15.6 करोड़ टन कचरे को बदला जा सकता है ऊर्जा में : पीएस ओझा
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उत्तर प्रदेश में हर साल 15.6 करोड़ टन ऐसा कचरा मिलता है, जिसे ऊर्जा में बदला जा सकता है। यह कचरा 17.55 करोड़ टन कोयले के बराबर है। वहीं, मवेशियों के रोज 6.92 लाख टन गोबर से 3.46 करोड़ क्यूबिक मीटर बायोगैस रूपी ग्रीन एनर्जी पैदा की जा सकती है।
यह जानकारी जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के प्रदेश समन्वयक पीएस ओझा ने यहां सोमवार को एक कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। इस दौरान उन्होंने जैव ऊर्जा के आंकड़े भी प्रस्तुत किए। इस दौरान अतिरिक्त ऊर्जा संसाधन मंत्री बृजेश पाठक और औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना भी मौजूद रहे।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में इंडियन आयल, बीपीसी और एचपीसीएल की तरह से संयुक्त रूप से कहा गया कि वे मिलकर प्रदेश में सीबीजी प्लांट लगाएंगी। इसके जरिए प्रदेश की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सीतापुर में 1500 करोड़ से बनेगा प्लांट : पाठक
अतिरिक्त ऊर्जा संसाधन मंत्री बृजेश पाठक ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सीतापुर में 1500 करोड़ की लागत से जैव ऊर्जा प्लांट लगाने की अनुमति दी है। इसके जरिए न केवल सुरक्षित और वैकल्पिक ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि किसानों को भी खेती के सह-उत्पादन बेचने के लिए मदद मिलेगी। वहीं, प्रदेश में छह जिलों में भी जैव ईंधन प्लांट लगाए जाएंगे।
एप के जरिए जागरूकता
इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के पदाधिकारी गौरव केड़िया ने बताया कि देश में जिन क्षेत्रों में जैव ऊर्जा व ईंधन बनाने के लिए पूरा मॉडल उपलब्ध है, उनके विषय में एसोसिएशन के सहयोग से विकसित मोबाइल एप्लीकेशन में जानकारी दी गई है। इस प्रकार के प्रोजेक्ट की सफलता के लिए कचरे और बेकार की जैविक वस्तुओं सप्लाई पूरे समय होना जरूरी है।
मूंगफली के छिलके 120, सरसों के डंठल 150 रुपये क्विंटल
बायो ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे उद्यमी कर्नल सुरेश रेगे, महेश रेड्डी और संदीप दवे ने बताया कि आज भी नए प्रोजेक्ट को स्थापित होने के बाद सप्लाई एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके बिना पूरे उद्योग पर संकट पैदा हो सकता है। जैव ऊर्जा से किसानों के फायदे पर कहा कि मूंगफली के छिलके 120 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों के डंठल 150 रुपये क्विंटल में मिल रहे हैं। इन्हें फसल काटने के दौरान ही इन उद्योगों की जरूरत के अनुसार ढाल दिया जाता है।