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UP: केजीएमयू कार्य परिषद में SC-OBC प्रोफेसर मनोनयन में देरी, राज्यपाल ने एक सप्ताह में मांगा जवाब
Tue, 30 Jun 2026 07:31 PM IST
Akash Dwivedi
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Akash Dwivedi
Updated Tue, 30 Jun 2026 07:31 PM IST
सार
केजीएमयू की कार्यपरिषद में अनुसूचित जाति और ओबीसी के एक-एक प्रोफेसर के मनोनयन में देरी पर राजभवन और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट तलब की है। संशोधित अधिनियम के बावजूद नियुक्तियां नहीं हुईं। अब विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमों का पालन कर शीघ्र कार्रवाई और आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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केजीएमयू।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
केजीएमयू की कार्य परिषद में अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के एक-एक प्रोफेसर को शामिल करने के लिए शासन से निर्देश भेजा गया है। फिर भी अभी तक केजीएमयू प्रशासन ने कार्यपरिषद में प्रोफेसरों का मनोनयन नहीं किया है। अब शासन से दोबारा केजीएमयू कुलसचिव को निर्देश जारी किया गया है।
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विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम 2025 पास किया। इसके तहत केजीएमयू की नियमावली में बदलाव किया गया। निर्देश दिया गया कि कार्यपरिषद में वरिष्ठता के आधार पर अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के एक-एक प्रोफेसर का मनोयन किया जाए। दो जनवरी को केजीएमयू प्रशासन को अधिनियम के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
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इसके बाद मनोनयन नहीं किया गया। इस मामले को लेकर एमएलसी रमा निरंजन, विधायक जय देवी, सांसद आरके चौधरी आदि ने राज्यपाल को पत्र लिखा। अब राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डा. पंकज एस जानी ने केजीएमयू की कुलपति को पत्र भेजकर सप्ताहभर में आख्या देने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कुलसचिव को पत्र भेजकर केजीएमयू अधिनियम की धारा 24 क का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा कि पूरे मामले में कार्रवाई करते हुए आख्या प्रस्तुत किया जाए।
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