Lucknow News: कथक के भावों में साकार हुई रामायण
नाटिका में श्रीराम-लक्ष्मण के गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने, महर्षि विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार के प्रसंग प्रस्तुत किए गए।
प्रस्तुति की परिकल्पना व निर्देशन डॉ. उपासना दीक्षित ने किया। संगीत संयोजन और तबला वादन आनंद दीक्षित ने किया, जबकि स्वर कृष्ण कुमार मौर्य का रहा। रिकॉर्डिंग में प्रेम कुमार वर्मा ने सहयोग दिया। प्रस्तुति में आरोही पाठक, अनन्या अग्रवाल, आयुष कुमार, अभिनव सिन्हा, कोमल श्री, ऐश्वर्या नाथ, सोनल मिश्रा, अनन्या वर्मा, ईशा राजपूत और पलक सहित डॉ. उपासना दीक्षित ने भाग लिया।
राम-भरत मिलाप ने किया भावुक
महानगर रामलीला में शनिवार को चित्रकूट का राम-भरत मिलाप प्रसंग दर्शकों को भावुक कर गया। लीला की शुरुआत सीता-वनस्त्री और भरत-कैकेयी संवाद से हुई। इसके बाद शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध और रावण द्वारा सीता हरण का मंचन किया गया। इससे पहले समिति के संरक्षक वीके जोशी, अध्यक्ष ललित मोहन जोशी, वरिष्ठ पदाधिकारी गिरीश जोशी और संजय पांडे ने मां दुर्गा की आरती कर लीला का शुभारंभ किया। प्रसिद्ध उद्घोषक पंडित नारायण पाठक ने मानस की चौपाइयों के माध्यम से मंचन को प्रभावी बनाया। राम की भूमिका यशी लोहुमी और भरत की भूमिका प्रतिष्ठा शर्मा ने निभाई।
नहीं टूटा रावण का अहंकार, बजरंगबली ने किया लंका दहन
आलमबाग की रेलवे रामलीला में शनिवार को लंका दहन, विभीषण शरणागति और रावण-अंगद संवाद का मंचन हुआ। मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र से हनुमान को बंदी बनाकर रावण के दरबार में पेश किया। हनुमान से शास्त्रार्थ के बाद रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। हनुमान ने इसी आग से लंका जला दी। इस दौरान भव्य आतिशबाजी भी हुई। रावण की कैद से शनि देव को मुक्त कराने का प्रसंग भी दिखाया गया। रावण के अत्याचारों से असहमत विभीषण ने उसका साथ छोड़कर रामदल की शरण ली। वहीं, सीता की वापसी के लिए राम ने अंगद को रावण के दरबार में भेजा लेकिन रावण अहंकार में प्रस्ताव ठुकरा देता है। राम की भूमिका सत्यम यादव, लक्ष्मण की हर्षित सोनकर, सीता की आयुष, हनुमान की मनोज श्रीवास्तव, रावण की वीरेंद्र शर्मा, मेघनाथ की मानस पाठक, विभीषण की जगजीत सिंह और अंगद की भूमिका शिवम यादव ने निभाई।
राम के वनवास से दशरथ ने त्यागे प्राण
सीतापुर रोड योजना कॉलोनी की रामलीला में शनिवार को कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ मरण और चित्रकूट में भरत मिलाप का मंचन हुआ। राम के वनवास और पुत्र वियोग में दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक किया। भरत ने कैकेयी के फैसले का विरोध कर राजगद्दी ठुकराई और राम को वापस लाने चित्रकूट रवाना हुए।
हनुमान ने जलाई सोने की लंका
नगराम की रामलीला में शनिवार को लंका दहन का रोमांचक मंचन हुआ। अशोक वाटिका से निकलने के बाद हनुमान फल खाने के लिए वन में पहुंचते हैं और उत्पात मचाते हैं। राक्षस उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में पेश करते हैं। रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद हनुमान पूरी सोने की लंका में घूम-घूमकर आग लगा देते हैं। विभीषण के घर को छोड़कर सोने की नगरी धधक उठती है। अंत में हनुमान समुद्र में कूदकर अपनी जलती पूंछ की आग बुझाते हैं।

मंच पर रामलीला के प्रसंगों का मंचन करते कलाकार व मौजूद दर्शक।

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