यूपी: बसपा के पारिवारिक विवाद में दूसरी पार्टियां सक्रिय, दीपिका के नाम पर चंद्रशेखर बोले- आकाश का स्वागत
Akash Anand: बसपा में चल रहे विवाद के बीच मायावती ने कहा कि ब भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं बल्कि उनकी बेटी दीपिका आनंद बसपा के मिशन को आगे बढ़ाएगी।
विस्तार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि अब भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं बल्कि उनकी बेटी दीपिका आनंद बसपा के मिशन को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि अब आनंद के बेटों को कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मेरे लिए बसपा का मिशन सर्वोपरि है लिहाजा अब मेरे भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं, वकालत की पढ़ाई कर रही बेटी दीपिका आनंद पार्टी का कार्य करेगी। आनंद जरूरत पड़ने पर अपनी जिम्मेदारियां उसे सौंप सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बेटी के तैयार नहीं होने पर आम सहमति से पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह जिम्मेदारी दे सकते हैं। अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है। यह आज मेरा अंतिम फैसला व प्रतिज्ञा है कि आनंद के किसी भी बेटे को बसपा में किसी भी छोटे-बड़े पद पर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
आकाश आनंद के लिए हमेशा दरवाजे खुले हैं : चंद्रशेखर
मायावती की ओर से अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाले जाने पर आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि आकाश मेरी पार्टी में आ जाएं। उनके लिए हमेशा पार्टी के दरवाजे खुले हैं। हम लोग मिलकर बाबा साहब के मिशन को पूरा करेंगे। चंद्रशेखर शनिवार को ईको गार्डन में पंचायत सहायकों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।
6 दिन भी नहीं टिक पाए ईशान, छोटी बहन संभालेगी कमान
बसपा में मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद 6 दिन भी नहीं टिक पाए। उन्हें बीते सोमवार को 19 राज्यों का मुख्य प्रभारी बनाया गया था। आकाश आनंद को पार्टी से आजाद करने के बाद बुआ मायावती ने ईशान के लिए भी पार्टी के दरवाजे भी हमेशा के लिए बंद कर दिए गए। हालांकि भाई आनंद कुमार पर उनका भरोसा कम नहीं हुआ, नतीजतन दीपिका के जरिये के परिवार के लिए एक दरवाजा खुला रखा। अब पार्टी की कमान 'बहिन जी' के नेतृत्व में 'छोटी बहन जी' दीपिका संभालेगी।
दीपिका लंदन में कानून की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। आकाश और ईशान भी लंदन में पढ़ाई कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो के इन फैसलों के गहरे सियासी निहितार्थ भी तलाशने शुरु हो गए हैं। बसपा अपने सबसे तीन महत्वपूर्ण राज्यों यूपी, उत्तराखण्ड और पंजाब में होने वाली विधानसभा चुनाव के मुहाने पर है। लिहाजा जल्द इन फैसलों का दलित वोट बैंक की सियासत में पड़ने वाला असर नजर आ जाएगा। फिलहाल मायावती ने अपनी आयरन लेडी की छवि की मुताबिक पार्टी के भविष्य को लेकर ऐसे सख्त निर्णय लिए हैं जो उनके प्रति सहानुभूति का सबब भी बन सकता है।