UP: प्रदेश में सात लाख के पार हुई स्वगणना, फॉर्म भरने में यह जिला रहा सबसे आगे; राजधानी 47वें स्थान पर
Census in UP: यूपी में जनगणना प्रक्रिया के तहत स्वगणना तेजी से चल रही है। इसके लिए जो फॉर्म भरे जा रहे हैं उनमें प्रदेश का सोनभद्र जिला सबसे ऊपर रहा है।
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जनगणना-2027 के तहत अब तक स्वगणना फॉर्म भरने की संख्या सात लाख पार हो गई है। सोनभद्र जिला शीर्ष पर हैं। यहां पर अब तक सबसे अधिक फॉर्म भरे जा चुके हैं। लखनऊ काफी पीछे है।
सात मई से स्वगणना की प्रक्रिया शुरू हुई है। जो 21 मई तक चलेगी। परिवार के मुखिया को खुद ही पोर्टल पर फॉर्म भरकर सबमिट करना है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक 7.16 लाख फॉर्म भरे जा चुके हैं। सोनभद्र जिला अव्वल है। यहां पर सवा लाख फॉर्म भरे जा चुके हैं।
दूसरे नंबर पर आजमगढ़ है, जहां पचास हजार लोगों ने फॉर्म भरे गए। वहीं 38 हजार फॉर्म बरेली में भरे गए हैं, जो तीसरे स्थान पर है। लखनऊ में अब तक सिर्फ 17 हजार 108 फॉर्म ही भरे गए हैं। इसलिए वह पूरे प्रदेश में 47 नवंबर पर है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि स्वगणना की प्रक्रिया में हिस्सा लें।
28 हजार करोड़ से जल जीवन मिशन को रफ्तार
प्रदेश में जल जीवन मिशन को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बड़ा बजट तय किया है। करीब 28 हजार करोड़ रुपये से ग्रामीण इलाकों के अधूरे पेयजल कार्य पूरे होंगे। दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य है।
अब तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया है। प्रदेश सरकार वर्ष 2026-27 में ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये देगी। सरकार का लक्ष्य 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचाना है। प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता विभाग के बीच समझौता हो चुका है। यह समझौता जल जीवन मिशन 2.0 के लिए हुआ है। इसके तहत योजना की समय सीमा दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई है।
नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव व कार्यकारी निदेशक प्रभास कुमार ने जानकारी दी। मिशन 2.0 में जल गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड में पानी की जांच कर उसे पीने योग्य बनाया जा रहा है। गांवों के पंप हाउस और पानी की टंकियां ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समितियों को सौंपी जाएंगी। जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर रहेगा।