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यूपी: छह फीसदी कॉलेज ही नर्सिंग कोर्स करने लायक, 86 फीसदी कॉलेजों में मानक के अनुसार नहीं मिलीं व्यवस्थाएं

Mon, 02 Dec 2024 08:08 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 02 Dec 2024 08:08 AM IST
सार

Nursing Colleges in UP: प्रदेश में करीब 386 कॉलेजों में जीएनएम की करीब 18 हजार सीटें हैं। अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा के जरिए इस कोर्स में दाखिला देने की तैयारी है।

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UP: Only 6% of the colleges in the state are capable of offering nursing courses, 86% of the colleges did not
यूपी में नर्सिंग कॉलेज। डेमो पिक। - फोटो : freepik

विस्तार

प्रदेश में जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम) कोर्स की मान्यता लेने के लिए आवेदन करने वाले कॉलेजों में सिर्फ छह फीसदी में व्यवस्थाएं मालूक मिलीं। कहीं फायर सुरक्षा तो कहीं पर्यावरण की एनओसी नहीं मिली। खास बात यह है कि पहले से चल रहे कॉलेजों में सिर्फ 14 फीसदी ही सीट बढ़ाने के योग्य पाए गए। यह खुलासा हुआ है क्वालिटी काउंसिल ऑफ इडिया (क्यूसीआई) की रिपोर्ट में। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कॉलेज संचालकों में हलचल मची हुई है।

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प्रदेश में करीब 386 कॉलेजों में जीएनएम की करीब 18 हजार सीटें हैं। अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा के जरिए इस कोर्स में दाखिला देने की तैयारी है। पिछले वर्ष इस कोर्स को संचालित करने और जहां कोर्स चल रहा है, वहां सीटें बढ़ाने के लिए 369 कॉलेजों ने उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी में आवेदन किया। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से मान्यता देने और सीटें बढ़ाने से पहले इन कॉलेजों की व्यवस्थाओं की जांच कराने का फैसला लिया। इसके तहत क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम से जांच कराई गई। 
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क्यूसीआई से जांच कराने का फैसला होते ही 36 कॉलेजों ने जांच कराने से इनकार कर दिया। नए कोर्स के लिए 246 और सीट बढ़ाने के लिए 75 कॉलेजों ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जहां पहले से कोर्स चल रहा है, वहां भी कई तरह की खामियां मिली हैं। सीट बढ़ाने के लिए आवेदन करने वाले 75 कॉलेजों में सिर्फ 12 में व्यवस्थाएं अनुकूल पाई गईं, जबकि 75 को खारिज कर दिया गया। इसमें 13 में एनओसी प्रमाण पत्र माकूल नहीं मिले तो 62 में मानक अधूरे हैं। इन कॉलेजों को सीट बढ़ाने की अनुमति नहीं मिल पाएगी। ऐसे में अब कॉलेज संचालकों में हलचल मची है। कॉलेज संचालकों ने क्यूसीआई की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि पहले से चलने वाले कॉलेजों को इंडियन नर्सिंग काउंसिल से भी मान्यता मिलती है। हर साल निरीक्षण में उनके कॉलेजों को काउंसिल की ओर से मान्यता दी गई है। काउंसिल द्वारा बताए गई व्यवस्थाओं का सुधार भी किया गया है।

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246 में सिर्फ नौ पास

एएनएम कोर्स के लिए आवेदन करने वाले 246 कॉलेजों में सिर्फ नौ कॉलेज ही मानक पर खरे उतरे हैं। इन नौ कॉलेज को ही कोर्स संचालन की मान्यता मिल पाएगी। बाकी 237 में तरह- तरह की खांमियां पाई गई हैं, जिसकी वजह से क्यूसीआई ने खारिज कर दिया है। खारिज होने वाले कॉलेजों में सात में निर्धारित मानक के लिए होने वाली एनओसी अपडेट नहीं मिली है, जबकि 230 कॉलेज कोई भी मानक पूरा नहीं करते हैं। क्यूसीआई की टीम ने निरीक्षण के दौरान टीचिंग, हॉस्टल, और हाॅस्पिटल ब्लॉक में मानक के अनुसार एरिया, फायर, पर्यावरण विभाग की एनओसी और मुख्य चिकित्साधिकारी का प्रमाण पत्र, संकाय सदस्यों की संख्या, लैब, लाइब्रेरी और कम्प्यूटर लैब देखा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कोर्स की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत क्यूसीआई से निरीक्षण कराने का फैसला लिया गया। रिपोर्ट मिल गई है। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डा. आलोक कुमार, सचिव उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी।
 
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