अब यूपीएसएसएससी की भर्ती परीक्षाओं के लीक नहीं हो सकेंगे पेपर, बनी ये व्यवस्था
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उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) अब विभिन्न पदों पर होने वाली भर्तियों की लिखित परीक्षा के लिए एक से अधिक प्रश्नपत्र तैयार कराएगा। भविष्य में यदि कभी पेपर लीक की स्थिति आई तो परीक्षा निरस्त करने के बजाय दूसरे प्रश्नपत्र से परीक्षा करा दी जाएगी।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में एक प्रश्नपत्र के आठ सेट तैयार कराए जाते हैं। इन सभी सेट में प्रश्नपत्र तो एक ही होता है, लेकिन प्रश्नों के क्रम बदले होते हैं। एक ही प्रश्नपत्र होने की वजह से पेपर लीक होने पर परीक्षा निरस्त करने के सिवा कोई विकल्प नहीं रहता है।
आयोग ने तय किया है कि अब सभी लिखित परीक्षाओं के लिए एक से अधिक प्रश्नपत्र छपाए जाएंगे। इनकी संख्या दो या इससे भी अधिक हो सकती है। इन्हें अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस से छपाने का विकल्प रहेगा। सभी प्रश्नपत्रों के अलग-अलग सेट पहले की तरह बनेंगे। एक से अधिक प्रश्नपत्रों को परीक्षा के लिए भेजा जाएगा।
ये प्रश्नपत्र ट्रेजरी के डबल लॉक में रखे जाएंगे। इनमें कौन-सा प्रश्नपत्र परीक्षा में प्रयोग होगा, यह ट्रेजरी से प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र भेजने के समय बताया जाएगा। ट्रेजरी से प्रश्नपत्र मजिस्ट्रेट लेकर जाएंगे और केंद्राध्यक्ष को उपलब्ध कराएंगे।
मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही प्रश्नपत्र का पैकेट परीक्षा में प्रयोग के लिए खोला जाएगा। यदि परीक्षा से पहले कोई एक प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई तो तत्काल दूसरे प्रश्नपत्र से परीक्षा संपन्न करा दी जाएगी। आयोग ने पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं संपन्न कराने के लिए कई अन्य कदम भी उठाने का फैसला किया है।
एक जैसे पदों के लिए समान अर्हता का सुझाव
आयोग ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रियागत विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। मसलन, सेवा नियमावलियों में समान पदों के लिए समान अर्हताएं होनी चाहिए।
अधिकारी ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी पद के लिए लिखित परीक्षा के अलावा लंबी कूद, दौड़ व साइक्लिंग शामिल है, जबकि इसी ग्रेड पे व अर्हता वाली ग्राम पंचायत अधिकारी, वीडीओ समाज कल्याण आदि पदों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
इन सभी की अर्हता एक समान तय की जा सकती है। इससे इन सभी विभागों की रिक्तियों से जुड़ी भर्ती एक साथ की जा सकेगी। ‘अमर उजाला’ इस गंभीर विसंगति को पूर्व में उठा चुका है। आयोग ने अब इसका संज्ञान ले लिया है।
डिग्री-डिप्लोमा की समकक्षता भी स्पष्ट की जाए
विभाग पदों के लिए अर्हता तय करते समय डिग्री या डिप्लोमा के साथ समकक्ष लिख देते हैं, मगर यह नहीं बताते कि किन-किन संस्थाओं द्वारा जारी डिग्री या डिप्लोमा प्रमाणपत्र समकक्ष होंगे। इसका असर ये हुआ कि सीसीसी प्रमाणपत्र की योग्यता होने के बावजूद बीटेक व एमटेक उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन करने लगे। आयोग का कहना है कि इन सुझावों पर अमल से भर्ती प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी।