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UP: घातक मांझे पर रोक के लिए बनेगा सख्त कानून, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

Tue, 19 May 2026 11:06 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 19 May 2026 11:06 PM IST
सार

अधिवक्ता एसएमएच रिजवी ने कहा था कि चीनी मांझे के खिलाफ अभियान की आड़ में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि केवल अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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UP: Strict law to ban deadly manjha, victims to get compensation
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बताया है कि कांच के कणों से युक्त घातक चीनी मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए जल्द ही सख्त कानून लाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि नए कानून में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया जाएगा। प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग निषेध) अधिनियम रखा जा सकता है।

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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पुलिस अधिनियम में आवश्यक संशोधन पर भी विचार चल रहा है। यह जानकारी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई। राज्य सरकार की दलीलों पर गौर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित अधिनियम पर विचार-विमर्श में तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई से पहले इसे ठोस रूप दिया जाए।
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11 मई को हुई पिछली सुनवाई में पतंग और पारंपरिक सामग्री के व्यापारियों की ओर से हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता एसएमएच रिजवी ने कहा था कि चीनी मांझे के खिलाफ अभियान की आड़ में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि केवल अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पतंग और उससे संबंधित सामान बेचने वाले व्यापारियों को निरीक्षण और जांच में प्रशासन का सहयोग करना होगा।

पतंगबाजी के क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रत्येक शहर में उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाए जहां पतंगबाजी अधिक होती है। अदालत के अनुसार, ऐसे इलाकों में मांझे की बिक्री भी ज्यादा होने की संभावना रहती है, जिससे अवैध मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर निगरानी रखना आसान होगा। पीठ ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

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