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यूपी: सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी लखनऊ अग्निकांड की एसआईटी जांच रिपोर्ट, आग लगने से गई थी 15 की जान

Mon, 21 Sep 2026 07:44 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 21 Sep 2026 07:44 PM IST
सार

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में एसआईटी जांच रिपोर्ट मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका से जुड़े निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले में एसआईटी रिपोर्ट तलब कर चुका है।

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UP SIT probe report on Lucknow fire tragedy to be submitted to Supreme Court; 15 lives were lost in the build
लखनऊ अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अलीगंज अग्निकांड मामले की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में है। इसमें अग्निकांड मामले को लेकर कराई गई एसआईटी जांच की रिपोर्ट भी वहां पर रखी जाएगी। अगस्त में हुई पहली सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने एसआईटी जांच की रिपेार्ट मांगी थी। 

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रिपोर्ट का सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि एसआईटी जांच में कौन अफसर, इंजीनियर दोषी पाए गए हैं यह अब तक सामने नहीं आया है। कुल मिलाकर रिपोर्ट के बारे में शासन की ओर से अब तक कोई जानकारी साझा नहीं की गई थी।
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बीती 22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी में आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की जान गई थी। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की टीम पांच सितंबर को शहर में सर्वे को आई थी। टीम छह सितंबर को वापस चली गई थी। इस दौरान टीम ने अलीगंज की चिन्हित 51 अवैध इमारतों के अलावा गोमती नगर इलाके की इमारतों को भी मौके पर जाकर देखा था। 
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टीम ने यहां पर जो देखा है उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट दी। उसी के आधार पर अब सुनवाई होगी। अलीगंज मामले की यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार केस के साथ ही चल रही है। करीब एक महीने पहले दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी हॉस्टल की पांच मंजिला इमारत ढहने से बाद कई छात्रों की मौत हुई है। अब इस मामले के साथ ही पहले से चल रही जनहित याचिका लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार को जोड़ दिया गया है।

 

 

अलीगंज अग्निकांड में की जांच में यह पाए गए थे दोषी

अलीगंज में जिस अवैध बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई थी। उस समय एलडीए की हुई प्रारंभिक जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ ही प्रवर्तन जोन चार में तैनात रहे 05 जोनल अफसरों 06 सहायक अभियंताओं एवं 06 अवर अभियंताओं की लापरवाही पाई गई थी। 

अधिशासी अभियंता अवनींद्र सिंह, बीपी मौर्या, पीसी पांडेय एवं आनंद मिश्रा व सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आरएस सिंह, अनिल कुमार एवं संजय शुक्ला तथा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पांडेय, अंबरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला एवं हेमंत कुमार आदि शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि इस मामले में उस समय संजय शुक्ला व प्रमोद पांडेय सहित कई इंजीनियर हाईकोर्ट से निलंबन के खिलाफ स्थगन आदेश पा गए हैं।

 

 

इसलिए हुई थी कार्रवाई

हादसे के बाद जांच में यह सामने आया था कि बिल्डिंग का मानचित्र आवासीय में पास कराया गया था और उसका निर्माण कॉमर्शियल किया गया था। इसके साथ यही भी सामने आया था कि अवैध निर्माण को लेकर निर्माण ध्वस्तीकरण का आदेश 2016 में निरस्त कर दिया गया था।

इसकी जांच हुई तो यह सामने आया तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने आदेश को निरस्त किया था। जांच में यह भी समने आया था कि जब ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त किया गया था उस समय बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ था और प्लिंथ एरिया तक ही हुआ था। 

इसको आधार बनाते हुए विहित प्राधिकारी ने ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त किया था और प्लॉट मालिक ने यह शपथ पत्र भी दिया था कि वह आवासीय निर्माण कर रहा है। इसी आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश वापस लिया गया था लेकिन उसके बाद एलडीए के जिम्मेदारों ने पलट कर यह देखने की जरूरत नहीं समझी कि मौके पर निर्माण मानचित्र के अनुरूप आवासीय ही हो रहा है या जैसी आशंका थी उसी तरह कॉमर्शियल हो रहा है।

हैरानी की बात यह है बेसमेंट के अलावा तीन मंजिला बिल्डिंग बन गई और उसका व्यावसायिक उपयेाग शुरू हो गया मगर एलडीए की ओर से किसी इंजीनियर या अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की थी और आग की घटना के बाद यह भ्रष्टाचार सामने आया था।

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