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UP: विधानसभा में मुस्लिम आरक्षण पर हंगामा; बोले-भीख नहीं चाहिए; योगी ने कहा- इनके पास कालिख मिटाने का मौका था

Thu, 30 Apr 2026 08:54 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 30 Apr 2026 08:54 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण और मुस्लिम आरक्षण को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप चले। एक पक्ष ने आरक्षण के नाम पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, जबकि दूसरे ने अधिकारों की मांग उठाई। 

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UP Uproar over Muslim reservation in the Assembly; members declare, "We don't want alms"; Yogi remarks, "They
विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

विधान परिषद में विपक्ष ने महिला बिल पर पलटवार किया। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण का नाम देकर भाजपा गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि जब 33 फीसदी महिला आरक्षण वर्ष 2023 में सदन से पारित हो गया जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकृति दे दी। 16 अप्रैल 2026 को एक्ट भी बन गया। अब कह रहे हैं कि सपा विरोध कर रही है।

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लाल बिहारी ने कहा कि विपक्ष ने सत्ता पक्ष के साथ मिलकर महिला बिल को पारित कराया तो क्या 33 फीसदी आरक्षण भाजपा ने लागू किया। उन्होंने कहा कि ये परिसीमन विधेयक है, जिसे भाजपा महिला बिल का नाम दे रही है।
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उन्होंने कहा कि 33 फीसदी आरक्षण में पिछड़ी, दलित और मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह को धन्यवाद दीजिए, जिनके फैसलों की वजह से आज पंचायतों और प्रधानों में महिलाओं को जगह मिली है।
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ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधेयक गिराने का विरोध करते हुए कहा कि इसे पारित न करने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि आजादी के समय आबादी 33 करोड़ थी। आज 140 करोड़ है लेकिन संसद और विधान सभा और विधान परिषद में सीटें नहीं बढ़ीं।

राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि भाजपा के मंत्री जर्मन तानाशाह हिटलर के प्रचार मंत्री गार्बल्स की तरह काम कर रहे हैं। वर्ष 2026 का बिल परिसीमन का है और सरकार संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। 

उन्होंने कहा कि यूपी में रोज दुष्कर्म हो रहे हैं। महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने कभी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया। उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा कि आरएसएस का प्रस्ताव ले आए और सभी उसे पढ़ रहे हैं। इस पर जमकर हंगामा हुआ। फिर बोले कि वर्ष 2027 में विपक्ष में आ जाएंगे तो चूं भी नहीं कर पाएंगे।

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विधानसभा सदन में सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

नारियां सबकुछ भूल सकती हैं लेकिन अपमान नहीं

महिला बिल का विरोध करने पर विधान परिषद में महिला सदस्यों ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। सदस्य डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि जब बिल पेश किया गया तो उम्मीद नहीं थी कि ये पारित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं विपक्ष के इस कृत्य तो कभी माफ नहीं करेंगी क्योंकि नारी सबकुछ भूल सकती है लेकिन अपमान नहीं भूलती। 

विपक्ष से सवाल किया कि आप लोग क्या मुंह लेकर चुनाव में जाएंगे। विपक्ष पर महिला अधिकारों की भ्रूण हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि वे परिवारवादी हैं और उन्हें डर है कि बाहर की महिलाएं सदन पहुंच जाएंगी।

आरोप लगाया कि पवित्र यज्ञरूपी बिल में विपक्ष ने हड्डियां डाली हैं, जिसपर देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। वंदना वर्मा ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल शब्दों की व्याख्या से न करें बल्कि व्यवस्था में भी दिखाई देना चाहिए। रमा रंजन ने विपक्ष के इस कृत्य की निंदा की।

विपक्ष ने महिलाओं के हक व आकांक्षा को भी गिराया

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने विधान परिषद में कहा कि 16-17 अप्रैल को लोकसभा में सपा-कांग्रेस ने महिला बिल का विरोध करके देश के सामने अपनी सोच बता दी। इनका दोहरा चरित्र पूरा देश देख रहा था। इन्होंने न सिर्फ बिल गिराया बल्कि महिलाओं के न्याय, हक व उनकी आकांक्षाओं को भी गिराने का काम किया है। महिलाएं पूछ रहीं हैं कि क्या वे सक्षम नहीं हैं? पहले मुगलों और अब सपा-कांग्रेस ने महिलाओं के हक को कमजोर करने का काम किया है।

हमें भीख नहीं अधिकार चाहिए 

ग्राम विकास विभाग की राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि देशभर की महिलाओं ने 17 अप्रैल का काला दिन देखा है। महिलाओं के प्रति विपक्ष में कोई संवेदना नहीं है। नेता विपक्ष राहुल गांधी तो सदन में जादूगर की कहानी सुना रहे थे।

यह लोग महिला बिल गिराकर खुशी मना रहे थे। हमें भीख नहीं अधिकार चाहिए। महिलाएं अगले चुनाव में वोट की ताकत से इसका जवाब देंगी। पीडीए की बात करने वाले विपक्ष की सोच महिला विरोधी है। असली पीडीए तो इधर है।

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विधानसभा के बाहर सपा का हंगामा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

संसद जाएंगी तो अपनी बात रख सकेंगी महिलाएं 

महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि महिलाएं संसद जाएंगी तो अपनी बात खुद रख सकेंगी। जनगणना शुरू हो चुकी है। परिसीमन से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। इसमें विपक्ष का कोई नुकसान नहीं था। उन्होंने कहा कि आधी आबादी की कोई जाति नहीं होती, चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान। सपा सदस्यों से कहा कि महिलाएं आने वाले समय में वोट के अधिकार से उन्हें जवाब देंगी।

सपा व कांग्रेस गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग

विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस जैसे दल जन्मजात महिला विरोधी हैं। ये गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। जब भी सपा को प्रदेश में सत्ता मिली, महिलाओं पर अत्याचार और क्रूर घटनाओं ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। स्टेट गेस्ट हाउस कांड हो या अन्य महिला संबंधी अत्याचार, इनकी छवि जगजाहिर है। इनके पास कालिख मिटाने का अच्छा अवसर था। 

वे नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक में सहयोग कर अपनी महिला-विरोधी छवि बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने यह मौका भी गंवा दिया। उन्होंने सपा और कांग्रेस के सदस्यों से कहा कि अगर इनमें नैतिक साहस है तो चर्चा में भाग लें और स्पष्ट बताएं कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया? इस विरोध के पीछे उनकी मंशा क्या थी?

अगर उन्हें लगता है कि उनके नेताओं ने गलत किया है तो इनका दायित्व है कि वे माफी मांगें या निंदा प्रस्ताव को पारित करवाकर महिला-विरोधी आचरण की निंदा में भागीदार बनें। उन नेताओं की जरूर निंदा की जानी चाहिए, जिन्होंने आधी आबादी को राजनीतिक सशक्तीकरण और आरक्षण के लाभ से वंचित रखा।
 

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आरक्षण मांग को लेकर प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

शिवपाल बोले- राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर काम करती है भाजपा 

सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि भाजपा हमेशा राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर काम करती है। वह महिला आरक्षण बिल 2023 को लागू करे तो समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि ऊपर से संदेशा आया होगा इसलिए एक दिन का सत्र बुला लिया है। इनका मकसद महिलाओं को अपने पक्ष में लामबंद करना है इसलिए ये झूठ बोल रहे हैं।

प्रदेश की महिलाएं इनकी हर चाल को समझती हैं। अब ये सत्ता से बेदखल होने वाले हैं। घबराहट में गलत फैसले लेना चाहते हैं। इनका एजेंडा सिर्फ एक ही है कि किसी भी तरह झूठ बोलकर महिलाओं को अपने पक्ष में लामबंद किया जाए। उन्होंने कहा कि सपा ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाया है। महिलाओं के हित में तमाम काम किए हैं। भाजपा के लोग सिर्फ दिखावा करते हैं। महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते।

गेस्ट हाउस कांड दिलाया याद

महिला आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। प्रदेश सरकार की महिला मंत्रियों के साथ महिला सदस्यों ने हर कीमत पर आरक्षण हासिल करने की बात कही। साथ ही सपा सदस्यों को स्टेट गेस्ट कांड याद दिलाते हुए महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। वहीं विपक्ष की महिला सदस्यों ने भाजपा पर नारी वंदन अधिनियम के बहाने परिसीमन कराने और जनगणना से भागने का आरोप जड़ा।

सदन में कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि अब महिलाएं इस विधेयक का पास कराकर ही दम लेंगी। महिलाएं अपने दम पर प्रधान से लेकर सांसद बन रही हैं। केंद्र और यूपी की भाजपा सरकार अधिकतर योजनाएं महिलाओं के नाम पर हैं, यह सपा और कांग्रेस को नजर नहीं आएगा। सभी दलों को मिलकर इस विधेयक को पारित कराना चाहिए। इसमें किसी का नुकसान नहीं है। 

भाजपा सदस्य केतकी सिंह ने कहा कि लोकसभा में विधेयक को पारित नहीं कराने का दिन इमरजेंसी से भी ज्यादा काला दिन बन चुका है। महिलाओं ने विपक्ष का क्रूर चेहरा देख लिया। तीन दशक बीत गए, इस पर फैसला नहीं हुआ।

कुछ राज्यों में तो केवल एक ही महिला विधायक है। उन्होंने सपा को स्टेट गेस्ट हाउस कांड की याद भी दिलाई। मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि पूरे देश की महिलाओं की नजर संसद पर थी, लेकिन वह काला दिन साबित हुआ। 

आधी आबादी विपक्ष को कभी माफ नहीं करेगी। सपा ने मुस्लिम महिलाओं को अलग आरक्षण देने की मांग कर संविधान का अपमान किया है। सपा ने मायावती जैसी सशक्त महिला के साथ गेस्ट हाउस कांड किया, जिसे दुनिया भर ने देखा।

मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि देश भर की महिलाएं विपक्ष के इस रवैये से आक्रोशित हैं। इंडी गठबंधन ने महिलाओं को हमेशा पीछे किया है। इसके अलावा अंजुला माहौर, प्रदीप कुमार, डॉ. आरके वर्मा, सरिता भदौरिया, डॉ. सुरभि, पिंकी यादव ने भी सदन को संबोधित किया।

 

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विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विपक्ष ने किया विरोध

वहीं सपा सदस्य पल्लवी पटेल ने कहा कि विधानसभा का एक और दिन भाजपा की साजिश की भेंट चढ़ गया। दरअसल भाजपा आरक्षण देना ही नहीं चाहती है, तभी परिसीमन और जनगणना को इसमें शामिल किया गया।

नसीम सोलंकी ने कहा कि मेेरे उपचुनाव में महिला कार्यकर्ताओं पर लाठियां चलाई गईं। भाजपा प्रत्याशी के साथ पूरा सिस्टम था। मैं अकेली घर संभालने के साथ चुनाव लड़ रही थी। ऐसे मौकों पर तो महिलाओं को बख्श देना चाहिए। एक आम महिला नेता कैसे बनती है, यह भाजपा ने सिखा दिया। ऐसे ही अत्याचार करेंगे तो बहुत सारी महिलाएं बिना आरक्षण मैदान में आ जाएंगी।

राजभर और प्रधान में तकरार

चर्चा के दौरान मंत्री ओपी राजभर और सपा सदस्य अतुल प्रधान के बीच गाजीपुर की घटना को लेकर जमकर तकरार हुई। राजभर ने कहा कि महिलाओं को माननीय बनाना हमारी जिम्मेदारी है। इनके नेता असत्य बोलते हैं। पीएम मोदी ने दस रुपये की झालमुरी क्या खा ली, इनको बेहोशी आ गई। 

जो घटनाएं यादव बिरादरी के लोग अंजाम देते हैं, वहां इनका प्रतिनिधिमंडल नहीं जाता है। इन लोगों ने मुसलमानों को भी धोखा दिया। वहीं अतुल प्रधान ने पलटवार करते हुए कहा कि राजभर ने पहले पीएम मोदी और सीएम योगी को अपशब्द कहे थे। तीन साल तक सोते रहे और पश्चिम बंगाल का चुनाव आते ही विधेयक याद आने लगा। इनके मातृ संगठन में एक भी महिला नहीं है। एप्सटीन फाइल वाले मंत्री आज भी गद्दी पर हैं।

विपक्ष का सफाया तय

मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि आज महिलाएं सुखोई और राफेल उड़ा रही हैं। सभी धर्मों में महिलाओं का सम्मान करने की बात कही गई है। अगले चुनावों में विधेयक का विरोध करने वालों का महिलाएं पूरी तरह सफाया कर देंगी।

सदन में आमने-सामने हुईं सत्तापक्ष और विपक्ष की महिला विधायक

विधानसभा की कार्रवाई शुरू होने से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष की महिला विधायक आमने-सामने आ गईं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं।
सपा विधायक सुबह महिला आरक्षण के समर्थन में तख्तियां लेकर परिसर पहुंचे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया। सपा विधायकों ने भाजपा सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। इसके बाद वे नारेबाजी करते हुए सदन के अंदर पहुंचे। 

सदन में सपा विधायकों ने तख्तियां लहराईं। यह देख सत्ता पक्ष की महिला विधायकों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी। वे जब-जब चुनाव आता है, विपक्ष बुर्के में छिप जाता है... जैसे नारे लगा रहीं थीं। साथ ही, सत्ता पक्ष ने 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करो... के नारे भी लगाए।

कुछ पल के लिए दोनों तरफ की महिला विधायक वेल में आकर आक्रोश जताने लगीं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्कुराते हुए सदन में पहुंचे। उनके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना पीठ पर आए। उन्होंने राष्ट्रगीत शुरू करने का आदेश दिया। अध्यक्ष ने कहा कि जिनकी श्रद्धा न हो वे नारेबाजी करते रहें, जिससे पूरा सदन शांत हो गया।


 

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