Lucknow News: महापौर और नगर आयुक्त में फिर तनातनी, हंगामे और धरने के साथ बैठक स्थगित; रखी गई ये शर्त
महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच एक बार फिर तनातनी देखने को मिली। हंगामे और धरना-प्रदर्शन के साथ बैठक स्थगित कर दी गई। इस दौरान कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। पास प्रस्तावों पर अमल न होने पर दोनों तरफ से टकराव हुआ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर चल रही तनातनी के चलते नगर निगम कार्यकारिणी एक और बैठक बेनतीजा रही। बैठक में आरोप-प्रत्यारोप के बीच पार्षदों ने पूर्व की कार्यकारिणी बैठकों में पास हुए प्रस्तावों पर अमल न होने का आरोप लगाते हुए बैठक में धरना दिया और हंगामा किया।
इसके बाद महापौर ने यह कहते हुए बैठक स्थगित कर दी कि अब बैठक तभी बुलाई जाएगी, जब नगर आयुक्त खुद यह बताएंगे कि पास प्रस्तावों पर अमल हो गया और अब बैठक बुलाई जाए। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और हंगामा-विवाद के बीच बिना किसी नतीजे पर पहुंचे करीब 12 बजे स्थगित कर दी गई।
इस दौरान किसी प्रस्ताव पर न तो चर्चा हुई न ही पास किया गया। बैठक में सिर्फ पुरानी बैठक में पास हुए प्रस्तावों पर अमल का विवाद पिछली बार की तरह छाया रहा। महापौर ने जब इसको लेकर बैठक में अफसरों से जानकारी मांगी तो उन्होंने इसके लिए और समय देने की मांग रखी। इसको लेकर दोनों तरफ तनातनी रही। बैठक बिना किसी नतीजे पर पहुंचे ही स्थगित हो गई।
महापौर बोलीं- ये जन प्रतिनिधियों और जनता दोनों का अपमान...
भाजपा पार्षद पृथ्वी गुप्ता और अरुण राय ने बैठक के बीच निगम प्रशासन के खिलाफ धरना दिया। बैठक के बाद महापौर ने नगर निगम अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि पिछले दो साल में कार्यकारिणी में पास किए काफी प्रस्तावों पर अफसरों ने अमल नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण है, बल्कि चुने गए प्रतिनिधियों और लखनऊ की जनता दोनों का अपमान है।
महापौर ने कहा कि चाहे मामला शहर की सफाई व्यवस्था का हो, मार्ग प्रकाश का, मृतक आश्रितों के अधिकारों का, जलभराव, टूटी सड़कों या नगर निगम की भूमियों पर अवैध कब्जों का, हर स्तर पर प्रशासन की कार्यशैली निराशाजनक रही है।
चपरासी और डाक से बजट की कापी भेजने पर भड़कीं महापौर
महापौर ने कहा कि सबसे गंभीर लापरवाही पुनरीक्षित बजट के मामले में देखने को मिली है। उनके पास पुनरीक्षित बजट की प्रति पहले एक चपरासी के जरिए भेजी गई। जब उसे लौटा दिया गया तो उसे डाक से भेज दिया गया। यह तरीका महापौर को अपमानित करने वाला है।
बजट को लेकर पहले अफसरों को उनसे चर्चा करनी चाहिए थी। पहले अफसर महापौर के आवास पर जाकर बजट पर चर्चा करते थे। खुद उसकी प्रति देने जाते थे। इस बार ऐसा नहीं किया गया। बजट एक गोपनीय और महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। बजट को लेकर इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।