इंदिरा गांधी के आगे झुकने के बजाय बहुगुणा ने दिया था इस्तीफा, ये था पूरा वाक्या
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आपातकाल लगाने के मुद्दे पर इंदिरा गांधी और हेमवतीनंदन बहुगुणा में खटपट हो गई थी। बहुगुणा ने आपातकाल लगाने का विरोध किया था। वह इससे भी नाराज थे कि इंदिरा गांधी ने उनके कई करीबियों और मित्रों को गिरफ्तार कराकर जेल में डाल दिया था। उस समय इंदिरा गांधी और नाराज हो गईं जब उन्हें पता चला कि बहुगुणा जेल में बंद कई नेताओं के परिवारों की आर्थिक मदद कर रहे हैं।
उधर, इंदिरा गांधी और बहुगुणा के बीच खटपट की जानकारी जब उत्तर प्रदेश के बहुगुणा विरोधी खेमे को हुई तो कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनके विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया। बताया जाता है कि इन नेताओं को इंदिरा गांधी ने भी इसके लिए इशारा किया था।
रामनरेश त्रिपाठी ने एक संस्मरण में लिखा है, ‘इंदिरा गांधी ने 27 नवंबर 1975 को उन्हें दिल्ली बुलाया और कहा, ‘बहुगुणा जी लोग आपसे नाखुश हैं। पूरी पार्टी आपके साथ नहीं है।’ बहुगुणा सुनते रहे और फिर बोले, ‘आप अच्छे लोगों को कांग्रेस से हटा रही हैं। यह पार्टी के हित में नहीं है।’ इंदिरा गांधी कुछ नहीं बोलीं। बहुगुणा को 28 नवंबर को मुख्य सेंसर ने बताया, ‘आप पर सेंसर लगा दिया गया है। आपका कोई बयान बिना सेंसर समाचार पत्रों में नहीं छपेगा।’ बहुगुणा खिन्न हो गए
वापस अपने दो कमरे के फ्लैट में लौट गए बहुगुणा
उन्होंने समझ लिया कि इंदिरा गांधी से अब उनकी निभ नहीं पाएगी। वह दिल्ली से लौटकर लखनऊ आए और सीधे राजभवन पहुंचे। राजभवन जाने से पहले उन्होंने घर फोन कर अपने पुत्र विजय बहुगुणा को गाड़ी लेकर राजभवन बुला लिया।
बहुगुणा ने राज्यपाल डॉ. चन्ना रेड्डी को अपना त्यागपत्र सौंपा और राजभवन से बाहर आए। अपनी निजी गाड़ी में बैठकर मीराबाई मार्ग स्थित अपने दो कमरे के सरकारी आवास पर चले गए। मानों कुछ हुआ ही न हो।’