42 हजार सिपाहियों की भर्ती नई नियमावली से होगी, पुरानी से कोई लेना-देना नहीं: योगी के मंत्री
हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार ही वर्ष 2015-16 की सिपाही भर्ती होगी। राज्य सरकार ने उस पर रोक नहीं लगाई है। सरकार ने सिर्फ अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखा है, जिसमें पुरानी भर्ती प्रक्रिया के तरीकों को गलत बताया गया है। पुराने 34,716 पदों की भर्ती का नए 42 हजार पदों की प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। न ही राज्य सरकार इसमें रोड़ा बनेगी।
सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने सिपाही भर्ती के विरोध में हजारों अभ्यर्थियों के सड़क पर उतरने के बाद इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। एनेक्सी मीडिया सेंटर में बुधवार दोपहर उन्होंने कहा कि 2015-16 की आरक्षी भर्ती रोके जाने की आशंका के चलते प्रदर्शन हो रहा है, जबकि सरकार की ऐसी मंशा नहीं है। इस भर्ती में 29 हजार सिविल पुलिस और 5716 पीएसी के पद थे।
इसमें हाईस्कूल के 100, इंटर के 200 और दौड़ के 200 अंक के आधार पर मेरिट लिस्ट बननी थी और चयन होना था। इस प्रक्रिया को लेकर 27 मई 2016 को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी। 20 जनवरी 2017 को हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि इस याचिका पर उसका क्या कहना है?
सरकार ने मार्किंग सिस्टम से दिखाई थी असहमति
सरकार ने जवाब में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शिता से पूरी करने की बात कही और मार्किंग सिस्टम से असहमति जताई थी। साथ ही बताया था कि नई भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। 17 अगस्त 2017 को सरकार ने नई नियमावली बनाई, जिसमें कुल 300 अंकों का प्रश्न पत्र है। क्वालिफाई करने के लिए दौड़ पास करना जरूरी रखा गया है और लिखित परीक्षा को भी अनिवार्य किया गया है।
कोर्ट को इससे भी अवगत कराया गया है कि नए 42 हजार पदों की भर्ती के लिए नई नियमावली को लागू किया जाएगा। पुरानी भर्ती हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार होगी। सिद्धार्थनाथ ने कहा कि आरक्षियों के कुल 1.34 लाख पद हैं। इनमें से 42 हजार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। 34,716 पदों का मामला कोर्ट में है। इसलिए अभ्यर्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है।