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लॉकडाउन से उड़ी किसानों की नींद, खेतों में सड़ रही बैंगन व बंद गोभी, औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर

Sat, 18 Apr 2020 07:08 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 18 Apr 2020 07:08 PM IST
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vegetables are getting spoiled in the fields during lockdown
खराब होती बैंगन की फसल (बायें) व खेतों में सूख रही बंद गोभी। - फोटो : amar ujala

लॉकडाउन में भले ही लखनऊ के गली-मोहल्ले में हरी सब्जियों की भरमार है, लेकिन इन्हें उगाने वाले किसानों की नींद उड़ी हुई है। बंद के चलते ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं मिलने और मंडियां बंद होने से औने-पौने दामों पर सब्जियां बेचना उनकी मजबूरी बन गई है।

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कहीं पत्ता गोभी सूख रही है तो कहीं बैंगन सड़ रहे हैं। कहीं सब्जियां जानवरों को खिलाने की तैयारी है तो कहीं सब्जी सड़ न जाए, इस डर से किसान कम दामों में सब्जियां बेचकर मुक्त हो जाना चाहते हैं।
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कहीं मंडी तक पहुंच नहीं है तो कहीं थोक बाजार बंद है। लॉकडाउन में राजधानी में किस तरह औने-पौने दामों में सब्जियां बेचने को किसान मजबूर हैं। पेश है एक रिपोर्ट...

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मंडियों तक नहीं पहुंच रहीं सब्जियां

बीकेटी के किसान और भारतीय किसान यूनियन टिकैत ग्रुप के पूर्व जिला महामंत्री छोटेलाल और आजाद अंसारी कहते हैं कि टमाटर सड़ने लगा है और पत्ता गोभी सूखने लगी है।

इस इलाके में टमाटर, लौकी, कद्दू, खीरा, तोरई, भिंडी और गोभी मुख्य रूप से पैदा की जाती है। यहां से सब्जियां सीतापुर रोड पर मानपुर मंडी इटौंजा, अलीगंज की नवीन गल्ला मंडी और दुबग्गा मंडियों तक जाती हैं।

इसके अलावा सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी व हरदोई भी सब्जियों की सप्लाई होती है। ट्रांसपोर्टर की दिक्कत है इसिलए सब्जियां बाहर नहीं जा पा रही हैं। मानपुर मंडी में जितनी बिक रही हैं, बस वहीं बिक पा रही है।

दूर मंडियों तक भी आवाजाही न होने से माल डंप हो रहा है। वे कहते हैं कि आम दिनों में इस मौसम में टमाटर 35-40 रुपये बेचते हैं, लेकिन अभी 10-15 रुपये में बेचना पड़ रहा है।

गांव के 50-60 परिवार सब्जी पर निर्भर

मंसाराम रावत, रामकुमार मौर्या, भरत लाल लोधी, महेश निगोहां के किसान हैं। खेतों में सड़ रहे बैंगन दिखाते हुए कहते हैं कि हमारे गांव के 50-60 परिवार सब्जी पर निर्भर हैं।

मोहनलालगंज-निगोहां बॉर्डर पर मदाखेड़ा मंदिर पर थोक बाजार लगती है, लेकिन लॉकडाउन में ये बंद है। इसके अलावा गांव ककुहाखेड़ा से सब्जी दुबग्गा मंडी, तेलीबाग, कल्ली, बंगला बाजार, साउथ सिटी, रुचिखंड और उतरेठिया सेक्टर 21 को जाती है।

ककुहाखेड़ा के ज्यादा किसान थोक व्यवसाय भी करते हैं। लखनऊ और लोकल के सब्जी व्यवसायी इन किसानों से सब्जी लेते हैं। ये मदाखेड़ा बाजार या किसानों के घर से सब्जियां उठा लेते थे, लेकिन वो भी ठप है।

आम दिनों में यहां बाजार लगा करती थी...

गोसाईंगंज में नवीन गल्ला उपमंडी मोहारीकलां है, लेकिन बंद है। किसान शहर की मंडी तक नहीं जा पा रहे हैं। आम दिनों में यहां बाजार लगा करती थी, जिसमें सब्जियां बेच लेते थे लेकिन वो भी बंद है।

गोसाईंगंज के करसंडा निवासी हरिओम वर्मा कहते हैं कि टमाटर व तोरई की खेती की है, जो तैयार है। लॉकडाउन के शुरुआती दौर में दुबग्गा सब्जी मंडी गए थे, लेकिन सख्ती के बाद फिर नहीं जा सके। सामान्य दिनों में लागत से दो से तीन गुना फायदा होता था। अब तो सब्जी खराब न हो इसलिए जितने की भी बिक जाए बेच देते हैं।

लागत निकालना भी हो रहा मुश्किल

किसान भरत लाल लोधी और मंसाराम रावत कहते हैं कि एक बिस्वा टमाटर की खेती में करीब 4000 रुपये का खर्च आता है। आम दिनों में हम इसे 10000 रुपये में बेच लेते हैं।

इस वक्त हालात यह है कि लागत भी नहीं निकल रही है। यानी टमाटर 10.15 रुपये किलो बेच रहे हैं। इसी तरह एक बिस्वा भिंडी में 1500 रुपये की लागत आती है, जिसे आम दिनों में इसे 3000 से 4000 रुपये तक बेच लेते हैं।

मंडी न जा पाने के कारण 10 रुपये किलो बेचना पड़ रहा है। खीरा इस समय थोक में 30 रुपये का पांच किलो बिक रहा है। वहीं, श्वेता कहती है कि खरीदार नहीं मिला तो पत्ता गोभी खेत में ही छोड़ दी है।

अब इसे भैंस पालने वालों को दे देंगे। भाकियू टिकैत ग्रुप के जिला उपाध्यक्ष कमलेश मौर्या कहते हैं कि मलिहाबाद में ही किसानों का करीब 30.50 लाख रुपये तक का नुकसान हो गया है।

सोच रहे थे कि सब्जियां अच्छी हो गई हैं तो दाम अच्छे मिलेंगे और बेटी के हाथ पीले करेंगे

बीकेटी के किसान छोटेलाल या फिर निगोहां के भरतलाल लोधी हों, यह सोच कर रखे थे कि सब्जियां अच्छी हो गईं हैं तो दाम अच्छे मिलेंगे और बेटी के हाथ पीले करेंगे। छोटेलाल ने सात बीघा में तोरई बोई थी। फसल तो अच्छी हुई, पर  लागत ही नहीं निकल पाई।

ऐसा ही हाल भरतलाल लोधी का भी है। बेटी अंजलि की शादी के लिए काफी सपने देखे थे, फिलहाल कोरोना का साया उस पर पड़ गया है। ऐसा ही हाल गांव के कई किसानों का है।

इधर, आम आदमी को चुकाने पड़ रहे मंहगे दाम
बंथरा के चंदर सिंह और हाइडिल के भूपेश झा बताते हैं कि सब्जी दुकानों पर प्याज 40 से 45 रुपये प्रति किलो, टमाटर 45 से 50 रुपये, भिंडी 50 से 60 रुपये, आलू 30 से 40 रुपये, कद्दू 40 से 50 रुपये, बैगन 40 से 50 रुपये, मटर 60 से 70 रुपये प्रति किलो मिल रहा है

वहीं शुक्रवार को निशातगंज सब्जी मंडी में 40.60 रुपये भिंडी बिकी। हजरतगंज निवासी उर्मिला कहती हैं कि टमाटर 30.40 रुपये किलो बिक रहा है। लॉकडाउन में हमने 50 रुपये तक टमाटर, आलू 30 रुपये किलो, भिंडी 80 रुपये किलो तक खरीदी है।

आढ़तियों का आरोप, जमकर कालाबाजारी करने में लगे है दुकानदान

लॉकडाउन के चलते दुबग्गा सब्जी मंडी में सब्जियां बाहर से पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रही हैं, जिससे सब्जियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आढ़तियों का आरोप है कि दुकानदार सब्जियों की जमकर कालाबाजारी करने में लगे है।

दुबग्गा मंडी अध्यक्ष लाला यादव, संरक्षक अजय सिंह, आढ़ती दीपक लोधी, छोटू मिश्रा, शाहरुख सहित अन्य आढ़तियों का आरोप है कि मंडी में बाहर से सब्जियां पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रही है, जिससे कुछ रेट बढ़े है। मंडी में सब्जी खरीदने वाले पैकार व फुटकर दुकानदार बाहर दोगुने रेट लोगों से वसूल रहे हैं।

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