‘क्या राहुल गांधी गरीबों में अपना वेतन बांटेंगे?’
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भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल का वेतन गरीबों की मदद में देने का ऐलान करते हुए कहा कि लोग उप्र के सभी सांसदों से पूछें कि वे अपना कितना वेतन गरीबों की मदद में दे रहे हैं। राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन्होंने मीडिया से अमेठी, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर समेत जौनपुर सांसद से भी इस सवाल को पूछने को कहा।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि ‘मैं जानता हूं कि आपके हाथ बंधे हैं। पर हजार, डेढ़ हजार का मुआवजा देकर किसानों के साथ मजाक क्यों किया जा रहा है’। वे शहर के तिकोनिया पार्क में किसानों की फसलें चौपट होने के बाद मुआवजा वितरण में की जा रही गड़बड़ी के विरोध में भाजपा की ओर से शुक्रवार को आयोजित धरने को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वह नेताओं के सुनहरे भाषणों से तंग आ चुके हैं। सुनहरे भाषणों से गरीबों का दर्द दूर नहीं होने वाला। किसान की 25 हजार की आरसी कटती है तो उसे जेल भेज दिया जाता है। उद्योगपतियों को आरसी के बाद भी जेल नहीं भेजा जाता।
देश नेताओं के बल पर नहीं बल्कि किसानों एवं मजदूरों पर टिका है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ‘मैं जानता हूं कि आपके हाथ बंधे हैं। पर, क्या आप अपना मन बड़ा नहीं कर सकते। किसानों को मुआवजे के नाम पर हजार, डेढ़ हजार रुपये का चेक क्या यह संवेदनहीनता नहीं है। आखिर गरीब के घाव पर क्यों नमक छिड़क रहे हैं’।
गरीबों का नाम दो, पैसा उनके अकाउंट में पहुंच जाएगा
भाषण एवं राजनीति के बजाय गरीबों के लिए कुछ करने की जरूरत बताते हुए सांसद वरुण गांधी ने ऐलान किया कि वे अपने मौजूदा पांच वर्ष के संसदीय कार्यकाल का वेतन गरीबों की मदद के लिए देंगे। प्रत्येक माह उनकी विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारी गरीबों का नाम चुन कर भेजेंगे। पैसा उनके पास पहुंच जाएगा।
कहा कि ‘मैं नहीं जानता कितने गरीबों की मदद कर पाऊंगा लेकिन जो मन में है उससे ज्यादा ही करूंगा। मैं उप्र के सांसदों का आह्वान करता हूं कि वे भी अपने वेतन से गरीबों की मदद करें। मीडिया के लोग प्रतापगढ़, अंबेडनगर, जौनपुर व अमेठी के सांसद से भी पूछें कि वरुण ने पांच साल का वेतन गरीबों को देने की घोषणा की है। वे अपने वेतन से गरीबों को कितना दे रहे हैं।
अंत में उन्होंने अपने पांच माह के वेतन में एक-एक लाख रुपया ओलावृष्टि में सदमे से मरे चार किसानों के परिवारीजनों एवं एक बर्निंग बस हादसे में बहादुरी दिखाते हुए मौत का शिकार हुए युवक अंकित मिश्र के परिवारीजन को जिलाध्यक्ष करुणा शंकर द्विवेदी के हाथ से वितरित कराया।
लोग गरीबों के घर जाएं और उनकी मदद करके चले आएं
संबोधन के दौरान सांसद ने उद्योगपतियों एवं सक्षम लोगों का आह्वान किया कि वे गरीबों की मदद के लिए आगे आएं। कहा कि स्थानीय सक्षम लोग गरीबों के घर जाएं व चुपचाप मदद करके चले आएं।
किसान आत्महत्या इसलिए करता है जब उसे चारों ओर से निराशा हाथ लगती है। कहा मेरी इतनी हैसियत नहीं कि मैं सभी की गरीबी दूर कर सकूं लेकिन क्या कोई चिराग बनकर भी न कार्य करूं। सांसद होने के नाते भी मेरा दायित्व है कि मैं क्षेत्र के लोगों का सुरक्षा कवच बनकर कार्य करूं।
लेखपाल एवं तहसीलदार का क्या कुछ अपनी जेब से जाता है। वे सर्वे करते समय पांच हजार को 50 हजार नहीं कर सकते। इससे उनको गरीबों की दुआ मिलेगी। सुख व चैन इसी में है।