UP: लाइसेंसी हथियारों का सियासी खेल, दबदबा और दहशत के लिए तैयार की शस्त्रों की खेप; हाईकोर्ट ने तलब की कुंडली
प्रदेश में कई बाहुबली, माफिया और उनके करीबी लाइसेंसी शस्त्रों का इस्तेमाल दबदबा बनाए रखने के लिए कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने कई नेताओं और बाहुबलियों का आपराधिक रिकॉर्ड तलब किया है। सरकार के अनुसार छह हजार से अधिक लाइसेंसधारकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसके बाद सत्यापन प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
विस्तार
प्रदेश के कई बाहुबली, उनके करीबी-रिश्तेदार और कुछ माफिया ने लाइसेंसी शस्त्रों की खेप ले रखी है। ये सिर्फ इसलिए जिससे उनका दबदबा कायम रहे और उनकी दहशत रहे। इसको वह अपने मान सम्मान से भी जोड़ते हैं। जान का खतरा बताकर तमाम आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद एक व उससे अधिक लाइसेंसी शस्त्र ले रखे हैं।
दरअसल हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह और राजा भइया समेत कई की आपराधिक कुंडली तलब की है। सरकार की तरफ से दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया है कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, इसमें से 6062 दागी हैं।
नागालैंड में फर्जीवाड़ा कर लाइसेंस बनवाया
मतलब इन पर आपराधिक केस दर्ज हैं। इसके बावजूद उनको लाइसेंस मिले हैं। हकीकत में शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए अधिकतर लोग लाइसेंसी शस्त्र लेते हैं। इसमें बाहुबली और माफिया की संख्या भी काफी अधिक है। करीब दो साल पहले एक विधायक के रिश्तेदार पर केस भी दर्ज किया गया है। उसने नागालैंड में फर्जीवाड़ा कर लाइसेंस बनवाया था।
फिर उस लाइसेंस को लखनऊ स्थित मुख्तार अंसारी के पते पर फर्जी तरीके से ट्रांसफर भी करवा लिया था। मामले में एसटीएफ ने जांच की थी लेकिन प्रशासन ने तफ्तीश से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे, लिहाजा गहनता से छानबीन नहीं हो सकी थी। एसटीएफ ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसी तरह के कई और भी मामले हैं।
बीते कुछ महीने पहले एक सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो शस्त्र पूजा का था। जिसमें दर्जनों लाइसेंसी शस्त्र दिख रहे थे। जांच भी हुई थी। जिसमें सामने आया था कि बाहुबली, उनके रिश्तेदार व उनके करीबियों के शस्त्र उसमें शामिल हैं। लेकिन इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लाइसेंसी असलहों की खेप की खेप लोगों ने लगा रखी है।
तब 12.50 लाख से अधिक थे लाइसेंस
वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद लाइसेंस नियमावली में बदलाव किया गया था। उस दौरान प्रदेश में 12.50 लाख से अधिक लाइसेंसी शस्त्र थे। दो से अधिक जिनके पास लाइसेंसी शस्त्र थे उनको जमा कराया गया था। इसलिए वह संख्या कम हुई। वहीं लाइसेंस निरस्त भी किए गए। इसमें तकरीबन 500 लाइसेंस माफिया, बाहुबलियों व उनके रिश्तेदारों व करीबियों के थे। अब जब कोर्ट ने सख्त रुक अपनाया है तो एक बार फिर लाइसेंसी शस्त्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई है।