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यूपी: पांच यूनिटों में शुरू हुआ उत्पादन फिर भी गांवों में बिजली कटौती, खत्म नहीं हुआ बिजली संकट
Fri, 18 Sep 2026 01:58 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:58 PM IST
सार
यूपीएसएलडीसी की दैनिक प्रणाली रिपोर्ट के अनुसार 17 सितंबर को प्रदेश में 3375 मेगावाट की आपात कटौती की गई। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा। निर्धारित 18 घंटे के रोस्टर के मुकाबले गांवों में महज 14 घंटे 15 मिनट बिजली आपूर्ति हुई।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में एक साथ 13 बिजली उत्पादन इकाइयों के ठप होने से पैदा हुआ बिजली संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि बृहस्पतिवार को पांच पांच यूनिटों में उत्पादन शुरू होने से 1760 मेगावाट बिजली की आपूर्ति बहाल हुई है।
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अभी आठ इकाइयों के बंद रहने से 4180 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है। ऊर्जा विभाग को उम्मीद है कि शुक्रवार और शनिवार तक कुछ और यूनिटों में उत्पादन शुरू हो जाएगा, जिससे संकट में कुछ राहत मिल सकती है।
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यूपीएसएलडीसी की दैनिक प्रणाली रिपोर्ट के अनुसार 17 सितंबर को प्रदेश में 3375 मेगावाट की आपात कटौती की गई। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा। निर्धारित 18 घंटे के रोस्टर के मुकाबले गांवों में महज 14 घंटे 15 मिनट बिजली आपूर्ति हुई। विभाग के 18 घंटे आपूर्ति के दावे के बावजूद स्थानीय फाल्ट के कारण कई इलाकों में पहले से ही आठ से 10 घंटे बिजली मिल रही है। ऐसे में अतिरिक्त कटौती से उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई।
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सितंबर की जरूरत के प्रबंधन पर सवाल: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सितंबर 2023 में प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग 27,389 मेगावाट, 2024 में 29,347 मेगावाट और 2025 में 30,255 मेगावाट रही थी। इसके बावजूद एक से 16 सितंबर के बीच अधिकतम मांग 27,407 मेगावाट रहने पर भी बिजली प्रबंधन इसे पूरा नहीं कर सका। वर्मा ने सवाल उठाया कि जब अगस्त में 31,296 मेगावाट की मांग पूरी की जा सकती है तो सितंबर की संभावित जरूरत के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित 18 घंटे के रोस्टर के मुताबिक भी आपूर्ति न होने को उपभोक्ताओं के साथ नाइंसाफी बताया। उनका कहना है कि संकट के समय केवल ग्रामीण इलाकों में कटौती करने के बजाय शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से कटौती होनी चाहिए।
लगातार बढ़ी आपात कटौती: यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक 13 सितंबर को 3650 मेगावाट, 14 सितंबर को 1980 मेगावाट, 15 सितंबर को 2340 मेगावाट और 16 सितंबर को 3375 मेगावाट की आपात कटौती हुई।