कल वोटिंग, आज जानिए वेस्ट यूपी की 12 सीटों का हाल
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पश्चिमी यूपी की दस लोकसभा सीटों पर 10 अप्रैल को वोटिंग होनी है। उर्वरा जमीन और खुशहाल इलाके के बदहाल गन्ना किसानों और जर्जर सड़कों वाले इस इलाके की राजनीति में मुजफ्फरनगर दंगा और मोदी इफेक्ट का असर साफ नजर आ रहा है।
यूपी में पहले चरण के मतदान वाले दोआबे के इस भूभाग की अधिकांश सीटें वोटों के ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला बनती दिख रही हैं।
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह, पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह, राज बब्बर, जयाप्रदा, नगमा के साथ ही प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर की किस्मत का फैसला इसी चरण में होना है।
माया नहीं, अबकी मोदी का जादू
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को भले ही पूर्ण बहुमत मिल गया हो लेकिन पश्चिमी यूपी में बसपा ने बढ़त कायम रखी थी।
तब इन दस लोकसभा सीटों में पड़ने वाले 50 विधानसभा क्षेत्रों में बसपा के 18, सपा के 12, भाजपा के दस और रालोद-कांग्रेस के पांच-पांच विधायक चुने गए।
दो साल में ही माहौल बदला-बदला सा है। सभी सीटों पर भाजपा मजबूती से चुनाव लड़ती दिख रही है तो कहीं सपा, बसपा तो कहीं कांग्रेस-रालोद उसे टक्कर दे रहे हैं।
इस इलाके में मुस्लिम वोट अच्छी तादाद में हैं। अपने चुनावी समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए गैर भाजपा दलों की नजरें मुस्लिम वोटों पर टिकी हुई हैं।
सहारनपुर: मोदी बनाम मसूद में बंटा वोट
दंगों के बाद बदली सियासत में भी बसपा ने वर्तमान सांसद जगदीश राणा को फिर से मैदान में उतारा है।
भाजपा ने विधायक राघव लखनपाल को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने पूर्व विधायक इमरान मसूद और सपा ने शाजान मसूद पर दांव लगाया है। दोनों चचेरे भाई हैं।
इमरान मसूद वही नेता हैं, जिन्होंने पिछले दिनों मोदी पर तल्ख टिप्पणी करने के मामले में जेल का चक्कर लगाया था। मसूद के मोदी बयान से वोटों का जबरदस्त ध्रुवीकरण हो सकता है।
फिलहाल मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच मानी जा रही है लेकिन बसपा और सपा की चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
मुजफ्फरनगर: दंगा आरोपी ही मैदान में
वेस्ट यूपी की किसी सीट पर दंगे का सर्वाधिक प्रभाव दिख रहा है तो वह मुजफ्फरनगर है। हो भी क्यों न, यहीं दंगों का सबसे विद्रूप असर देखने को मिला। सियासत भी जमकर हुई।
दंगों के बाद माहौल परखा गया और यहां भाजपा ने संजीव बालियान और बसपा ने मौजूदा सांसद कादिर राणा को मैदान में उतारा। दोनों ही दंगों के आरोपी हैं।
सपा ने पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह गुर्जर और कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पंकज अग्रवाल पर दांव लगाया है।
यहां वोटर मुखर हैं, मतदान पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हावी रहने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
कैराना: बड़ी चुनौती ध्रुवीकरण की
भाजपा विधानमंडल दल के नेता हुकुम सिंह इस सीट पर दोहरी चुनौतियों से घिरे हुए हैं।
मोदी लहर और दंगों के बाद उपजे माहौल में जीत की संभावना तलाश रहे हुकुम को सपा के नाहिद हसन, बसपा के कंवर हसन और रालोद के करतार सिंह भड़ाना से जूझना पड़ रहा है।
फैसला बहुत कुछ मुस्लिम मतों के रुझान पर निर्भर है। राजनीति के जानकार अंतिम समय में वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना जता रहे हैं।
बिजनौर: जयाप्रदा का ग्लैमर दांव पर
इस संसदीय सीट में दो विधानसभा सीटें मुजफ्फरनगर की, दो बिजनौर और एक मेरठ जिले की है।
तिहरे हत्याकांड के बाद मुजफ्फरनगर दंगे का सबब बना कवाल गांव और पंचायतों का केंद्र रहा नंगला मंदौड़ बिजनौर सीट में आते हैं।
यहां से भाजपा ने बिजनौर के विधायक और दंगे के आरोपी भारतेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। रालोद ने रामपुर से लगातार दो बार सांसद रहीं जयाप्रदा को टिकट दिया है।
बसपा से पूर्व विधायक मलूक नागर ताल ठोक रहे हैं तो सपा से पूर्व विधायक शाहनवाज राणा मैदान में हैं। यहां भी एक तिहाई से ज्यादा मुस्लिम वोटों पर सभी नजरें टिकी हैं।
मेरठ: नगमा के स्टारडम का टेस्ट
मेरठ लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसद भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल को सपा प्रत्याशी एवं मंत्री शाहिद मंजूर, बसपा प्रत्याशी पूर्व सांसद और पूर्व मेयर शाहिद अखलाक और कांग्रेस की नगमा की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
सभी की नजरें मुस्लिम वोटों पर लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मुस्लिम वोटों का बहुमत हासिल करने वाला ही भाजपा के साथ मुकाबले में रहेगा।
फिल्म अभिनेत्री नगमा को सुनने, देखने के लिए भीड़ तो उमडी लेकिन उन्हें कांग्रेस के जर्जर ढांचे और गुटबंदी से रू-ब-रू होना पड़ रहा है।
‘आप ’के डॉ. हिमाशु सिंह चुनाव में उपस्थिति दिखाने की कोशिश में लगे हैं।
बागपत: दांव पर छोटे चौधरी की प्रतिष्ठा
चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि और अलग मिजाज के लिए देश भर में पहचान रखने वाले बागपत संसदीय सीट पर चौधरी अजित सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है।
13 महीने के अल्प कार्यकाल को छोड़कर वे 1989 से लगातार यहां सांसद हैं। उन्हें भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह, सपा के गुलाम मोहम्मद और बसपा के प्रशांत चौधरी से चुनौती मिल रही है।
अजित जाट-मुस्लिम समीकरण के भरोसे चुनाव जीतते रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगे ने इस समीकरण को काफी हद तक छिन्न भिन्न किया है। उनके सामने परंपरागत वोटरों से इतर समर्थन जुटाने की चुनौती है।
गाजियाबाद: वीके-राज बब्बर से हॉट हुई सीट
पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह के भाजपा और राज बब्बर के कांग्रेस से चुनाव मैदान में आने से यह सीट हॉट हो गई है।
यहां बसपा से मुकुल उपाध्याय, सपा से सुधन रावत के साथ ही आम आदमी पार्टी की शाजिया इल्मी चुनाव लड़ रही हैं। सुधन को छोड़कर शेष सभी उम्मीदवार बाहरी हैं।
यहां भी नजर इस बात पर है कि मुस्लिम मतों का रुझान क्या होगा। फिलहाल बहुकोणीय मुकाबले में वीके सिंह हर जगह चर्चा में हैं।
गौतमबुद्धनगर: झटके से सदमे में कांग्रेस
कांग्रेस और बसपा को चुनाव अभियान के दौरान इस सीट पर करारे झटके लग चुके हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सांसद रमेश चंद्र तोमर भाजपा में शामिल हो चुके हैं तो बसपा के मौजूदा सांसद सुरेंद्र नागर भी सपा का दामन थाम चुके हैं।
इस सीट पर भाजपा के महेश चंद्र शर्मा का मुकाबला सपा के नरेंद्र सिंह भाटी और बसपा से सतीश अवाना से है।
तोमर के भाजपा में आने से महेश चंद्र शर्मा को मजबूती मिली है। यहां मुस्लिम और गुर्जर वोटों के लिए सपा और बसपा में जोर-आजमाइश चल रही है।
बुलंदशहर: कल्याण ने प्रतिष्ठा से जोड़ा
बुलंदशहर सीट को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है। भाजपा ने उन्हीं की पसंद से भोला सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा का मुकाबला यहां सपा के मौजूदा सांसद कमलेश वाल्मीकि, बसपा के प्रदीप जाटव और रालोद की अंजु मुस्कान से है।
इस सुरक्षित सीट पर मुस्लिमों के रुझान पर नजरें हैं। फिलहाल बसपा, सपा और रालोद तीनों ही मुस्लिमों पर दावा जता रहे हैं।
मुस्लिम वोटों के बंटवारे के चलते इस सीट पर फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी आंका जा रहा है।
अलीगढ़: उम्मीदें मुस्लिम वोटों पर टिकीं
सांसद राजकुमारी चौहान के बेटे अरविंद कुमार सिंह इस बार बसपा प्रत्याशी हैं। भाजपा ने कल्याण सिंह के नजदीकी सतीश गौतम को उम्मीदवार बनाया है।
उनका मुकाबले में सपा से विधायक जफर आलम, कांग्रेस से पूर्व सांसद बिजेन्द्र सिंह मैदान में है। सपा, बसपा और कांग्रेस की उम्मीदें मुस्लिम वोटों पर टिकी हैं।
सभी अपना मुकाबला भाजपा से मान रहे हैं। मुस्लिम जिसके पक्ष में लामबंद होंगे वहीं भाजपा से मुकाबला करेगा।