टीपू के राज में 'आबरू' पर ज्यादा खतरा
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अखिलेश सरकार चाहे जितने भी दावे करें, लेकिन माया व अखिलेश सरकार के पहले 21 महीनों का आंकड़ा तो यही कहता है कि अखिलेश राज में महिलाएं ज्यादा असुरक्षित हैं।
यह सच आरटीआई के तहत राज्य महिला आयोग से मिली जानकारी में आया है। नई सरकार में महिलाएं उत्पीड़न के 23 फीसदी अधिक रिपोर्ट दर्ज हुए।
यही नहीं इन मामले के निस्तारण में भी माया सरकार से काफी पीछे है। यानी नई सरकार सूबे में महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम है।
उर्वशी शर्मा ने पिछले साल 16 दिसंबर को आटीआई के जरिये उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग से 11 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। जवाब में आयोग ने अखिलेश और मायावती सरकार के 21-21 महीनों के आंकड़े जुटाए गए।
आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक अखिलेश सरकार के 21 महीनों में महिला उत्पीड़न की 49,465 शिकायतें आईं, जबकि मायावती शासन के 21 महीनों में 40060 शिकायतें दर्ज की गई।
मायावती शासन की तुलना में अखिलेश राज में 9205 मामले अधिक रिपोर्ट किए गए। यानी अखिलेश सरकार में महिला उत्पीड़न के मामलों में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
यही हालात मामलों के निस्तारण में भी रहा। मायावती शासन के उसी अवधि में 28952 मामलों का निबटारा किया गया तो अखिलेश राज में 13429 का निबटारा हुआ।
यानी माया राज में शिकायतों के निस्तारण का दर 72 तो अखिलेश सरकार में महज 27 फीसदी रही।
उर्वशी ने बताया कि वर्तमान यूपी सरकार के मुखिया कुछ भी दावे करें, लेकिन आंकड़े इसके उलट ही कहानी कह रहे हैं। अखिलेश राज में महिलाएं ज्यादा असुरक्षित हैं।