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यूपी : समीकरण दुरुस्त करने के बाद ही जिला पंचायत अध्यक्ष, सरकार जल्दबाजी में नहीं

Tue, 11 May 2021 11:45 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 11 May 2021 11:45 PM IST
सार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिलने की वजह से प्रदेश सरकार जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख चुनाव में कोई जल्दबाजी दिखाने को तैयार नहीं है।

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UP: The government has enough time for the election of Zilla Panchayat and Kshetra Panchayat President
पंचायत चुनाव मतगणना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिलने की वजह से प्रदेश सरकार जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख चुनाव में कोई जल्दबाजी दिखाने को तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि कोविड महामारी महज बहाना है, सत्ताधारी दल जब बागियों व निर्दलीयों को अपने पाले में लाकर चुनावी समीकरण साध लेगा, उसके बाद ही सरकार चुनाव कराने का एलान करेगी। वैसे भी, जिपं अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख चुनाव कराने के लिए सरकार के पास अभी काफी वक्त है।

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प्रदेश में निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 12 जनवरी व ब्लॉक प्रमुख का 21 मार्च को को समाप्त हुआ था। कोरोना संक्रमण के चलते समय पर चुनाव न होने के कारण सरकार ने जिपं अध्यक्षों के पद पर डीएम को प्रशासक नियुक्त कर चुनाव की अवधि को छह माह बढ़ा दिया था। जिपं के लिए यह अवधि 12 जुलाई जबकि ब्लॉक प्रमुख के लिए 21 सितंबर तक है। ऐसे में सरकार के पास चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय है। राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एस.के. सिंह का कहना है कि महामारी की स्थिति में सरकार चाहे तो नियमावली में संशोधन कर इस अवधि को आगे भी बढ़ा सकती है।
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तत्काल चुनाव पर नुकसान की आशंका
जानकार बताते हैं कि पंचायत चुनाव में आम लोगों की सरकार के प्रति नाराजगी व संगठन के ढोल की पोल उभर आई है। हालात ये हैं कि तत्काल चुनाव कराने पर सत्ताधारी दल के  20-25 जिलों तक सिमटने का खतरा बना हुआ है। इससे विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी पार्टी को मनोवैज्ञानिक तौर पर नुकसान की आशंका सता रही है। सत्ताधारी दल 60-65 जिलों की कुर्सी पाने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें संगठन से सरकार के मंत्रियों तक को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। संभवत: इसी वजह से चुनाव को टाला जा रहा है।
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चुनाव टालने को लेकर भी निशाने पर
सत्तारूढ़ दल पर यह कहकर भी निशाना साधा जा रहा है कि लाखों लोगों के  प्रत्यक्ष भागीदारी वाले चुनाव संपन्न करा लिए गए, जबकि ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव तो अप्रत्यक्ष रूप से गिनती के सदस्यों द्वारा किया जाना है। इस चुनाव में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने में भी खास दिक्कत नहीं आनी है। ऐसे में इस चुनाव को टालने के पीछे परिस्थितीय कारण की जगह राजनीतिक कारण ही माना जा रहा है। जिला व क्षेत्र पंचायतों के गठन की समयावधि बाकी होने से यह रणनीति और भी आसान हो गई है। 

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