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पीएम मोदी की टीम में यूपी के हर पांच जिले पर एक कैबिनेट मंत्री

Wed, 06 Jul 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 06 Jul 2016 02:10 AM IST
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Uttar Pradesh representatives in prime minister Modi's cabinet.
- फोटो : PTI

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के गुलदस्ते को यूपी में 2017 की सियासी गणित के लिहाज से सजाने की कोशिश की है।

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मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार में महेन्द्र पांडेय के रूप में एक ब्राह्मण, अनुप्रिया पटेल के रूप में एक पिछड़ा और कृष्णा राज के रूप में एक अनुसूचित जाति का चेहरा लेकर जहां अगड़ा, पिछड़ा और दलित समीकरणों में संतुलन साधने का संदेश दिया है, वहीं यूपी की पांच महिलाओं को मंत्रिमंडल में भागीदारी देकर आधी आबादी का वोट भी लामबंद करने का प्रयास किया है।
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कठेरिया के त्यागपत्र देने के बावजूद मोदी सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी से 15 चेहरे हो गए हैं। मंत्रिमंडल में यूपी से पार्टी के हर पांच सांसदों और पांच जिलों पर एक मंत्री हो गया है। प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में भाजपा के 71 सांसद हैं। दो सांसद भाजपा गठबंधन में शामिल अपना दल के हैं। उप्र से राज्यसभा में पार्टी के तीन सांसद हैं।
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इस तरह भाजपा गठबंधन के पास यूपी से कुल 76 सांसद हैं। इनमें से प्रधानमंत्री सहित 15 सांसद मंत्रिमंडल में पहुंच गए हैं। यह औसत प्रत्येक पांच सांसद पर एक मंत्री का पड़ता है। यूपी के 75 जिलों के हिसाब से मोदी मंत्रिमंडल में प्रत्येक पांच जिलों पर एक मंत्री को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दे दिया गया है।

इस तरह साधा अगड़े-पिछड़ों का समीकरण

Uttar Pradesh representatives in prime minister Modi's cabinet.

यूपी से शामिल 15 चेहरों में आठ अगड़े, छह पिछड़े व एक दलित का प्रतिनिधित्व हो गया है। अगड़ों में कलराज मिश्र, डॉ. महेश शर्मा, महेन्द्र पांडेय के रूप में तीन ब्राह्मण, राजनाथ सिंह व वीके सिंह के रूप में दो ठाकुर, मनोज सिन्हा के रूप एक भूमिहार के साथ मेनका और मनोहर परिकर शामिल हैं।

मोदी ने तीन ब्राह्मण चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भले ही सपा सरकार ब्राह्मणों की अनदेखी कर रही हो, लोग उनके (मोदी) बारे में भी ब्राह्मणों व अगड़ों की उपेक्षा का प्रचार कर रहे हों लेकिन यह सच नहीं है।

मोदी ने यूपी में यादवों के बाद सर्वाधिक पिछड़ी आबादी वाली कुर्मी बिरादरी के दो चेहरे संतोष गंगवार व अनुप्रिया पटेल, उमा भारती के रूप में लोध, निरंजन ज्योति के रूप में निषाद और संजीव बालियान के रूप जाट को जगह देकर इन जातियों के वोट को भी लामबंद करने की कोशिश की है।

कृष्णा राज को मंत्री बनाकर दलितों में जाटवों के बाद अनुसूचित जाति में सबसे ज्यादा आबादी वाले पासी समाज को भाजपा के नजदीक लाने की चाल चली है।

सपा व बसपा को घेरने की कोशिश

Uttar Pradesh representatives in prime minister Modi's cabinet.

मोदी ने महिलाओं के मुद्दे पर सपा और बसपा को घेरने की कोशिश की है। जिस तरह सपा सरकार के 60 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिर्फ दो महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिला है और बसपा सरकार में इतनी महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, उसे देखते हुए मोदी ने भाजपाइयों को यह कहने का आधार दे दिया है कि भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी को महिलाओं के सम्मानजनक भागीदारी की चिंता नहीं है।

क्षेत्रवार सियासी गणित पर भी ध्यान
यूपी में क्षेत्रवार सियासी गणित साधने पर भी ध्यान दिया गया है। पूर्वांचल में पिछले कई विधानसभा चुनावों में पार्टी को झटका लगता रहा है। इसलिए वहां से प्रधानमंत्री ने अपने साथ चार और को मंत्री बनाकर इस इलाके के लोगों को 2017 के चुनावी समर में भाजपा के साथ लामबंद करने की कोशिश की है।

इस तरह पूरब, पश्चिम और मध्य यूपी से पांच-पांच मंत्री रखकर सभी क्षेत्रों में सामंजस्य बनाने पर जोर दिया गया है। यूपी के पड़ोसी राज्यों में भी जातियों के गणित को ध्यान में रखा गया है।

ऐसे चेहरे शामिल किए गए हैं जो यूपी के आगे के समर में भाजपा के लिए वोटों को दुरुस्त करने में मददगार बनें।

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