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सचिवालय कॉलोनी के अफसर-कर्मचारी पी रहे दूषित पानी
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बादशाह नगर की सचिवालय कॉलोनी में पानी पीने लायक नहीं। (फोटो प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
बादशाह नगर स्थित सचिवालय कॉलोनी का पानी पीने लायक नहीं है। यहां अफसर से लेकर कर्मचारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
पानी में क्लोरीन की मात्रा मानक के अनुरूप न मिलने पर नमूना फेल हो गया। बुधवार को जलकल व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पानी के नमूने लेकर जांच की तो यह सच सामने आया। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
पानी की जांच के लिए संयुक्त टीमें बुधवार सुबह बादशाह नगर सचिवालय कॉलोनी पहुंची। जांच के दौरान पानी का नमूना फेल हो गया।
वहीं, कुछ दूरी पर बादशाह नगर चौराहे के पास सांई मंदिर के पास से पानी का दूसरा नमूना लेकर जांचा तो वह भी फेल हो गया।
इसके बाद टीम ने यहां पानी में क्लोरीन की मात्रा बढ़ाए जाने को कहा है। टीम ने पानी के दस नमूने लिए थे। इसमें दो नमूने फेल हो गए।
डॉक्टरों का कहना है कि पानी में क्लोरीन की मिलावट जरूरी होती है। इससे पानी को विसंक्रमित किया जाता है। पानी को पीने लायक बनाने में मदद मिलती है।
दूषित पानी से पेट से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। पाचन क्षमता गड़बड़ा सकती है। डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में पानी में क्लोरीन की मिलावट बहुत जरूरी है।
निशातगंज में फेल हुए थे नमूने
जलकल व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब चार दिन पहले निशातगंज व इंदिरा ब्रिज के पास करामत मार्केट पास से पानी का नमूना लेकर जांचा था। दोनों नमूने फेल हो गए थे। उसी दिन टीम बादशाहनगर रेलवे स्टेशन निकट पुरानी चुंगी पहुंची। यहां भी टीम ने टोटी से पानी का नमूना लिया। जांच में यहां भी नमूना फेल हो चुका था। इसके बाद भी पानी में क्लोरिन की मात्रा को ठीक नहीं किया गया। दोबारा जांच होने पर पानी का नमूना फेल ही निकला।
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पानी में क्लोरीन की मात्रा मानक के अनुरूप न मिलने पर नमूना फेल हो गया। बुधवार को जलकल व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पानी के नमूने लेकर जांच की तो यह सच सामने आया। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
पानी की जांच के लिए संयुक्त टीमें बुधवार सुबह बादशाह नगर सचिवालय कॉलोनी पहुंची। जांच के दौरान पानी का नमूना फेल हो गया।
वहीं, कुछ दूरी पर बादशाह नगर चौराहे के पास सांई मंदिर के पास से पानी का दूसरा नमूना लेकर जांचा तो वह भी फेल हो गया।
इसके बाद टीम ने यहां पानी में क्लोरीन की मात्रा बढ़ाए जाने को कहा है। टीम ने पानी के दस नमूने लिए थे। इसमें दो नमूने फेल हो गए।
डॉक्टरों का कहना है कि पानी में क्लोरीन की मिलावट जरूरी होती है। इससे पानी को विसंक्रमित किया जाता है। पानी को पीने लायक बनाने में मदद मिलती है।
दूषित पानी से पेट से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। पाचन क्षमता गड़बड़ा सकती है। डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में पानी में क्लोरीन की मिलावट बहुत जरूरी है।
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निशातगंज में फेल हुए थे नमूने
जलकल व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब चार दिन पहले निशातगंज व इंदिरा ब्रिज के पास करामत मार्केट पास से पानी का नमूना लेकर जांचा था। दोनों नमूने फेल हो गए थे। उसी दिन टीम बादशाहनगर रेलवे स्टेशन निकट पुरानी चुंगी पहुंची। यहां भी टीम ने टोटी से पानी का नमूना लिया। जांच में यहां भी नमूना फेल हो चुका था। इसके बाद भी पानी में क्लोरिन की मात्रा को ठीक नहीं किया गया। दोबारा जांच होने पर पानी का नमूना फेल ही निकला।
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