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UP: बारिश और सहालग से सब्जियों के दाम में लगी आग... घर का बजट झुलसा, 80 में टमाटर, 160 में मटर

Wed, 19 Nov 2025 10:09 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 19 Nov 2025 10:09 AM IST
सार

बारिश और सहालग के सीजन के कारण सब्जियों के दाम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि लगातार बारिश होने से किसानों को टमाटर की नर्सरी तैयार करने का मौका ही नहीं मिला।

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UP: Rain and wedding season have sent vegetable prices soaring
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Freepik.com

विस्तार

सहालग का सीजन और बारिश की मार ने इस बार सब्जियों के बाजार का पूरा समीकरण बिगाड़ दिया है। बढ़ी हुई मांग और कम उत्पादन के चलते फुटकर मंडियों में मौसमी व ऑफ-सीजन दोनों तरह की सब्जियों के दाम पिछले आठ-दस दिनों में डेढ़ गुना तक बढ़ चुके हैं।

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इससे आम आदमी की थाली महंगी हो गई और बजट बिगड़ गया है। कारोबारियों का मानना है कि सहालग की वजह से उपभोग बढ़ा है, वहीं विशेषज्ञ बारिश के कारण बोआई न होने को असली वजह मानते हैं। निशातगंज, चौक और अन्य मंडियों में जो लौकी कुछ दिन पहले 30-40 रुपये किलो थी, वह अब 60 रुपये पहुंच गई है। कट्टू 50 और गाजर 60 रुपये किलो बिक रही है। बैंगन भी 60 रुपये किलो है। गोभी 25 रुपये प्रति पीस हो गई है।
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सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला टमाटर और शिमला मिर्च 50-60 से बढ़कर 80 रुपये किलो पर पहुंच गया है। सब्जी व्यापारी जुम्मन बताते हैं कि सहालग में मांग बढ़ने से परवल 120 और मटर 160 रुपये किलो हो गई है। यहां तक कि मुफ्त मिलने वाली धनिया भी अब 200 रुपये किलो में अकड़ दिखा रही है। मोहल्लों और ठेलों पर तो यही सब्जियां 10-20 रुपये किलो और महंगी मिल रही हैं।

अक्तूबर की बारिश ने बिगाड़ा खेती का कैलेंडर

कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि अक्तूबर तक लगातार बारिश ने किसानों को टमाटर की नर्सरी तैयार करने का मौका ही नहीं दिया। लखनऊ में नवंबर तक फैजाबाद, उन्नाव, बाराबंकी और आजमगढ़ से टमाटर की आपूर्ति आती है, जहां अभिलाष, नामधारी 585 और परी जैसी प्रजातियां लगाई जाती हैं। इस बार नर्सरी तैयार न होने से टमाटर का रकबा कम हुआ और बारिश के बाद वायरस का खतरा भी दिसंबर तक बना रहता है।

राजधानी के ग्रामीण इलाकों में बैंगन और करेला की खेती पहले ही सीमित है। करेला मुख्य रूप से हरदोई में होता है। बख्शी का तालाब और चिनहट बैंगन के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।

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