यूपी : आंबेडकर सांस्कृतिक केंद्र के जरिये सियासी संदेश देने की कोशिश, भाजपा के इस कदम से बसपा खेमे में खलबली
राष्ट्रपति के हाथों डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास कराकर भाजपा ने अनुसूचित जाति को सियासी संदेश देने की कोशिश की है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की नजर बसपा के अनुसूचित जाति वोट बैंक पर है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास कराकर भाजपा ने अनुसूचित जाति को सियासी संदेश देने की कोशिश की है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की नजर बसपा के अनुसूचित जाति वोट बैंक पर है।
भाजपा प्रदेश में बसपा की सियासी कमजोरी का फायदा उठाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती है। पार्टी, संगठन और सरकार लगातार कार्यक्रमों और योजनाओं के जरिये अनुसूचित जाति के बीच पैठ बनाने की कोशिश में जुटी है। साथ ही प्रतीकों के सहारे भी पार्टी अनुसूचित जाति के महापुरुषों व लोगों को तवज्जो देने का संकेत दे रही है। मंगलवार को राष्ट्रपति के हाथों राजधानी के ऐशबाग में डॉ. आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास कराया जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस सांस्कृतिक केंद्र में डॉ. आंबेडकर की करीब 25 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जानी है।
सियासी जानकारों मानें तो राजधानी में राष्ट्रपति के हाथों आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास अनुसूचित जाति के वोटरों को अपने पाले में खड़ा करने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा अनुसूचित जाति के लोगों के बीच लगातार किसी न किसी तरह उनके हितैषी होने और अनुसूचित जाति के महापुरुषों के सम्मान का संदेश देने का अभियान छेड़े हुए है। आंबेडकर सांस्कृतिक केंद्र अनुसूचित जाति वोट बैंक को आकर्षित करने के लिए भाजपा का एक अहम कदम माना जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती अपने शासनकाल में लखनऊ से लेकर नोएडा तक डॉ. आंबेडकर के नाम पर कई भव्य स्मारक व पार्क बनवा चुकी हैं।
मायावती जैसा ही दांव
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनुसूचित जाति के लोगों को लुभाने के लिए अब भाजपा ने भी मायावती जैसा दांव चला है। भाजपा को चुनाव में इसका कितना फायदा होगा यह तो बाद में ही पता चलेगा, लेकिन इतना तो है कि उसके इस दांव ने बसपा खेमे में खलबली जरूर मचा दी है। मायावती की प्रतिक्रिया इसका प्रमाण है। जिन्होंने भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए इसे नाटकबाजी और छलावा बता दिया। मायावती ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर व उनके करोड़ों शोषित-पीड़ित अनुयाइयों की उपेक्षा व उत्पीड़न करते रहने के बाद अब विधानसभा चुनाव नजदीक देख यूपी की भाजपा सरकार का बाबा साहेब के नाम पर सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास कराना, यह सब नाटकबाजी नहीं तो और क्या है?
प्रतीकों की सियासत
प्रतीकों की सियासत प्रदेश की राजनीति का अहम हिस्सा रही हैं। लंबे समय से सियासी दल अलग-अलग महापुरुषों के नाम, काम और मूर्तियों के सहारे ही संबंधित धर्म, जाति और वर्ग को जोड़ने का प्रयास करते हैं। अनुसूूचित जाति के बीच पैठ बनाने के लिए भाजपा डॉ. आंबेडकर को प्रतीक बनाकर संदेश देने में जुटी है। इतना ही नहीं अनुसूचित जाति के लोगों के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की योजनाओं के सहारे भी भाजपा इस वर्ग के लोगों के बीच पकड़ व पहुंच बनाने में जुटी है। इसके लिए पार्टी के अनुसूचित जाति के नेताओं को ही आगे किया गया है। यह बताने की कोशिश की जा रही है कि केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प के साथ गरीबों, वंचितों, शोषितों, अनुसूचित जाति के लोगों के जीवन को आर्थिक व सामाजिक स्तर पर ऊंचा उठाने के लिए लगातार काम कर रही है। भाजपा अपनी इस मुहिम में कितना कामयाब होती है यह चुनाव नतीजे ही बताएंगे।