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विस की 7 सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान आज, 2022 के सियासी ताप का संकेत देंगे उपचुनाव
Tue, 03 Nov 2020 01:02 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 03 Nov 2020 01:02 AM IST
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उपचुनाव।
- फोटो : अमर उजाला।
विधानसभा की सात सीटों पर उपचुनाव के लिए मंगलवार को मतदान होगा। पूरब से पश्चिम तक फैली इन विधानसभा सीटों के नतीजे वर्ष 2022 के आम चुनाव से पहले जनता के सियासी मिजाज का संकेत देंगे। कुछ हद तक ये उपचुनाव सियासी ताप का भी संकेत देंगे। चूंकि 7 में से मल्हनी को छोड़कर शेष 6 सीटें भाजपा के कब्जे वाली हैं। लिहाजा उसकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री और दर्जनों मंत्रियों ने पार्टी के किलों को बचाने के लिए पूरी ताकत झोेंक दी। जबकि प्रमुख विपक्षी नेता अखिलेश यादव, मायावती और प्रियंका गांधी वाड्रा ने उपचुनाव के प्रचार से दूरी बनाए रखी।
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बुलंदशहर : मतदान प्रतिशत पर निगाहें
बुलंदशहर सदर सीट पर बहुकोणीय चुनाव है, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा व बसपा के बीच है। रालोद मजबूती से उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जाट, मुस्लिम व दलित मतों में विभाजन की अटकलों के बीच मतदान प्रतिशत पर नजरें टिकी हैं। यहां भाजपा, रालोद व कांग्रेस ने जाट उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि बसपा, आजाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम ने मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। कुल 3.88 लाख मतदाता में एक तिहाई मुस्लिम, 17-18 फीसदी दलित, 11 से 12 फीसदी जाट और लगभग 8 फीसदी लोधी हैं। वहीं, 17 फीसदी सामान्य वर्ग के मतदाताओं में वैश्य, राजपूत व ब्राह्मण मुख्य हैं।
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नौगावां सादात : फिर भाजपा-सपा आमने सामने
नौगावां सादात सीट पर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की तरह भाजपा और सपा के बीच सीधे मुकाबले के आसार माने जा रहे हैं। जबकि बसपा चुनाव को त्रिकोणात्मक बना रही है। पूर्व क्रिकेटर व मंत्री चेतन चौहान के निधन के कारण हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी संगीता चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है। सपा व बसपा से क्रमश: मौलाना जावेद आब्दी और फुरकान अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। यहां सर्वाधिक तादाद मुस्लिम वोटरों की है। इसके बाद दलित, जाट, राजपूत, गुर्जर, सैनी, यादव मतदाता हैं।
टूंडला : हाथरस व बलिया कांड का असर तो नहीं
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित टूंडला सीट पर भाजपा से प्रेमपाल धनगर, सपा से महाराज सिंह धनगर, बसपा से संजीव और कांग्रेस से स्नेहलता उर्फ बबली चुनाव मैदान में हैं। पिछली बार की तुलना में समीकरण थोड़े बदले हैं, लेकिन कांटे की टक्कर के आसार हैं। इस सीट पर हाथरस व बलिया कांड ने असर दिखाया तो समीकरण में बदलाव आ सकता है।
उन्नाव : आखिरी क्षण तक जोड़तोड़
बांगरमऊ सीट पर आखिरी क्षण तक गोटियां बिछती रहीं। कांग्रेस की पूर्व सांसद अन्नू टंडन मतदान से एक दिन पहले सपा की साइकिल पर सवार हो गईं। भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा हो जाने पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार, सपा ने सुरेश पाल, बसपा ने महेश पाल और कांग्रेस ने पूर्व मंत्री गोपीनाथ दीक्षित की बेटी आरती दीक्षित को उम्मीदवार बनाया है।
घाटमपुर : बहुकोणीय मुकाबला
कानपुर नगर की घाटमपुर सुरक्षित सीट पर प्रदेश सरकार की मंत्री कमलरानी वरुण के निधन के कारण चुनाव हो रहा है। यहां भाजपा से उपेंद्रनाथ पासवान, सपा से पूर्व विधायक इंद्रजीत कोरी, बसपा से कुलदीप शंखवार और कांग्रेस से डॉ. कृपा शंकर उम्मीदवार हैं। इस सीट पर सर्वाधिक मतदाता दलित समाज के हैं।
मल्हनी : पारसनाथ की विरासत का सवाल
नपुर जिले की मल्हनी सीट पर अहम सवाल यह है कि जनता सपा नेता पारसनाथ यादव की विरासत उनके बेटे लकी यादव को सौंपती है या नहीं। उपचुनाव पारसनाथ के निधन के कारण हो रहा है। सपा ने लकी को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने मनोज सिंह, बसपा ने जयप्रकाश दुबे और कांग्रेस ने राकेश मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। पूर्व विधायक और पूर्व सांसद धनंजय सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
देवरिया : तय होगा बड़ा ब्राह्मण कौन
देवरिया सदर सीट पर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा ने डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, सपा ने पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, बसपा ने अवधनाथ त्रिपाठी और कांग्रेस ने मुकुंद भास्कर मणि त्रिपाठी पर दांव लगाया है। यहां से वर्ष 2012 और 2017 में विधायक रहे जनमेजय सिंह के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। उनके बेटे बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।