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UPTU: खत्म हुआ 'तोमर राज', रजिस्ट्रार पद से बर्खास्त!

Sun, 25 May 2014 11:39 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 25 May 2014 11:39 AM IST
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UPTU relieves registrar for awarding irregular affiliations

उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के रजिस्ट्रार यूएस तोमर को पद से हटा कर उनसे सभी कामकाज छीन लिए गए हैं।

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उन्हें 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों के संबद्धता प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी द्वारा की जा रही जांच प्रभावित न हो इसलिए यह कदम उठाया गया है।

कुलपति डॉ. आरके खांडल ने जांच पूरी होने तक तोमर को सभी कार्यों से अलग करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

कुलपति आरके खांडल ने दिखाई दिलेरी

UPTU relieves registrar for awarding irregular affiliations

फिलहाल, यूएस तोमर को यूपीटीयू की आर्किटेक्चर फैकल्टी से संबद्ध किया गया है। वह प्रतिदिन यहीं पर अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे और बिना निर् मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

उन पर सत्र 2014-15 में संबद्धता के लिए फर्जी वेबसाइट बनाकर कॉलेजों से ऑनलाइन आवेदन लेने और बैंक में अपने स्तर पर ही खाता खोलने का आरोप लगाया गया है।

उल्लेखनीय है, यूपीटीयू ही ऐसी यूनिवर्सिटी है जहां यूएस तोमर रजिस्ट्रार पद पर लंबे समय से काम कर रहे हैं।

यह पहला मौका है जब किसी कुलपति ने उनके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई की है।

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जांच प्रभावित कर सकते थे तोमर

UPTU relieves registrar for awarding irregular affiliations

यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल का कहना है कि तोमर अगर पद पर बने रहे तो जांच प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में उन्हें कार्यों से विरत रखने का फैसला किया गया है। बीते शैक्षिक सत्र 2013-14 में 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देने के मामले में उन पर बड़ा खेल करने का आरोप लगाया गया है।

इसके कारण करीब 4500 स्टूडेंट्स का भविष्य फंसा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार संबद्धता की जो प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होनी थी उसे नियम विरुद्ध निर्धारित तारीख के बाद करने की कोशिश की गई।

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यूपीटीयू की हुई भारी किरकिरी

UPTU relieves registrar for awarding irregular affiliations

कुलपति ने इस मामले को तब पकड़ा जब संबद्धता कमेटी के सामने रिपोर्ट रखी गई थी। इस प्रकरण में यूपीटीयू प्रशासन की खासी किरकिरी हुई है।

इसके अलावा उन पर 2014-15 में संबद्धता के लिए फर्जी वेबसाइट बनाकर आवेदन लेने और कुलपति से निर्देश लिए बिना ही बैंक में खाता खोलने का भी आरोप है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया था।

शनिवार को रजिस्ट्रार यूएस तोमर से जांच पूरी होने तक कार्य से अलग रहने के आदेश जारी कर दिए गए।

जानिए, क्या कहते हैं खांडल और तोमर

UPTU relieves registrar for awarding irregular affiliations

विश्वविद्यालय अधिनियम के सेक्शन 13 (4) में स्पष्ट है कि रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे कर्तव्यों का पालन किया जाएगा जो कार्यपरिषद या कुलपति द्वारा अपेक्षित हों। रजिस्ट्रार को उनके कार्यों से विरत कर दिया गया है। वह इस पद पर रहते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जांच पूरी होने तक उनका पद पर बने रहना ठीक नहीं होगा।
डॉ. आरके खांडल कुलपति यूपीटीयू

मुझे रजिस्ट्रार के कार्यों से विरत करने का जो आदेश कुलपति ने जारी किया है वह संवैधानिक व्यवस्था के तहत अवैध है। रजिस्ट्रार की नियुक्ति शासन के द्वारा होती है और वही मुझे पद से हटाने का निर्णय ले सकता है। कुलपति ने जो आदेश जारी किया है मैं उसे मानने में असमर्थ हूं और जब तक शासन मुझे कोई निर्देश नहीं देगा रजिस्ट्रार के सारे कार्य करता रहूंगा।
यूएस तोमर, निवर्तमान रजिस्ट्रार यूपीटीयू

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