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एसजीपीजीआई में २२४ फैकल्टी, अनुसूचित जनजाति शून्य, भर्ती में आरक्षण की अनदेखी का आरोप
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पीजीआई में कुछ डॉक्टरों ने भर्ती में आरक्षण की अनदेखी का आरोप लगाया।
- फोटो : ??? ?????
चंद्रभान यादव
संजय गांधी पीजीआई में कार्यरत 224 संकाय सदस्यों में अनुसूचित जनजाति का एक भी सदस्य कार्यरत नहीं है। यहां संकाय सदस्यों के कुल 21.87 फीसदी पद ही आरक्षित श्रेणी में हैं।
इस बार निकली 165 पदों की भर्ती में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए दो पद अनुसूचित जनजाति में आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षित पदों के खाली होने को लेकर कुछ संकाय सदस्यों ने विरोध दर्ज कराते हुए बैकलॉग भरने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली के तहत प्रदेश के संस्थानों में होने वाली भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी, अनुसूचित जाति को 21 फीसदी और अनुसूचित जनजाति को दो फीसदी (कुल 50 फीसदी) आरक्षण देने का प्रावधान है।
इसके बाद भी एसजीपीजीआई के 224 संकाय सदस्यों में ओबीसी कैटेगरी के 27 संकाय सदस्य हैं। यह 12.05 फीसदी है। इसी तरह अनुसूचित जाति के 22 यानी 9.82 फीसदी हैं।
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जबकि एसटी की संख्या शून्य है। कुल पदों को मिलाकर आरक्षित श्रेणी में 21.87 फीसदी पद ही भरे हैं। अब संस्थान में 165 पदों पर भर्ती हो रही है।
इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 105, एसोसिएट प्रोफेसर के 26, एडिशनल प्रोफेसर के 12 और प्रोफेसर के 22 पद हैं। इन पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अनुसूचित जनजाति कैटेगरी में दो पद आरक्षित किए गए हैं। अन्य पर जनजाति का कोटा शून्य रखा गया है।
भर्ती को लेकर शुरू हो गया विरोध
संस्थान के कुछ चिकित्सकों ने विरोध जताते हुए बैकलॉग भरने की मांग की है। उन्होंने निदेशक सहित अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजा है। मांग की है कि पहले से कार्यरत संकाय सदस्यों और नई भर्ती के पदों को मिलाकर कुल 389 पद के सापेक्ष आरक्षण का निर्धारण किया जाए, क्योंकि अब अगले 10 से 20 साल के बीच संस्थान में कोई नई भर्ती होने की संभावना नहीं है।
नियमानुसार किए आकलन
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि नई भर्ती के लिए निकाले गए 165 पदों में 83 आरक्षित श्रेणी के रखे गए हैं। भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। पुरानी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। नई भर्ती में सभी आकलन नियम के अनुसार किए गए हैं।
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संजय गांधी पीजीआई में कार्यरत 224 संकाय सदस्यों में अनुसूचित जनजाति का एक भी सदस्य कार्यरत नहीं है। यहां संकाय सदस्यों के कुल 21.87 फीसदी पद ही आरक्षित श्रेणी में हैं।
इस बार निकली 165 पदों की भर्ती में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए दो पद अनुसूचित जनजाति में आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षित पदों के खाली होने को लेकर कुछ संकाय सदस्यों ने विरोध दर्ज कराते हुए बैकलॉग भरने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली के तहत प्रदेश के संस्थानों में होने वाली भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी, अनुसूचित जाति को 21 फीसदी और अनुसूचित जनजाति को दो फीसदी (कुल 50 फीसदी) आरक्षण देने का प्रावधान है।
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इसके बाद भी एसजीपीजीआई के 224 संकाय सदस्यों में ओबीसी कैटेगरी के 27 संकाय सदस्य हैं। यह 12.05 फीसदी है। इसी तरह अनुसूचित जाति के 22 यानी 9.82 फीसदी हैं।
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जबकि एसटी की संख्या शून्य है। कुल पदों को मिलाकर आरक्षित श्रेणी में 21.87 फीसदी पद ही भरे हैं। अब संस्थान में 165 पदों पर भर्ती हो रही है।
इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 105, एसोसिएट प्रोफेसर के 26, एडिशनल प्रोफेसर के 12 और प्रोफेसर के 22 पद हैं। इन पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अनुसूचित जनजाति कैटेगरी में दो पद आरक्षित किए गए हैं। अन्य पर जनजाति का कोटा शून्य रखा गया है।
भर्ती को लेकर शुरू हो गया विरोध
संस्थान के कुछ चिकित्सकों ने विरोध जताते हुए बैकलॉग भरने की मांग की है। उन्होंने निदेशक सहित अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजा है। मांग की है कि पहले से कार्यरत संकाय सदस्यों और नई भर्ती के पदों को मिलाकर कुल 389 पद के सापेक्ष आरक्षण का निर्धारण किया जाए, क्योंकि अब अगले 10 से 20 साल के बीच संस्थान में कोई नई भर्ती होने की संभावना नहीं है।
नियमानुसार किए आकलन
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि नई भर्ती के लिए निकाले गए 165 पदों में 83 आरक्षित श्रेणी के रखे गए हैं। भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। पुरानी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। नई भर्ती में सभी आकलन नियम के अनुसार किए गए हैं।