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यूपी : ग्राम्य विकास विभाग की भर्ती रद्द होने के बाद आउटसोर्सिंग नीति पर सवाल
Fri, 13 Aug 2021 09:31 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 13 Aug 2021 09:31 AM IST
सार
ग्राम्य विकास विभाग ने मनरेगा में 1,278 पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती निकाली थी, लेकिन पोर्टल ठीक से काम नहीं कर सका। पर, एपीओ के लिए पर्याप्त आवेदन भी हो गए। शिकायतें हुईं कि इस प्रक्रिया में जुगाड़ की गुंजाइश है और तमाम पात्र वंचित हो जा रहे हैं।
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मनरेगा
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से ‘पहले आओ-पहले पाओ’ सिद्धांत पर आउटसोर्सिंग से प्रस्तावित भर्ती रद्द किए जाने के बाद आउटसोर्सिंग भर्ती नीति पर ही सवाल खड़ा हो गया है। इसी नियम से दूसरे विभागों में हुईं भर्तियों पर भी अब सवाल उठाए जा रहे हैं। अब इस नियम के स्थान पर नई पारदर्शी व्यवस्था अपरिहार्य हो गई है।
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ग्राम्य विकास विभाग ने पिछले दिनों मनरेगा में 1,278 पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती निकाली थी, लेकिन पोर्टल ठीक से काम नहीं कर सका। पर, एपीओ के लिए पर्याप्त आवेदन भी हो गए। शिकायतें हुईं कि इस प्रक्रिया में जुगाड़ की गुंजाइश है और तमाम पात्र वंचित हो जा रहे हैं।
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इस पर अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह ने पहले आओ-पहले पाओ (फर्स्ट कम-फर्स्ट सर्व) और रिक्तियों के सापेक्ष तीन गुना आवेदन प्राप्त होते ही पोर्टल के स्वत: बंद होने की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए भर्ती कार्यवाही निरस्त कर दी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था चयन व तैनाती के लिए तर्कपूर्ण नहीं है। सेवायोजन पोर्टल पर रिक्ति के तीन गुना आवेदन प्राप्त होते ही पोर्टल का बंद हो जाना भी न्यायोचित नहीं है। वजह, यह सभी को समान अवसर प्रदान नहीं करता तथा, नैसर्गिक न्याय के विपरीत है। इसके बाद यह नीति ही सवालों में आ गई है। अब इस पर निर्णय सरकार को करना है।
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चयन की नीति तय, लेकिन पूरा पालन नहीं
आउटसोर्सिंग की भर्तियों में मनमानी व भ्रष्टाचार के मामले बड़े स्तर पर सामने आने के बाद शासन ने 18 दिसंबर, 2019 को आउटसोर्सिंग से मैनपावर नियुक्ति की नीति जारी की थी। इसमें जेम पोर्टल से आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन से लेकर कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया का सिद्धांत तय किया गया था। सिद्धांत के मुताबिक पारदर्शी व्यवस्था बनाकर चयन करने को कहा गया था। इसके बाद श्रम विभाग ने रिक्तियों के सापेक्ष तय संख्या में आवेदन प्राप्त होते ही पोर्टल पर आवेदन रुकने की प्रणाली लागू की।
यह है पहले आओ-पहले पाओ प्रणाली
श्रम विभाग ने 18 अगस्त, 2020 के शासनादेश में स्पष्ट किया है कि ‘आवेदन की अंतिम तिथि पर अथवा अंतिम तिथि के पूर्व, यदि अधिसूचित रिक्तियों के सापेक्ष एक कर्मी के लिए पोर्टल से पांच आवेदनकर्ताओं, दो या दो से अधिक कर्मियों की मांग पर तीन गुना, लेकिन न्यूनतम 10 आवेदकनकर्ता उपलब्ध हो जाते हैं तो आवेदन की प्रक्रिया स्वत: रुक जाएगी। सेवा प्रदाता द्वारा इन अभ्यर्थियों का साक्षात्कार/लिखित परीक्षा तथा प्रमाणपत्रों/अभिलेखों का परीक्षण करते हुए समुचित संख्या में लाभार्थियों के चयन की कार्यवाही शुरू की जाएगी।’ यह भी कहा गया कि आउटसोर्सिंग की सभी नियुक्तियों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्रदेश में 2.63 लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी
अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि श्रम विभाग के मौजूदा नियमों से आउटसोर्सिंग की कितनी भर्तियां हुई हैं। पर, कार्मिक विभाग की नीति व श्रम विभाग के इस नियम के पहले आउटसोर्सिंग से भर्ती में और भी खुले भ्रष्टाचार व मनमानी की शिकायतें थीं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में वर्तमान में 2.63 लाख आउटसोर्सिंग सिस्टम से चयनित कर्मचारी काम कर रहे हैं। शासन पिछले पांच वर्ष में आउटसोर्सिंग पर चयनित कर्मियों की सूचनाएं इकट्ठा रहा है।
आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मी
समूह ‘क’ 31
समूह ‘ख’ 3519
समूह ‘ग’ 1,28,365
समूह ‘घ’ 1,43,030
800 करोड़ तक पहुंचा आउटसोर्सिंग का कारोबार
शासन के आलाहाकिमों और प्राइवेट भर्ती एजेंसियों की आपसी समझ से धीरे-धीरे पूरी सरकारी व्यवस्था आउटसोर्सिंग कारोबार के हवाले होती जा रही है। बताया जा रहा है कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित भर्ती पर रोक के बाद जरूरत के अनुसार इन पदों पर आउटसोर्सिंग भर्ती की व्यवस्था शुरू की गई थी। लेकिन, अब इन बाहरी एजेंसियों का दखल सभी श्रेणी की भर्तियों तक बढ़ गया है। आउटसोर्सिंग का कारोबार करीब पौने तीन लाख कर्मियों व 800 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
अपर मुख्य सचिव श्रम सुरेश चंद्रा ने कहा कि अपर मुख्य सचिव, ग्राम्य विकास का पत्र अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र प्राप्त होने पर सक्षम स्तर पर रखा जाएगा। जो भी निर्णय होगा, उसे लागू कराएंगे।