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UP: बिना सहमति उपभोक्ताओं के घरों में लगा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर, तेज चलने की लगातार आ रहीं शिकायतें

Sat, 09 Aug 2025 09:32 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 09 Aug 2025 09:32 AM IST
सार

उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया है और अधिनियम का उल्लंघन रोकने की मांग की है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को मीटर चुनने का अधिकार है। 
 

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UP: Smart prepaid meters are being installed in consumers' homes without their consent
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के तमाम उपभोक्ताओं के घर में लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर को बिना उनकी सहमति के प्री पेमेंट (पहले भुगतान) मोड में बदला जा रहा है। यह विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर आपत्ति जताई है। उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करके हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को मीटर चुनने का अधिकार है। उन्हें यह भी अधिकार है कि वे प्री पेमेंट (पहले भुगतान) अथवा पोस्ट पेमेंट (बाद में भुगतान) मोड का विकल्प चुनेंगे। इसी तरह ऊर्जा मंत्रालय की ओर से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले कुल उपभोक्ताओं में पांच फीसदी के यहां चेक मीटर लगाना अनिवार्य किया है। इसके बाद भी विद्युत निगमों द्वारा इन नियमों की अनदेखी की जा रही है। जहां चेक मीटर लगे हैं, वहां भी मिलान नहीं किया जा रहा है।
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प्रदेश में लगभग 32 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं। एक अगस्त 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2.54 लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्री पेमेंट मोड में बदला जा चुका है। उनकी जमा सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) को मीटर में रिचार्ज कर दिया गया है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में बदलते समय किसी भी उपभोक्ता से सहमति नहीं ली गई। जहां पांच फीसदी पुराने मीटर को चेक मीटर के रूप में स्थापित किया गया है उनका भी मिलान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की विश्वसनीयता सत्यापित नहीं हो पा रही है।

तमाम उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर के तेज चलने की लगातार शिकायत कर रहे हैं। इसी वजह से मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में भार जंप होने पर सॉफ्टवेयर में बदलाव भी किया गया है। जो मीटर की कमियों को अपने आप सत्यापित कर रहा है। परिषद अध्यक्ष ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से विद्युत अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।

निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने निकाली तिरंगा यात्रा

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में तिरंगा यात्रा निकाली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि विजन डॉक्यूमेंट 2047 में बिजली अहम है। इसलिए इसे सार्वजनिक क्षेत्र में रखा जाए। बिजली कर्मी शुक्रवार को कॉर्पोरेट घरानों-सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो अभियान शुरू किया। इसके तहत सभी जिलों में तिरंगा यात्रा निकाली गई। लखनऊ रेजीडेंसी में बिजली कर्मियों की सभा हुई। यहां से बिजली कर्मी तिरंगा लेकर काकोरी क्रांति के अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे। यहां हुई सभा के बाद बिजली कर्मी अमर शहीदों के नारे लगाते हुए रैली के रूप में शहीद स्मारक तक गए। बिजली कर्मियों ने कहा कि आठ वर्षों में हानियां 41 फीसदी से घटकर 15 फीसदी तक आ गई हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 15 अगस्त तक सभी जिलों में रैली निकाली जाएगी और शहीदों को याद किया जाएगा।

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