{"_id":"61b3baebf8d1ce61b515b6c4","slug":"vehicles-being-picked-up-from-parking-lucknow-news-lko6083762114","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये तो दादागीरी है, पार्किंग से भी उठा ली गाड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये तो दादागीरी है, पार्किंग से भी उठा ली गाड़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
...शुक्र्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बज रहे थे... हजरतगंज हनुमान मंदिर की ओर से एक क्रेन बैक गियर में तेजी से साहू सिनेमा के पास बनी दिव्यांगजनों की पार्किंग के पास आकर रुक गई। इसके बाद ड्राइवर समेत दो लोग उतरे और आरक्षित पार्किंग से दोपहिया वाहन उठाकर क्रेन पर लादने लगे।
दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग से गाड़ी उठाने पर सवाल हुआ तो क्रेनवाला एक गाड़ी लेकर चलता बना। इसी तरह गोमतीनगर के विभूति खंड में खाली सड़क पर सन्नाटे में खड़ी कई गाड़ियां भी क्रेन उठा ले गई।
राजधानी में क्रेन ठेकेदार कुछ इस तरह अपनी ‘दादगीरी’ चला रहे हैं। वहीं, इन पर सख्ती करने वाला कोई नहीं है। सवाल ये उठता है कि ये किसके इशारे पर हो रहा है।
विज्ञापन
...इसलिए की गई थी व्यवस्था
शहर में जाम न लगे, इसके लिए गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां उठाने की व्यवस्था है। क्रेन ठेकेदार बेलगाम हैं। वहीं, इनके कारिंदे वाहन सवारों से झगड़ा करने से भी नहीं चूकते और खाली पड़ी सड़कों से भी वाहन उठा रहे हैं। नगर आयुक्त के निजी सचिव रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी एसपी शुक्ला ने बताया कि उनके सामने एक बार ऐसा होने पर उन्होंने क्रेन चालक को डांट भी लगाई थी।
कैसे बोले जिम्मेदार, जब कमाई हो रही
फरवरी में नगर निगम ने भी नो पार्किंग से गाड़ियां उठाने का ठेका उसी को दे दिया, जिसके पास यातायात पुलिस से ठेका था। शर्त थी कि निगम की जो क्रेनें हैं, उनका ठेकेदार प्रतिमाह 50 हजार और जो क्रेन उसकी हैं उनका हर महीने 30 हजार रुपये देगा। उस वक्त ठेका देने वाले तत्कालीन अपर नगर आयुक्त अमित कुमार का तर्क था कि नो पार्किंग से गाड़ियां उठाने पर जितना जुर्माना आता है उससे अधिक खर्च हो जाता है, जबकि ठेके पर देने से हर महीने करीब छह लाख रुपये की आय है।
हर गाड़ी पर ट्रैफिक पुलिस को 500 की कमाई
नो पार्किंग में चार पहिया वाहन खड़ा करने का जुर्माना 1500 रुपये है। इसमें एक हजार ठेकेदार और बाकी 500 रुपये ट्रैफिक पुलिस को बंटते हैं। इसी तरह दो पहिया वाहन का जुर्माना 800 रुपये है, जिसमें 500 ट्रैफिक पुलिस और 300 रुपये ठेकेदार को मिलते हैं। जानकारों के मुताबिक इस समय ठेकेदार की 20 क्रेनें चल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनसे कुल मिलाकर करीब 500 गाड़ियां उठाई जाती हैं, जिससे यातायात पुलिस को रोजाना एक लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही है। वहीं, ठेेकेदार ने कर्मचारियों को रोज 25 गाड़ियां उठाने का टारगेट दे रखा है। वह क्रेन चलाने वाले को वेतन नहीं, बल्कि रोजाना का ठेका देता है। ठेकेदार की हर दिन दो लाख रुपये से अधिक की कमाई होने का आकलन जानकारों का है।
दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग से गाड़ी नहीं उठाई जा सकती। ठेकेदार नो पार्किंग से ही वाहन उठाने के लिए अधिकृत हैं। नियम तोड़ने वाले पर कार्रवाई होगी।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
वाहन उठाते 500, चालान चौथाई का भी नहीं
शहर भर से नगर निगम और ठेकेदार की क्रेनें रोजाना करीब 500 गाड़ियां उठाती हैं। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन सौ से सवा सौ वाहनों का ही नो पार्किंग में चालान होता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर करीब 400 वाहन उठाए जाने के बाद बिना चालान दिए छूट कैसे जाते हैं। नगर निगम के ठेकेदार की 20 क्रेनें नो पार्किंग में खड़े वाहन उठाने के लिए लगाई गईं हैं। हर क्रेन के साथ ट्रैफिक पुलिस से संबद्ध होमगार्ड भी चलता है। इसके अलावा आसपास ठेकेदार के चार-छह गुर्गे भी रहते हैं। ये वाहन उठाने के विरोध पर मारपीट तक करते हैं। वहीं, बड़ा सवाल यह है कि उठाए जाने वाले वाहन नो पार्किंग के कुल चालान के चौथाई भी नहीं होते है तो ये बिना चालान दिए छूट कैसे जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो नो पार्किंग के चालान की संख्या क्यों नहीं बढ़ती? इससे वाहन छोड़ने के नाम पर होने वाली सौदेबाजी के आरोपों को बल मिलता है। इस बारे में डीसीपी (ट्रैफिक) व एडीसपी (ट्रैफिक) से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, पर उनसे संपर्क नहीं हो सका।
नो पार्किंग के चालान के आंकड़े
01 दिसंबर 100
02 दिसंबर 131
03 दिसंबर 38
04 दिसंबर 69
05 दिसंबर 83
07 दिसंबर 161
09 दिसंबर 113
10 दिसंबर 118
...जैसे कबाड़ से बना ली हो क्रेन
कबाड़ सी दिख रही इस क्रेन पर नंबर तक नहीं है। बावजूद इसके यह सड़कों पर बेधड़क दौड़ रही है और इसे रोकने वाला कोई नहीं है। वहीं, आम जनता के वाहन पर नंबर न हो तो तुरंत जुर्माना ठोक दिया जाता है। इतना ही नहीं इस जर्जर क्रेन पर यातायात पुलिस व नगर निगम तक स्पष्ट नहीं लिखा है। हालत देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह क्रेन सालों पुरानी है।
विज्ञापन
दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग से गाड़ी उठाने पर सवाल हुआ तो क्रेनवाला एक गाड़ी लेकर चलता बना। इसी तरह गोमतीनगर के विभूति खंड में खाली सड़क पर सन्नाटे में खड़ी कई गाड़ियां भी क्रेन उठा ले गई।
विज्ञापन
राजधानी में क्रेन ठेकेदार कुछ इस तरह अपनी ‘दादगीरी’ चला रहे हैं। वहीं, इन पर सख्ती करने वाला कोई नहीं है। सवाल ये उठता है कि ये किसके इशारे पर हो रहा है।
विज्ञापन
...इसलिए की गई थी व्यवस्था
शहर में जाम न लगे, इसके लिए गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां उठाने की व्यवस्था है। क्रेन ठेकेदार बेलगाम हैं। वहीं, इनके कारिंदे वाहन सवारों से झगड़ा करने से भी नहीं चूकते और खाली पड़ी सड़कों से भी वाहन उठा रहे हैं। नगर आयुक्त के निजी सचिव रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी एसपी शुक्ला ने बताया कि उनके सामने एक बार ऐसा होने पर उन्होंने क्रेन चालक को डांट भी लगाई थी।
कैसे बोले जिम्मेदार, जब कमाई हो रही
फरवरी में नगर निगम ने भी नो पार्किंग से गाड़ियां उठाने का ठेका उसी को दे दिया, जिसके पास यातायात पुलिस से ठेका था। शर्त थी कि निगम की जो क्रेनें हैं, उनका ठेकेदार प्रतिमाह 50 हजार और जो क्रेन उसकी हैं उनका हर महीने 30 हजार रुपये देगा। उस वक्त ठेका देने वाले तत्कालीन अपर नगर आयुक्त अमित कुमार का तर्क था कि नो पार्किंग से गाड़ियां उठाने पर जितना जुर्माना आता है उससे अधिक खर्च हो जाता है, जबकि ठेके पर देने से हर महीने करीब छह लाख रुपये की आय है।
हर गाड़ी पर ट्रैफिक पुलिस को 500 की कमाई
नो पार्किंग में चार पहिया वाहन खड़ा करने का जुर्माना 1500 रुपये है। इसमें एक हजार ठेकेदार और बाकी 500 रुपये ट्रैफिक पुलिस को बंटते हैं। इसी तरह दो पहिया वाहन का जुर्माना 800 रुपये है, जिसमें 500 ट्रैफिक पुलिस और 300 रुपये ठेकेदार को मिलते हैं। जानकारों के मुताबिक इस समय ठेकेदार की 20 क्रेनें चल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनसे कुल मिलाकर करीब 500 गाड़ियां उठाई जाती हैं, जिससे यातायात पुलिस को रोजाना एक लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही है। वहीं, ठेेकेदार ने कर्मचारियों को रोज 25 गाड़ियां उठाने का टारगेट दे रखा है। वह क्रेन चलाने वाले को वेतन नहीं, बल्कि रोजाना का ठेका देता है। ठेकेदार की हर दिन दो लाख रुपये से अधिक की कमाई होने का आकलन जानकारों का है।
दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग से गाड़ी नहीं उठाई जा सकती। ठेकेदार नो पार्किंग से ही वाहन उठाने के लिए अधिकृत हैं। नियम तोड़ने वाले पर कार्रवाई होगी।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
वाहन उठाते 500, चालान चौथाई का भी नहीं
शहर भर से नगर निगम और ठेकेदार की क्रेनें रोजाना करीब 500 गाड़ियां उठाती हैं। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन सौ से सवा सौ वाहनों का ही नो पार्किंग में चालान होता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर करीब 400 वाहन उठाए जाने के बाद बिना चालान दिए छूट कैसे जाते हैं। नगर निगम के ठेकेदार की 20 क्रेनें नो पार्किंग में खड़े वाहन उठाने के लिए लगाई गईं हैं। हर क्रेन के साथ ट्रैफिक पुलिस से संबद्ध होमगार्ड भी चलता है। इसके अलावा आसपास ठेकेदार के चार-छह गुर्गे भी रहते हैं। ये वाहन उठाने के विरोध पर मारपीट तक करते हैं। वहीं, बड़ा सवाल यह है कि उठाए जाने वाले वाहन नो पार्किंग के कुल चालान के चौथाई भी नहीं होते है तो ये बिना चालान दिए छूट कैसे जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो नो पार्किंग के चालान की संख्या क्यों नहीं बढ़ती? इससे वाहन छोड़ने के नाम पर होने वाली सौदेबाजी के आरोपों को बल मिलता है। इस बारे में डीसीपी (ट्रैफिक) व एडीसपी (ट्रैफिक) से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, पर उनसे संपर्क नहीं हो सका।
नो पार्किंग के चालान के आंकड़े
01 दिसंबर 100
02 दिसंबर 131
03 दिसंबर 38
04 दिसंबर 69
05 दिसंबर 83
07 दिसंबर 161
09 दिसंबर 113
10 दिसंबर 118
...जैसे कबाड़ से बना ली हो क्रेन
कबाड़ सी दिख रही इस क्रेन पर नंबर तक नहीं है। बावजूद इसके यह सड़कों पर बेधड़क दौड़ रही है और इसे रोकने वाला कोई नहीं है। वहीं, आम जनता के वाहन पर नंबर न हो तो तुरंत जुर्माना ठोक दिया जाता है। इतना ही नहीं इस जर्जर क्रेन पर यातायात पुलिस व नगर निगम तक स्पष्ट नहीं लिखा है। हालत देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह क्रेन सालों पुरानी है।