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यूपी: प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों पर मनमानी तरीके से फीस वसूलने का लगा आरोप, सीएम योगी से लगाई गुहार

Sat, 30 Aug 2025 08:56 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 30 Aug 2025 08:56 PM IST
सार

Medical college fees: प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में हुई बढ़ोत्तरी पर अभिभावकों ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इसको लेकर सीएम योगी से गुहार लगाई है। 
 

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UP: Private medical colleges of the state accused of charging fees arbitrarily, appeal made to CM Yogi
अभिभावकों ने सीएम योगी से लगाई गुहार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेशभर के निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों के अभिभावकों ने मनमाने तरीके से फीस वसूलने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। प्रदेश के निजी कॉलेजों में वर्ष 2024-25 में छात्रों ने दाखिले के दौरान तय की गई फीस के आधार पर दाखिला लिया। तमाम कॉलेज कोर्ट चले गए और बीच में फीस बढ़ा दी गई। अब कॉलेजों ने साफ कह दिया है कि बढ़ी हुई फीस जमा नहीं करने वाले छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं। 

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अभिभावकों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बीच सत्र में ही अतिरिक्त फीस वसूली रोकने की मांग की है। छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि कानपुर के निजी मेडिकल कॉलेज ने शुरुआती वार्षिक शुल्क 12.66 लाख दिया था, जिसे बाद में एक साल के भीतर दो बार बढ़ाकर 15.19 लाख कर दिया है। इसी तरह हापुड़ के निजी मेडिकल कॉलेज ने 11.78 लाख से बढ़ाकर 14.14 लाख कर दिया गया, हालांकि उच्च न्यायालय ने इस बढ़ोतरी पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसके बाद भी निजी कॉलेज फीस वसूल रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि अचानक की गई बढ़ोतरी से उनके सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। यह एक तरह का आर्थिक शोषण है। इसके खिलाफ चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी गुहार लगाई गई, लेकिन वे पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
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यह है नियम
नियमों के तहत ट्यूशन फीस सत्र के बीच में नहीं बढ़ाई जा सकती है। यह बढ़ोतरी सालाना 5 फीसदी या तीन वर्षों में 15 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रदेश में कुछ संस्थानों ने फीस में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि कर दी है, जिसके कारण कानूनी चुनौतियां सामने आई हैं। जुलाई, 2025 में शुल्क निर्धारण समिति ने ट्यूशन, छात्रावास और अन्य शुल्कों में संशोधन किया। छात्रों का आरोप है कि यह कदम नियमों के विपरीत है।

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