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बैंकुठ धाम में लंबी वेंटिंग, अत्येषि्ट के लिए देर रात इंतजार
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राजधानी में शनिवार को दो शमशान स्थलों पर अंतिम संस्कार के लिए 105 शव पहुंचे। इनमें काफी संख्या में संक्रमितों के शव भी बताए जा रहे हैं।
शवों की संख्या बढ़ने से दिन भर दूर-दूर से आए लोगों को दाह संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। खास तौर पर विद्युत शवदाह गृह में लंबी लाइन थी। यहां रोजाना रात में दो-दो बजे तक अंतिम संस्कार हो रहा था।
यही कारण है कि प्रशासन ने संक्रमित शवों को विद्युत शवदाह गृह के अलावा लकड़ी से भी जलाने का काम शुरू कर दिया है। इससे शनिवार को बढ़े अंतिम संस्कार करने में मदद मिली। हालांकि इसके बावजूद देर रात तक अंतिम संस्कार होते रहे।
लकड़ी से जलाने वालों को दिया जा रहा कान्हा उपवन का कंडा
संक्रमित शवों की अधिक संख्या को देखते हुए लकड़ी से भी अब अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके लिए कान्हा उपवन के कंडे भी नगर निगम उपलब्ध करा रहा है। शनिवार को एक हाइवा कंडा कान्हा उपवन से लाए गए। शनिवार को बैकुंठ धाम पर 20 शव लकड़ी से जलाए गए और 15 विद्युत शवदाह गृह से। इसी तरह गुलालाघाट पर 10 शव लकड़ी से और 16 शव विद्युत शवदाह गृह से।
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एक शव के अंतिम संस्कार में लगा एक से डेढ़ घंटे का वक्त
नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक राम नगीना त्रिपाठी ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह के अंतिम संस्कार पर एक से डेढ़ घंटे लगता है। इसमें 45 मिनट मशीन में लगते हैं और उतना ही वक्त सैनिटाइेजशन और तैयारी में। इस समय बैकुंठधाम पर दो और गुलाला घाट पर एक विद्युत शवदाह गृह है। इसके अलावा संक्रमित शवों को जलाने के लिए आठ-आठ अतिरिक्त लकड़ी वाले स्थल भी शुरू किए गए हैं। इससे शनिवार को रात दस बजे तक जो भी शव आए उन सभी का अंतिम संस्कार किया जा सका।
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शवों की संख्या बढ़ने से दिन भर दूर-दूर से आए लोगों को दाह संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। खास तौर पर विद्युत शवदाह गृह में लंबी लाइन थी। यहां रोजाना रात में दो-दो बजे तक अंतिम संस्कार हो रहा था।
यही कारण है कि प्रशासन ने संक्रमित शवों को विद्युत शवदाह गृह के अलावा लकड़ी से भी जलाने का काम शुरू कर दिया है। इससे शनिवार को बढ़े अंतिम संस्कार करने में मदद मिली। हालांकि इसके बावजूद देर रात तक अंतिम संस्कार होते रहे।
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लकड़ी से जलाने वालों को दिया जा रहा कान्हा उपवन का कंडा
संक्रमित शवों की अधिक संख्या को देखते हुए लकड़ी से भी अब अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके लिए कान्हा उपवन के कंडे भी नगर निगम उपलब्ध करा रहा है। शनिवार को एक हाइवा कंडा कान्हा उपवन से लाए गए। शनिवार को बैकुंठ धाम पर 20 शव लकड़ी से जलाए गए और 15 विद्युत शवदाह गृह से। इसी तरह गुलालाघाट पर 10 शव लकड़ी से और 16 शव विद्युत शवदाह गृह से।
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एक शव के अंतिम संस्कार में लगा एक से डेढ़ घंटे का वक्त
नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक राम नगीना त्रिपाठी ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह के अंतिम संस्कार पर एक से डेढ़ घंटे लगता है। इसमें 45 मिनट मशीन में लगते हैं और उतना ही वक्त सैनिटाइेजशन और तैयारी में। इस समय बैकुंठधाम पर दो और गुलाला घाट पर एक विद्युत शवदाह गृह है। इसके अलावा संक्रमित शवों को जलाने के लिए आठ-आठ अतिरिक्त लकड़ी वाले स्थल भी शुरू किए गए हैं। इससे शनिवार को रात दस बजे तक जो भी शव आए उन सभी का अंतिम संस्कार किया जा सका।