बेटी की शादी के नाम पर हुआ था यूपीटीयू में घोटाला
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बेटी की शादी के लिए यूपीटीयू के निलंबित चल रहे रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने गलत तरीके से यूनिवर्सिटी के खाते से 12.50 लाख रुपये निकाले थे।
तोमर ने पहले जीपीएफ से रकम निकालने के लिए वित्त विभाग में आवेदन किया और इसके बाद तत्कालीन वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे से साठगांठ कर विश्वविद्यालय के खाते से भुगतान करवा लिया।
कुलपति प्रो. आरके खांडल की ओर से हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में गत 14 जनवरी को गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने तोमर और चौबे को इस मामले में दोषी करार दिया है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 14 मार्च को विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि तोमर ने चौबे से साठगांठ करके 12.50 लाख रुपये गलत तरीके से यूनिवर्सिटी के खाते से निकलवाए।
यही नहीं चौबे ने फाइल नोट पर भी गलत ढंग से कटिंग की। चौबे ने 12.50 लाख रुपये की अग्रिम राशि को पहले वर्ष 2013-14 में घटाते हुए प्रविष्टि की मगर फिर काट दिया।
इतना ही नहीं अग्रिम राशि को फिर वर्ष 2011-12 की प्रविष्टियों के नीचे घटाते हुए अंकित कर दिया।
जबकि वर्ष 2011-12 में चौबे वहां पर कार्यरत ही नहीं थे। उनका यूपीटीयू में कार्यकाल 4 जनवरी 2013 से लेकर 1 सितंबर 2014 तक था।
ऐसे किया गया ‘खेल’
तोमर ने 18 नवंबर 2013 को बेटी के विवाह के लिए 12.50 लाख रुपये जीपीएफ से निकलवाने के लिए आवेदन किया।
तत्कालीन वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे ने 21 नवंबर को चेक संख्या 372800 से 12.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
यह भुगतान विश्वविद्यालय के कांट्रेक्चुअल वेजेज मद से किया गया। जबकि जीपीएफ के पैसे का ट्रेजरी से भुगतान होता है।
कुलपति ने इस पर पिछले साल 24 जुलाई को वित्त अधिकारी से रिपोर्ट मांगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। 23 सितंबर व 11 नवंबर को भी वित्त विभाग से रिपोर्ट मांगी गई लेकिन वित्त विभाग चुप्पी साधे रहा।