विहिप के झंडे के नीचे आएंगे सभी भाजपा सांसद
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विश्व हिंदू परिषद हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को धार देने की कोशिश में फिर जुट गई है। इसके लिए उसने पहले चरण में देश भर के सांसदों व विधायकों को अपने एजेंडे में लिया है।
विहिप के लोग सांसदों-विधायकों से मिलकर समान नागरिक संहिता, गोवध व धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर उनकी राय जानेंगे। जो मुद्दों से सहमत होंगे, उनसे सहयोग मांगेंगे। जो सहमत नहीं होंगे, उनकी आशंकाओं का समाधान करेंगे।
पिछले दिनों चंडीगढ़ में हुई विहिप के विशेष संपर्क अभियान की बैठक में केंद्र में मोदी की सरकार आने के बाद की स्थिति पर विचार-विमर्श के बाद यह फैसला हुआ है। तय किया गया है कि अगस्त में विहिप के लोग सांसदों-विधायकों से मिलकर हिंदुत्व व राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय जानें और अगर किसी के मन में कोई आशंका है तो उसे भी दूर करने की कोशिश करें।
जो सहमत हों उनसे धर्मांतरण, गोवध, समान नागरिक संहिता जैसे सभी मुद्दों पर और मुखर होने का आग्रह किया जाए। सहमत न होने वालों को संतुष्ट व सहमति के बिंदु पर लाने का प्रयास हो।
कोशिश हो कि सब पर न सही तो कम से किसी एक ऐसे मुद्दे पर तो सहमति के बिंदु पर लाने का प्रयास हो, जिससे उनके राजनीतिक हित प्रभावित न होते हों।
भाजपा की चुप्पी बनी चिंता का कारण
माना जाता है कि पिछले दिनों घर वापसी व गोवध जैसे मुद्दों पर उठे विवाद के मद्देनजर विहिप ने यह योजना बनाई है। इन मुद्दों पर भाजपा के ज्यादातर सांसदों-विधायकों की चुप्पी विहिप की चिंता की वजह बन गई है। इसी वजह से विहिप इनसे संपर्क करके उनसे इन मुद्दों पर पैरोकारी व मुखर होने का आग्रह करना चाहती है।
साथ न आएं तो तटस्थ ही हो जाएं : विहिप की कोशिश है कि दूसरे दल के सांसदों व विधायकों को इस मुद्दे पर साथ न लिया जा सके तो कम से कम उन्हें तटस्थ भूमिका के लिए तो तैयार कर लिया जाए, जिससे भविष्य में इन मुद्दों पर इनका बहुत मुखर विरोध न दिखे।
विहिप के सूत्रों का कहना है कि निजी तौर पर भाजपा से इतर दल के भी कई सांसद व विधायक गोवध पर पूरी तरह रोक, धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता लागू करने, सरकारों के कामकाज में तुष्टीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने के पक्षधर हैं। पर, राजनीतिक सीमाओं के कारण वे बहुत मुखर नहीं हो सकते।
कोशिश है कि ऐसे लोगों को इन मुद्दों पर किसी ऐसी भूमिका के लिए तैयार कर लिया जाए, जिससे भविष्य में इन मुद्दों पर इनके विरोध का संदेश न जाए।