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यूपी: फर्जी फास्टैग मामले में एसटीएफ का इटौंजा टोल प्लाजा पर छापा, सर्वर-डीवीआर जब्त, सात महीने पहले खुला खेल

Tue, 22 Sep 2026 09:24 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 22 Sep 2026 09:24 PM IST
सार

मामले में एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की शिकायत पर सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में मामले की विवेचना एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई। तभी से एसटीएफ इस मामले की जांच कर रही थी।

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UP: STF raids Itaunja toll plaza in fake FASTag case; server and DVR seized.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

फर्जी फास्टैग और वाहन नंबर के सहारे टोल चोरी और चालान से बचने के मामले की जांच में एसटीएफ ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। एसटीएफ ने लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे के इटौंजा टोल प्लाजा पर छापा मारकर सर्वर, सीसीटीवी के डीवीआर समेत टोल से जुड़े तमाम दस्तावेज जब्त कर लिए। कार्रवाई के बाद टोल का सर्वर उपलब्ध नहीं होने से वहां टोल वसूली बंद हो गई। टोल का संचालन लखनऊ सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड के पास है। जांच की जद में कंपनी के कई अधिकारी और कर्मचारी भी हैं। 

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एसटीएफ की यह कार्रवाई सोमवार को फर्जी फास्टैग के जरिए टोल और ऑनलाइन चालान से बचने वाले गिरोह के एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हुई है। सीतापुर निवासी मुनीश को गिरफ्तार किया गया था। उसके साथी रियाज और सिराज की तलाश जारी है।
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सात महीने पहले दर्ज हुई थी एफआईआर
फर्जी फास्टैग के इस खेल का मामला करीब सात महीने पहले सामने आया था। एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की शिकायत पर सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में मामले की विवेचना एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई। तभी से एसटीएफ इस मामले की जांच कर रही थी।
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एसटीएफ को रिकॉर्ड नहीं दे रही थी कंपनी 
जांच के दौरान एसटीएफ ने टोल संचालन करने वाली कंपनी से टोल से संबंधित रिकॉर्ड कई बार मांगा। इसमें फास्टैग से जुड़े लेन-देन और वाहनों की आवाजाही समेत जांच के लिए जरूरी रिकॉर्ड शामिल थे। एसटीएफ के मुताबिक कंपनी की ओर से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। रिकॉर्ड नहीं मिलने पर एसटीएफ ने अदालत का रुख किया। कोर्ट से वारंट लेने के बाद मंगलवार को टीम टोल प्लाजा पहुंची। यहां जांच टीम ने टोल से जुड़े सर्वर को अपने कब्जे में लिया। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग वाला डीवीआर और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए। रिकॉर्ड ना देने के पीछे ख़ुद को बचाने की साजिश की आशंका है। 

सर्वर गया तो बंद हो गई टोल वसूली

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद टोल प्लाजा का सर्वर उसके पास नहीं रहा। इसके चलते टोल वसूली की प्रक्रिया ठप हो गई। एसटीएफ जब्त किए गए सर्वर और डीवीआर की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फर्जी फास्टैग वाले वाहनों ने कितनी बार टोल पार किया और इस खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे।

एक फास्टैग, दो नंबर का खेल
जांच में सामने आया था कि गिरोह असली वाहन के बजाय दूसरे वाहन के नंबर पर फास्टैग बनवाता था। चेकिंग के दौरान भी उसी फर्जी नंबर की पर्ची दिखाई जाती थी। ऑनलाइन चालान होने पर वह दूसरे वाहन के नाम दर्ज हो जाता था। इस तरह टोल चोरी के साथ कार्रवाई से बचने का रास्ता भी तैयार किया गया था।

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