टीपू को अगली जीत दिलाएंगे ये तीन फंडे!
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लोकसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन से सपा खेमे में मायूसी का आलम है। ये नतीजे अखिलेश यादव के लिए सबक हैं और चैलेंज भी। सपा अपनी नीतियों और विकास के कामों को लेकर मैदान में थी।
इनका प्रचार भी खूब किया लेकिन, जनता ने इन पर मुहर नहीं लगाई। जाहिर है, सरकार को आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए कुछ अलग हटकर सोचना होगा।
सरकार के कामकाज और सोच में बदलाव लाना होगा। उस युवा वर्ग की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा जिसने विधानसभा चुनाव में उन्हें पूर्ण जनादेश दिया।
यह समझना होगा कि जनता धरातल पर काम देखती है। दो साल में सरकार गवर्नेंस को लेकर जनता में कोई संदेश नहीं दे पाई। सभी व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर हैं, कुछ में और ज्यादा गड़बड़ी आई है।
बढ़ाना होगा कार्यकर्ताओं का मनोबल
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अगली जंग में जीत के लिए तीन रणनीति पर काम करना होगा। इसमें सबसे पहले कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की बात है और यह किसी चुनौती से कम नहीं।
उम्मीद से ज्यादा करारी हार से पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं नेता भी मायूस हैं। लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधानसभा उपचुनावों में भी सपा को कामयाबी नहीं मिल सकी।
सरकार के साथ ही संगठन के स्तर पर ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़े और वे अगली जंग के लिए तैयार हो सकें।
जाति-संप्रदाय से ऊपर उठना होगा
सरकार को जाति-संप्रदाय से ऊपर उठकर सोचना होगा। इसमें कोई शक नहीं कि चुनाव जीतने के लिए जाति जरूरी है।
ऐसा नहीं कि भाजपा ने चुनाव में जाति और धर्म का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन, सिर्फ जाति से काम चलने वाला नहीं है।
इसके अलावा मोदी लहर बनने की एक प्रमुख वजह यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार व महंगाई के खिलाफ लोगों में गुस्सा पनपना रहा। प्रदेश सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे भ्रष्टाचार पर चोट का संदेश जाता।
सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की आम शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं की गईं। सरकार का चेहरा बदलने के लिए भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाना होगा।
वादे पूरे करने वाली छवि
दो सालों में सपा सरकार ने वादे खूब किए, कुछ को लागू किया, कुछ पर अमल बाकी है।
छात्रों को लैपटॉप तो मिले, लेकिन टैबलेट की उम्मीदें टूट गईं। सवाल यह भी है कि मुफ्त लैपटॉप या टैबलेट वोट कितना दिलवाते हैं।
अगली जंग में जीत के लिए गन्ना मूल्य पर 40 जिलों के किसानों की भावनाओं को समझना होगा। वादों के अनुरूप उन्हें गन्ना मूल्य दिलाना होगा।
संसद ने भले ही भूमि अधिग्रहण कानून बना दिया हो, लेकिन प्रदेश में इसे लागू नहीं किया गया है। यह कानून सीधे किसानों से जुड़ा हुआ है।
मुस्लिम मन को समझने की जरूरत
विपक्षी दलों द्वारा नरेंद्र मोदी का खौफ दिखाने के बावजूद मुस्लिमों ने किसी दल के प्रति एकतरफा झुकाव नहीं दिखाया।
कहीं मुस्लिम वोटों में बंटवारा रहा तो कहीं सपा, बसपा या कांग्रेस के पक्ष में।
भले ही आजमगढ़ में सपा सुप्रीमो की जीत हुई हो, लेकिन मुसलमानों का हितैषी कही जाने वाली सपा सरकार को मुस्लिम मन की स्थिति को समझना होगा। मुस्लिम युवा क्या सोच रहे हैं, यह भी देखना होगा।