इसे लेकर परिजनों को भी चिंता हो रही थी। बताया कि एक दिन अचानक उसकी फैक्ट्री के आसपास गोलाबारी शुरू हो गई। जब साथियों के साथ बाहर आकर देखा तो मंजर बड़ा ही भयानक था। लोग चीखपुकार करते हुए अपनी जान बचाकर इधर उधर भाग रहे थे। ऐसे में लगा कि शायद अब जान न बच पाए। जब गोलाबारी बंद हुई इंडियन दूतावास से भेजे गए वाहन से वह अपने साथियों के साथ एक हजार किलोमीटर बस से यात्रा कर साउथ सूडान पहुंचा। यहां से इंडियन नेवी के जहाज से वह लोग समुद्री रास्ते से पहले दुबई पहुंचे। वहां से सभी को हवाई जहाज से नई दिल्ली भेजा गया।
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इंद्रजीत ने बताया कि दिल्ली पहुंचने पर प्रदेश सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई बस से वह अपने 15 साथियों के साथ पहुंचा। यात्रा में शामिल कई लोग वाराणसी, प्रयागराज और गाजीपुर के भी थे। ऑपरेशन कावेरी के तहत जब उन्हें खारतून से रेक्यू किया गया तो उनके जत्थे में 162 भारतीय शामिल थे। इंद्रजीत यह बताते हुए भावुक हो गया कहा कि अब वह दोबारा कभी भी बाहरी देशों में काम करने नहीं जाएगा। उसने सुरक्षित घर वापसी के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार भी जताया।
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