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ईमानदार नेतृत्व की कमी से अटका सूबे का विकास
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
Updated Thu, 28 Nov 2013 10:49 AM IST
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राजस्थान और बिहार क्या यूपी से इसलिए आगे निकल गए कि वहां की सरकारी मशीनरी बेहतर काम कर रही है?
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क्या ईमानदार नेतृत्व की कमी और मानव संसाधन का सही दोहन नहीं होने से सूबे का विकास प्रभावित हो रहा है? शिक्षा में हम बिहार जैसा प्रयोग क्यों नहीं कर पा रहे?
बुधवार को साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन (एलएमए) की कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने जो हकीकत सामने रखी उससे ये सवाल उठना लाजिमी है।
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विशेषज्ञों ने कहा कि स्किल डवलपमेंट के बगैर विकास को सही दिशा नहीं दी जा सकती।
ईमानदार नेतृत्व की कमी और मानव संसाधन का सही दोहन नहीं होने से यूपी का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।
कॉन्फ्रेंस में आए सुझावों की रिपोर्ट सरकार को सलाह के तौर पर भेजी जाएगी।
राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष एनसी बाजपेई ने शुभारंभ के मौके पर कहा कि नई औद्योगिक नीति को प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
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पीपीपी मॉडल पर सरकार मानव संसाधन का सही उपयोग करना चाहती है। औद्योगिक विकास केलिए सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया गया है।
वहीं स्किल डवलपमेंट मिशन से हमारी कोशिश है कि मानव संसाधनों का उचित दोहन किया जाए। उन्होंनेकहा कि स्किल डवलपमेंट पॉलिसी तैयार की जा चुकी है।
ऊर्जा, पर्यावरण के साथ शिक्षा पर हमारा खास जोर है। इसके लिए लैपटॉप वितरण किया गया। आबादी में ज्यादा होने से हमारी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
बेहतर दक्षता के लिए नए आईटीआई और पॉलीटेक्निक खोले जा रहे हैं। स्किल डवलपमेंट मिशन पर काम शुरू कर दिया गया है।
इसमें सहयोग नाबार्ड, टाटा, एआईएमए और यूपी सरकार का रहा। कार्यक्रम में आयोजक चेयरमैन राजीव कपूर, एलएमए के अध्यक्ष राकेश कुमार मित्तल, सलाहकार योजना आयोग पवन अग्रवाल, टीसीएस केचीफ कंसल्टेंट जयंत कृष्णा, प्रमुख सचिव वोकेशनल एजूकेशन आलोक कुमार मौजूद रहे।
मैरा ने दिखाया आईना
केंद्रीय योजना आयोग के सदस्य अरुण मैरा का कहना था कि अगर सरकारी मशीनरी बेहतर हो तभी विकास की संभावना बनती है।
यूपी, बिहार, राजस्थान कभी बीमारू राज्य कहे जाते थे। अब यूपी से ये राज्य आगे निकल गए हैं। इसकी वजह इन राज्यों में सरकारी मशीनरी का बेहतर नेतृत्व रहा।
फाइल एक मंत्रालय से दूसरे में घूमती रहती है। इससे विकास प्रभावित होता है। लघु उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। इससे उद्यमी तैयार करने में मदद मिलेगी।
बिहार बनेगा यूपी का मॉडल
शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयोगों के चलते बिहार अब यूपी का मॉडल बनेगा। बिहार में शिक्षा की बेहतरी के लिए किए जा रहे नए प्रयोगों को यहां भी लागू किया जा सकता है।
बिहार के प्रमुख सचिव शिक्षा अमरजीत सिन्हा ने वहां किए जा रहे प्रयोगों की जानकारी दी। उन्होंने अपने प्रजेंटेशन में बताया कि शिक्षकों की काबिलियत परखने के लिए हमने एक टेस्ट लिया था।
इसमें 25 प्रतिशत शिक्षक फेल हो गए। अब हमने इसे निरंतर करने की योजना तैयार की है।
उन्होंने नॉन डिटेंशन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके चलते बच्चे बिना सीखे ही अगली कक्षाओं में पहुंच रहे हैं।
वे एक वाक्य सही से नहीं पढ़ सकते। ऐसी पढ़ाई का क्या मतलब है? उनको सिखाने के लिए हम अलग से प्रयास कर रहे हैं। समूहीकरण कक्षाएं मिड-डे मील के बाद चलाई जा रही हैं।
इनमें सरल वाक्यों व कहानी के जरिये बच्चों को पढ़ाया जाता है। आठ महीने पहले राज्य के 70 हजार स्कूलों में इसे लागू किया गया है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं।
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