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यूपी: अब मरीज जान सकेंगे अस्पताल ने दवा कितने में खरीदी, कितने में बेची; क्यूआर स्कैन कर सब पता चलेगा

Tue, 06 Oct 2026 09:35 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 06 Oct 2026 09:35 AM IST
सार

अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद और बिक्री कीमत अब मरीजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की तैयारी है। फार्मेसियों को वेबसाइट पर दवा की कीमत, लाइसेंस, फार्मासिस्ट और स्टॉक की जानकारी देनी होगी। क्यूआर कोड से मरीज मोबाइल पर विवरण देख सकेंगे। जांच में कई दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है।

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UP: Patients will now be able to know the hospital's purchase and sale prices for medicines; scanning a QR cod
Medicine - फोटो : Medicine

विस्तार

अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं की कीमत को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल परिसर या भर्ती मरीजों के लिए संचालित फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवाओं की खरीद और मरीज को बिक्री कीमत की जानकारी देनी होगी। मरीज या उनके परिजन क्यूआर कोड स्कैन कर यह जानकारी मोबाइल पर देख सकेंगे।

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अस्पताल फार्मेसियों को वेबसाइट पर दवा के निर्माता, ब्रांड, जेनरिक नाम, प्राइस टू रिटेल (पीटीआर) और प्राइस टू कंज्यूमर (पीटीसी) बताना होगा। पीटीआर वह कीमत है जिस पर फार्मेसी ने निर्माता या मार्केटर से दवा खरीदी है, जबकि पीटीसी वह कीमत है जिस पर मरीज को दवा दी जा रही है। यह व्यवस्था दवाओं के साथ मेडिकल डिवाइस और न्यूट्रास्युटिकल्स पर भी लागू होगी।
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हर रिटेल फार्मेसी को बनानी होगी वेबसाइट

एफएसडीए के निर्देश के मुताबिक सभी रिटेल फार्मेसियों को पब्लिक वेबसाइट बनानी होगी। इसमें फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और परिसर का पता देना होगा।  फार्मेसी या अस्पताल के फार्मासिस्ट का नाम, पंजीकरण नंबर और फोटो भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना होगा। स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपडेट करनी होगी। वेबसाइट का यूआरएल और क्यूआर कोड फार्मेसी काउंटर पर प्रमुखता से लगाना होगा।

इसलिए व्यवस्था बदलने की कवायदएफएसडीए की हालिया जांच में अस्पतालों की 214 फार्मेसियों से मिले आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। इनमें 36 दवाओं की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से ज्यादा थी। कुछ मामलों में अंतर 67 गुना तक मिला। मसलन, पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन की खरीद कीमत 74.09 रुपये और एमआरपी 4,980.94 रुपये मिली। 

विभाग के मुताबिक, कई मामलों में निर्माता, मार्केटिंग फर्म और स्टॉकिस्ट अस्पतालों को एमआरपी से काफी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन मरीजों तक इस छूट का पूरा लाभ पहुंचने पर सवाल उठे। इसी वजह से खरीद और बिक्री कीमत सार्वजनिक करने की व्यवस्था की जा रही है।
 

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