मेट्रो के लिए यूटीलिटी ट्रांसफर सिस्टम की कवायद आगे बढ़ी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमौसी से मुंशी पुलिया तक 23 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट पर सार्वजनिक सेवाओं के स्थानांतरण (पब्लिक यूटीलिटी ट्रांसफर) के लिए कवायद शुक्रवार को और आगे बढ़ गई।
सबसे पहले अमौसी से आलमबाग तक यूटीलिटी ट्रांसफर होगा।
इसके तहत सीवरेज लाइन, वॉटर लाइन, टेलीफोन लाइन, मार्ग प्रकाश, नाले, बिजली के भूमिगत केबल और उपरिगामी तारों को हटा कर दूसरे स्थानों पर ले जाया जाएगा।
इस संबंध में मेट्रो सेल की ओर से संबंधित विभागों को निर्देशित दे दिया गया है। सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर इस रूट पर अपनी सेवाओं का चिन्हांकन कर यूटीलिटी मैप मेट्रो आफिस में जमा कराना है।
इसके बाद में जब पिलर और भूमिगत रैंप के लिए सड़कों पर स्थान तय हो जाएगा, तब पता चलेगा कि कितनी यूटीलिटी ट्रांसफर की जाएंगी।
इस यूटीलिटी ट्रांसफर पर जो भी खर्च आएगा, वह एलएमआरसी इन विभागों को देगा। डीएमआरसी के साथ इन विभागों की मीटिंग अगले सप्ताह संभव है।
जिसमें इस कवायद की स्थिति काफी कुछ साफ हो जाएगी। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के निदेशक राजीव अग्रवाल ने शुक्रवार को एलडीए, लेसा, जल निगम, जल संस्थान, भारत संचार निगम लिमिटेड और नगर निगम के अधिकारियों की बैठक ली।
इसमें पब्लिक यूटीलिटी ट्रांसफर के ढांचे को विधिवत समझाया गया। इस संबंध में सभी विभागों को लगभग तीन महीने पहले ही पत्र भेज दिए गए थे।
इस आधार पर सभी ने अपना होमवर्क किया हुआ था। फिलहाल सभी एजेंसियों को अपनी-अपनी यूटीलिटी जो मेट्रो रूट पर हैं, उनका चिन्हांकन कर के पूरा मानचित्र बनाना होगा। इससे मेट्रो के ट्रैफिक एलाइनमेंट को मिलाया जाएगा।
जमीन के 50 फीट अंदर चलेगी मेट्रो
भूमिगत मेट्रो ट्रेन जमीन से करीब 50 फीट अंदर चलेगी। जबकि, कोई भी पब्लिक यूटीलिटी इतनी गहराई में नहीं है।
टनल बोरिंग मशीन के जरिए जमीन के अंदर लाइन बिछाई जाएगी। ऐसे में ऊपर से खोदाई की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
केकेसी से हजरतगंज तक 4 किलोमीटर भूमिगत मेट्रो होगी। जहां रैंप होगा, वहां जन सुविधाएं अधिक हटाई जाएंगी।
(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)