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UP: रायबरेली के रण में वॉकओवर की नीति, लोकसभा का मोह छोड़कर सपा ने यहां के विधानसभा क्षेत्रों में जमाई पैठ
Wed, 03 Apr 2024 11:27 AM IST
शाहरुख खान
आशीष दीक्षित, अमर उजाला, रायबरेली
आशीष दीक्षित, अमर उजाला, रायबरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 03 Apr 2024 11:27 AM IST
सार
राजनीति की चौसर में कौन सी चाल भविष्य का रास्ता तय करेगी यह सियासी क्षत्रपों की कुशल रणनीति का हिस्सा रहा है। रायबरेली का सियासी मैदान भी सियासतदानों की प्रयोगशाला है। इंदिरा गांधी ने यहीं से बीएमडी फार्मूला की नींव रखी तो सपा ने 2007 में कांग्रेस को अचरज करने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद इस सीट पर लोकसभा के चुनाव में रणनीति बदल दी।
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lok sabha election 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजनीति के धुरंधर जनता की नब्ज टटोलते हैं। समीकरण समझने में वक्त देते हैं। जमते हैं...। जमते हैं...। निर्णय लेते हैं... और फिर जीत का आनंद लेते हैं। रायबरेली में सपा व कांग्रेस की जुगलबंदी कुछ यही कहानी कहती है। सपा ने लोकसभा का मोह त्यागकर यहां की विधानसभाओं में पैठ जमाई और निरंतर शानदार प्रदर्शन कर रही है। कुल मिलाकर कहें तो कांग्रेस को वॉकओवर देना सपा की मजबूरी नहीं बल्कि मास्टर स्ट्रोक रहा। पढ़ें विशेष रिपोर्ट...
इंदिरा गांधी ने रायबरेली को बनाया राजनीति की प्रयोगशाला
इंदिरा गांधी के समय से ही रायबरेली सीट राजनीति की अद्भुत प्रयोगशाला रही है। इंदिरा ने यहीं से ब्राह्मण, मुस्लिम व दलित (बीएमडी) फार्मूला की नींव रखी। यह प्रयोग सफल रहा और फिर देखते ही देखते पूरे देश में कांग्रेस को नई दिशा मिली। इसके बाद सपा ने यहां पिछड़ों को सहेजना शुरू किया तो बसपा भी अपने काडर वोटों को एकजुट करने में लगी रही।
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इंदिरा गांधी ने रायबरेली को बनाया राजनीति की प्रयोगशाला
इंदिरा गांधी के समय से ही रायबरेली सीट राजनीति की अद्भुत प्रयोगशाला रही है। इंदिरा ने यहीं से ब्राह्मण, मुस्लिम व दलित (बीएमडी) फार्मूला की नींव रखी। यह प्रयोग सफल रहा और फिर देखते ही देखते पूरे देश में कांग्रेस को नई दिशा मिली। इसके बाद सपा ने यहां पिछड़ों को सहेजना शुरू किया तो बसपा भी अपने काडर वोटों को एकजुट करने में लगी रही।
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- वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जब पहली बार सोनिया गांधी मैदान में उतरी तो सपा भी मैदान में डट गई। यह वह दौर था जब सपा रायबरेली में अपनी जड़ों को मजबूत कर रही थी, लेकिन बसपा के कैडर वोट के कारण सपा को विधानसभा चुनावों में दिक्कत आ रही थी।
- यही कारण रहा कि 1993 से लेकर 2004 तक के विधानसभा चुनावों में सपा ने 1993 में डलमऊ, 1996 में सरेनी, 2002 में बछरावां, सलोन, सरेनी में जीत हासिल की, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सरेनी, सलोन, बछरावा, सतांव में जीत हासिल कर सपा के थिंक टैंक को दंग कर दिया।
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सपा को सताने लगी थी चिंता
2007 के चुनाव में सपा का वोट प्रतिशत भी तेजी से गिरा, जिससे कहीं न कहीं पार्टी रणनीतिकारों को रायबरेली में सियासी जमीन खिसकने का खतरा दिखने लगा। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पहली बार पुरानी प्रतिद्वंद्विता को किनारे कर भविष्य की रणनीति को पुख्ता करने के लिए कांग्रेस को वॉकओवर दे दिया। नतीजा यह रहा कि कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी लगातार जीतती रहीं, लेकिन यहां खास यह है कि यदि सपा ने वॉकओवर न दिया होता तो 2009 में बसपा और 2019 में भाजपा प्रत्याशी से सोनिया की राह मुश्किल हो जाती।
2007 के चुनाव में सपा का वोट प्रतिशत भी तेजी से गिरा, जिससे कहीं न कहीं पार्टी रणनीतिकारों को रायबरेली में सियासी जमीन खिसकने का खतरा दिखने लगा। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पहली बार पुरानी प्रतिद्वंद्विता को किनारे कर भविष्य की रणनीति को पुख्ता करने के लिए कांग्रेस को वॉकओवर दे दिया। नतीजा यह रहा कि कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी लगातार जीतती रहीं, लेकिन यहां खास यह है कि यदि सपा ने वॉकओवर न दिया होता तो 2009 में बसपा और 2019 में भाजपा प्रत्याशी से सोनिया की राह मुश्किल हो जाती।
तो कांग्रेस की भी थी मजबूरी
असल में 2004 के सापेक्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सपा के मैदान से हटने के बाद पार्टी के परंपरागत पिछड़ों का वोट कांग्रेस के लिए मददगार बना रहा। इस प्रयोग से रायबरेली से सोनिया अजेय बनी रहीं।
2004: सोनिया गांधी 58.75%, अशोक कुमार सिंह (सपा) 19.94%
2009: सोनिया गांधी- 72%,
2014 सोनिया गांधी - 63.80%
2019 सोनिया गांधी- 55.80%
असल में 2004 के सापेक्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सपा के मैदान से हटने के बाद पार्टी के परंपरागत पिछड़ों का वोट कांग्रेस के लिए मददगार बना रहा। इस प्रयोग से रायबरेली से सोनिया अजेय बनी रहीं।
2004: सोनिया गांधी 58.75%, अशोक कुमार सिंह (सपा) 19.94%
2009: सोनिया गांधी- 72%,
2014 सोनिया गांधी - 63.80%
2019 सोनिया गांधी- 55.80%
मुलायम की सधी सोच
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1993 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, अमेठी, प्रतापगढ़ को अपने मुख्य एजेंडे में रखा।
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1993 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, अमेठी, प्रतापगढ़ को अपने मुख्य एजेंडे में रखा।
- उनकी कोशिश थी कि इन जिलों में पिछड़ों का वोटबैंक करीब 20 से 24 फीसदी तक है और साथ ही मुस्लिमों का वोटबैंक भी 6 से 10 तक है। इस कारण यहां पर सियासी गणित का फार्मूला सटीक हो सकता है। इसके बाद से बराबर सपा रायबरेली में सियासी धमक को लेकर रणनीति तैयार करती रही।
सपा के रायबरेली लोकसभा सीट पर प्रत्याशी न उतारने से कांग्रेस को फायदा होता है। सपा का वोट ट्रांसफर होने से कांग्रेस को भाजपा प्रत्याशी को हराने में सहूलियत रहती है। सन 2017 में विधानसभा के लिए भी गठबंधन हुआ था, लेकिन दोनों के प्रत्याशी उतरने से किसी भी दल को कोई फायदा नहीं हो सका था। पंकज तिवारी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
राजनीति में नफा-नुकसान एक अलग विषय है। फिलहाल इस पर बात करना सही नहीं है। रायबरेली की राजनीतिक जमीन सपा के लिए मुफीद रही है। रही बात कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की तो यह गठबंधन होने पर यह हमारा धर्म है कि उसका पालन किया जा रहा है। वीरेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष, सपा